जैव विविधता के अभाव से हमारे अस्तित्व पर खड़ा होगा प्रश्नचिन्ह- डॉ सक्सेना
जैव विविधता दिवस पर संगोष्ठी, किया पुरस्कृत

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। जैव विविधता के अभाव से हमारे अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो सकता है।
शुक्रवार सारस प्रेक्षागृह, नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर आयोजित वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना एक्टिंग लोकली फॉर ग्लोबल इम्पैक्ट संगोष्ठी का शुभारम्भ किया गया।
वहीं राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश, डा अरूण कुमार सक्सेना ने कहा कि जैव विविधता एक अमूर्त शब्द लगता है।
परन्तु गहन मंथन करने पर ज्ञात होता है कि अन्न, फल, औषधि रेशे, पशु उत्पाद, पर्यटन सहित विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम जैव विविधता व जैव संसाधनों के साथ निकटता से जुड़े हुए हैं।
उन्होनें कहा कि जैव विविधता के अभाव में हमारा जीवन नीरस होने के साथ ही हमारे अस्तित्व पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश का क्षेत्रफल विश्व का 2.5 प्रतिशत तथा विश्व की कुल जनसंख्या का
लगभग 16 प्रतिशत होने के कारण देश के प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक जैविक दबाव के बाद भी हमारी परम्परा, हमारी संस्कृति व हमारे प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत वैश्विक प्रजातियों में से लगभग 7.5 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
डा सक्सेना ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन तथा युवा व ऊर्जावान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश प्राकृतिक जैव विविधता को सुरक्षित रखते हुए विकास के पथ पर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।
मुख्य अतिथि राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश, डा अरूण कुमार सक्सेना, अन्य विशिष्ट अतिथियों तथा
मंचासीन अतिथियों ने उत्तर प्रदेश की जैव विविधता प्रतीक पोस्टर का अनावरण तथा अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया।
प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, वी हेकाली झिमोमी ने जैव विविधता के महत्व, हमारे जीवन में भूमिका, कन्वेंशन ऑन
बायोलाजिकल डाइवर्सिटी के उद्देश्य तथा अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, 2026 की विषयवस्तु पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्विक व स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन व वैश्विक तापमान में वृद्धि की दर व
वातावरण से कार्बन की मात्रा न्यून करना सम्पूर्ण विश्व के लिए गहन विचार मंथन व चिन्तन का विषय है। सतत् विकास लक्ष्य एसडीजी एवं वैश्विक प्रतिबद्धता का लक्ष्य प्राप्त करने में पर्याप्त जैव विविधता का अभाव एवं जैव विविधता क्षरण मुख्य बाधा है।
उन्होंने यह भी कहा कि हमारे जीवन में जैव विविधता की भूमिका, महत्व व आवश्यकता से स्थानीय समुदाय को अवगत कराकर जैव विविधता संरक्षण व संवर्धन में उनकी सहभागिता व सहयोग प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि
जैव विविधता के सम्बन्ध में पूर्ण जानकारी रखते हुए उसका क्रियान्वयन भली भाँति करने में समर्थ हों। सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश ने अभ्यागतों का स्वागत करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर संगोष्ठी के आयोजन
के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस जैसे अवसर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक व प्रेरित करते हैं। हम सबको हमेशा ध्यान रखना होगा कि हम प्राकृतिक संसाधनों के स्वामी नहीं अपितु ट्रस्टी हैं।
हमारा दायित्व है कि इन प्राकृतिक संसाधनों को भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित व सर्वर्धित करें। श्री चौधरी ने प्रदेश की वन जैव विविधता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अवगत कराया कि विगत नौ वर्षों में किये गये अभिनव प्रयासों के परिणामस्वरूप वन जैव विविधता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
नीरज कुमार, सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने अभ्यागतों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विस्तारपूर्वक संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। नीरज कुमार ने कहा कि प्रदेश में 2932 पादप व 2434 प्राणि प्रजातियों विद्यमान है।
पाई जाती हैं। प्रदेश में लगभग 60000 जैव विविधता प्रबन्ध समितियाँ अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जैव विविधता प्रबन्धन कर रही हैं।
तकनीकी सत्रो में डा जेके पाण्डे, सेनि निदेशक, पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा उत्तर प्रदेश की पशुपालन विविधता-चुनौतियों एवं उपाय पर प्रस्तुतिकरण किया।
डा आरके सिंह, निदेशक, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र, रहमान खेड़ा, लखनऊ द्वारा चैलेंजस एंड इश्यूज रिगार्डिंग क्रॉप रेजिलीन्स इन उत्तर प्रदेश विषय पर प्रस्तुतिकरण किया। डा राजेश वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, सीमैप द्वारा औषधीय जैव विविधता संवर्धन में कृषकों की भूमिका विषय पर प्रस्तुतिकरण किया।
डा संजीव नायका, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, एनबीआरआई द्वारा विरासत वृक्षों के संदर्भ में वृक्षों का रोगों से बचाव पर प्रस्तुतिकरण किया। डा तारा चन्द्र कुमावत, वैज्ञानिक, राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ द्वारा
जलीय अनुवांशिक संसाधनों का संरक्षण, विकास और सतत् प्रबन्धनः वैश्विक जैव विविधता प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर संस्थागत प्रयास पर प्रस्तुतिकरण किया। डा सोमेश गुप्ता, तकनीकी अधिकारी, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने जैव विविधता अधिनियम 2002 के महत्वपूर्ण संशोधनों पर चर्चा विषय पर व्याख्यान दिया।
संगोष्ठी में सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन मनीष मित्तल व सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, बी चन्द्रकला भी उपस्थित रही।



