राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस वैज्ञानिकों ने दी जानकारी
एनबीआरआई में मना राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवसपर वैज्ञानिकों ने जानकारी साझा की। सोमवार को
राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस केएन कौल ब्लॉक स्थित लोटस सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात वैज्ञानिक एवं उद्योग विशेषज्ञ डॉ. आश्विन काशिकर, जनरल मैनेजर (आर एंड डी), अंकुर सीड्स प्रा. लि.,
नागपुर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। वहीं संस्थान के निदेशक डॉ. एके शासनी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने समाजहित में पादप विज्ञान अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
“टेक्नोलॉजी: कल्टीवेटिंग टुमारोस हार्वेस्ट” विषय पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस व्याख्यान देते हुए डॉ. आश्विन काशिकर ने कृषि एवं पादप जैव प्रौद्योगिकी में उभरती प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, जीनोमिक चयन, प्रिसीजन ब्रीडिंग एवं जीन संपादन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से जलवायु-अनुकूल एवं उच्च उत्पादकता वाली फसल किस्मों के विकास पर प्रकाश डाला।
डॉ. आश्विन काशिकर ने जीनोमिक चयन, स्पीड ब्रीडिंग तथा एआई आधारित हाई-थ्रूपुट फीनोटाइपिंग जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकों के बारे में जानकारी दी, जो फसल सुधार कार्यक्रमों को तीव्र गति प्रदान कर रही हैं।
उन्होंने CRISPR-Cas आधारित जीन संपादन, जीन टार्गेटिंग, प्राइम एडिटिंग एवं सिंथेटिक बायोलॉजी जैसी तकनीकों के माध्यम से पोषण गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं सतत कृषि उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
व्याख्यान का एक प्रमुख आकर्षण कृषि में ऑटोमेशन एवं रोबोटिक्स पर आधारित चर्चा रही। जिसमें एआई-सहायित कृषि प्रणालियों द्वारा संसाधनों के बेहतर उपयोग, अपव्यय में कमी तथा श्रम की कमी जैसी चुनौतियों के समाधान पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मॉलीक्यूलर फार्मिंग, प्रिसीजन एडिटिंग एवं मशीन लर्निंग का समन्वय भविष्य में सतत कृषि एवं वैश्विक खाद्य सुरक्षा को नई दिशा देगा।
अपने व्याख्यान के दौरान डॉ. आश्विन काशिकर ने संस्थान द्वारा विकसित गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) प्रतिरोधी जीएम कपास के चल रहे परीक्षणों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि यह अनुसंधान टिकाऊ एवं प्रभावी कीट-प्रतिरोधी कपास किस्मों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है।
व्याख्यान में कीट-प्रतिरोधी तकनीकों, एआई, एमएल आधारित बीज गुणवत्ता विश्लेषण तथा फसल अभियांत्रिकी एवं हाइब्रिड विकास से संबंधित नवाचारों को भी प्रस्तुत किया गया।
डॉ. आश्विन काशिकर ने कहा कि ऑटोमेशन, प्रिसीजन जीन एडिटिंग एवं इंटेलिजेंट फार्मिंग सिस्टम का समन्वय आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. पीके सिंह, वैज्ञानिक-जी ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं विषयवस्तु पर प्रकाश डाला, जबकि अंत में डॉ. मनीष भोयर, वैज्ञानिक-ई ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।



