अंग प्रत्यारोपण में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और इंटेंसिविस्ट की भूमिका अहम -प्रो आरके धीमन
प्रथम SGPGI ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया मीट

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। अंग प्रत्यारोपण की बढ़ती आवश्यकताओं पर मंथन किया गया। शनिवार को
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया यूनिट द्वारा “सॉलिड ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन करेंट एडवांसेस इन पेशेंट केयर ” विषय पर
राष्ट्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम एवं प्रथम SGPGI ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया मीट का आयोजन किया गया।
अंग प्रत्यारोपण में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण
अंग प्रत्यारोपण उन जटिल एवं जीवनरक्षक चिकित्सा प्रक्रियाओं में शामिल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंग प्रत्यारोपण मे केवल सर्जरी पर निर्भर नहीं करती,
बल्कि सर्जरी से पहले, सर्जरी के दौरान और उसके बाद की विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल पर निर्भर करती है। इसमें एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
वे गंभीर रूप से बीमार मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए तैयार करने, ऑपरेशन के दौरान ह्रदय गति व् ब्लड प्रेशर का नियंत्रण अवं खून के जमने की छमता को बनाए रखने में, प्रत्यारोपित अंग में पर्याप्त रक्त प्रवाह बनाए रखने तथा ऑपरेशन के बाद गहन चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
देश में अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रमों का तेजी से विस्तार हो रहा है। लेकिन इसके अनुरूप विशेष रूप से प्रशिक्षित ट्रांसप्लांट एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
वर्तमान में देश में एनेस्थीसियोलॉजी में एमडी के बाद तीन वर्षीय DM ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया की केवल पांच सीटें उपलब्ध हैं। एसजीपीजीआई में दो वर्षीय ऑर्गन ट्रांसप्लांट फेलोशिप के अंतर्गत प्रतिवर्ष चार सीटें उपलब्ध हैं।
कुछ अन्य संस्थानों में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित हैं, लेकिन देश की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए विशेषज्ञों की संख्या में और वृद्धि की आवश्यकता है।
देश भर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां
कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने बताया कि इस सीएमई का मुख्य उद्देश्य देशभर में ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया के क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों को एक साझा मंच प्रदान करना है।
जहां वे जटिल मामलों के अनुभव साझा कर सकें, एक-दूसरे से सीख सकें तथा नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों को अपनाकर मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार कर सकें।
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को और सुदृढ़ करना इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसके साथ ही युवा एनेस्थीसियोलॉजिस्ट को प्रत्यारोपण के गंभीर मरीजों के प्रबंधन की विशिष्ट चुनौतियों और सामान्य एनेस्थीसिया से भिन्न आवश्यकताओं से परिचित कराना भी इस कार्यक्रम का उद्देश्य रहा।
इस राष्ट्रीय सीएमई में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से 15 से अधिक विशेषज्ञ वक्ताओं ने भाग लिया तथा लगभग 60 चिकित्सकों ने सहभागिता की।
एसजीपीजीआई केवल अपने संस्थान में प्रत्यारोपण सेवाओं के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम शुरू करने में सहयोग कर रहा है।
संस्थान की समर्पित यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी एवं ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया टीम ने एम्स जोधपुर, एम्स भटिंडा, एम्स रायपुर, KGMU तथा हाल ही में सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा जैसे संस्थानों को किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम विकसित करने में तकनीकी एवं शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया है।
संस्थान निदेशक डॉ आरके धीमन ने DM पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की बताई योजना..
आयोजन समिति को बधाई देते हुए पद्मश्री डॉ. आरके धीमन ने अपने संदेश में कहा कि संस्थान के क्वाटरनरी केयर सेंटर के रूप में विकसित होने की दिशा में संस्थान अपने अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ एवं विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
लिविंग डोनर किडनी एवं लिवर प्रत्यारोपण के साथ-साथ संस्थान ने मृत्योपरांत अंगदान से अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है तथा उत्तर प्रदेश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट भी किया है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित एवं सफल अंग प्रत्यारोपण में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और इंटेंसिविस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ एनेस्थेटिस्ट की मजूदगी, उसके ज्ञान कौशल व् गंभीर अवस्था से मरीज़ को निकलने की छमता से प्रत्यारोपण के प्रत्येक चरण में मरीज की सुरक्षा एवं बेहतर परिणाम सुनिश्चित होता है।
उन्होंने आगे बताया कि देश में ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर के विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए संस्थान में ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन एवं क्रिटिकल केयर में DM पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की योजना है। जिससे देश में इस क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो राजेंद्र प्रसाद, नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के उत्तर प्रदेश कन्वीनर तथा संस्थान के कार्यवाहक निदेशक प्रो. शालीन कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं कार्यकारी कुलसचिव सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस राष्ट्रीय सीएमई के आयोजन अध्यक्ष डॉ. संजय धीरज एवं डॉ. संदीप साहू, आयोजन सचिव डॉ. दिव्या श्रीवास्तव, सह-आयोजन सचिव डॉ. तापस कुमार सिंह तथा कोषाध्यक्ष डॉ. तन्वी भार्गव थे। आयोजन टीम में डॉ. वैशाली अग्रवाल एवं डॉ. तृप्ति सिंह शामिल रहे।



