खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने नकली दवाओं पर कसा शिकंजा
अब तक 58 थोक लाइसेंस निरस्त, 9 पर एफआईआर दर्ज

आगरा। लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने नकली दवाओं पर शिकंजा कस दिया है। जिससे नकली दवाओं के सौदागरों की मुश्किलें बढ़ा दी गयी है।
आगरा में अवैध दवाओं के सिंडिकेट पर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बडी कार्रवाई की है। बीते शुक्रवार 10 जुलाई को अभियान में 13 बड़ी फर्मों पर शिकंजा, 3 नई एफआईआर की प्रक्रिया शुरू की गयी
और अब तक 58 थोक लाइसेंस निरस्त कर कुल 9 एफ आई आर दर्ज कराई गयी है।
प्रदेश वासियों को सुरक्षित, प्रामाणिक एवं गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध कराने तथा अवैध दवा व्यापार को जड़ से उखाड़ने के मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा आगरा को मुख्य केंद्र
बनाकर चौतरफा विधिक प्रवर्तन अभियान (इनफ़ोर्समेंट ड्राइव ) चलाया जा रहा है। आगरा में नकली (Counterfeit) दवाओं, अवैध री-लेबलिंग तथा फिजिशियन सैंपल्स के क्रय-विक्रय पर प्रभावी रोकथाम के लिए लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
बीते शनिवार 10 जुलाई को आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के नेतृत्व में विभिन्न जनपदों के 15 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों द्वारा पूर्व की कड़ियों को जोड़ते हुए आगरा के प्रमुख दवा बाजारों में एक साथ योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की गई ।
10 जुलाई की छापेमारी में..
आयुक्त के नेतृत्व में गठित 15 औषधि निरीक्षकों की टीमों द्वारा आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार तथा नवबिया मार्केट सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में 13 संदिग्ध फर्मों पर औचक छापेमारी की गई ।
जिसमें मोहन ट्रेडर्स, कम्बूटोला,मनी मेडिकल, मुबारक महल, नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्स, वंश फार्मा ,कम्बूटोला, प्रशांत मेडिकल, कम्बूटोला, पोरवाल मेडकेयर, शू मार्केट, एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस, मुबारक महल,
डॉली ड्रग हाउस, कम्बूटोला, मनु फार्मा, कोतवाली के सामने, आरडीएम फार्मास्युटिकल्स, नवबिया मार्केट, इनाया फार्मा, कम्बूटोला, नूर फार्मा, कम्बूटोला जिसमें फर्म मोहन ट्रेडर्स, कम्बूटोला,मनी मेडिकल, के परिसर पूरी
तरह सील किये, तथा नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्सएवं मनु फार्मा, धारा 22(1)(d) के अंतर्गत रोक लगाई गई । छापे में कुल 35 संदिग्ध औषधियों के नमूने जांच एवं विश्लेषण के लिए संग्रहीत किये गए एवं नकली ड्रग सिंडिकेट में
सम्मिलित फ़र्मों के कुल 14 संचालकों के विरुद्ध बीएनएस की सुसंगत धाराओं में खिलाफ 03 नई प्राथमिकी दर्ज कराये जाने के लिए कोतवाली फव्वारा, आगरा में विभाग द्वारा तहरीर दी गई है।
इन दवा कारोबारियों पर मामला हुआ दर्ज..
मेसर्स विभोर मेडिकल ऐजेन्सी एवं सहयोगी फर्मों का संगठित गिरोह बनाकर दवा रैकेट
मेसर्स टोरेन्ट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड द्वारा उनके बहुचर्चित उत्पाद टैब चीमोरल फोर्टे ‘ व शेलकल के नकली
होने की गोपनीय शिकायत के क्रम में 7 नवंबर 2025 को मेसर्स अंशिका फार्मा (आगरा) के प्रो मनोज गुप्ता की जांच में पाया गया की उन्होंने विभोर मेडिकल एजेंसी से चीमोरल फोर्टे की भारी खेप खरीदी थी।
जिसे कोलकाता के पाल ब्रदर्स को बेच दिया था । विभोर मेडिकल एजेंसी के मालिक संजीव कुमार गुप्ता के प्रतिष्ठान की जांच की गई , तो उनके स्टॉक रजिस्टर में अंशिका फार्मा को बेची गई, दवाओं का रिकॉर्ड तो मिला और जब इन दवाओं की खरीद के बिल देखे गए,
तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। विभोर मेडिकल ने कागजों में दावा किया था कि उसने ये दवाएं गोरखपुर की गुप्ता मेडिकल एजेंसी और आगरा के हर्षित ट्रेडर्स से खरीदी हैं । जबकि इन दोनों ही फर्मों ने किसी भी ऐसे बिल को जारी करने या दवा बेचने से साफ इनकार कर दिया ।
इससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि विभोर मेडिकल द्वारा प्रस्तुत किए गए खरीद के बिल जाली थे व अवैध कारोबार पर पर्दा डालने के लिए बनाया गया था ।
टीम ने आगरा की ही एक अन्य फर्म, वरदान मेडिकल एजेंसी की भी जांच की। इस दौरान वहां ‘ज़ोस्टम-ओ टैबलेट का ऐसा बड़ा स्टॉक मिला। जिस पर स्पष्ट रूप से ‘ईएसआई सप्लाई नॉट फॉर सेल’ लिखा था ।
जिसे मेडिकल स्टोर पर रखकर खुले बाजार में बेचना एक बहुत ही गंभीर कानूनी अपराध माना जाता है। इसके अलावा, वरदान मेडिकल से जांच के लिए गए दवाओं के नमूनों की जब राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला उप्र से जांच कराई गई, तो बेहद चौंकाने वाले नतीजे सामने आए।
वहां से लिए गए चीमोरल फोर्टे के एक बैच को गुणवत्ता में अधोमानक और ‘एसिलॉक’ दवा को पूरी तरह से नकली (स्प्यूरियस ) घोषित किया गया । निर्माता कंपनी टोरेंट फार्मा ने भी अपनी जांच के बाद लिखित रूप से पुष्टि कर दी कि ये दोनों दवाएं उनके द्वारा निर्मित नहीं हैं और ये पूरी तरह से नकली हैं।
प्रकरण में वरदान मेडिकल के प्रोपराइटर अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उसने ये सभी नकली दवाएं विभोर मेडिकल एजेंसी के संजीव कुमार गुप्ता से बेहद कम दामों पर खरीदी थीं। जिसका उसे कोई पक्का बिल भी नहीं दिया गया था।
उपरोक्त के आधार पर मेसर्स विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और कोलकाता के पाल ब्रदर्स आपस में मिलकर एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ ।
इनके द्वारा मेडिकल स्टोर की आड़ में नकली और सरकारी कोटे की दवाओं का अवैध भंडारण व क्रय-विक्रय करके सीधे तौर पर आम जनता और मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ किये जाने के दृष्टिगत मेसर्स विभोर मेडिकल
ऐजेन्सी प्रो. संजीव कुमार गुप्ता, वरदान मेडिकल एजेन्सीस प्रो अंकुर अग्रवाल, हर्षित ट्रेडर्स प्रो प्रियंका बंसल, गुप्ता मेडिकल एजेन्सीस प्रो.अरुण कुमार गुप्ता व पाल ब्रदर्स, कोलकाता, के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 276, 277, 278, 316, 318 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गयी ।
अस्पताल सप्लाई की जीवनरक्षक दवाओं की री-लेबलिंग और कालाबाजारी बीते माह 21 मई को छापे के समय ‘मेसर्स युग फार्मा’ प्रो सचिन गुप्ता का औचक निरीक्षण किया गया । जांच के दौरान दुकान में इंसुलिन के इंजेक्शन बिना कोल्ड चेन के बाहर असुरक्षित पाए गए।
जिन पर से मूल विवरण मिटाकर अवैध रूप से री-लेबलिंग की गई थी । युग फार्मा के संचालक से पूछताछ करने पर उसने यह माल ‘शारदा फार्मा’ से बिना बिल के खरीदना स्वीकार किया । जब टीम ‘शारदा फार्मा’ संचालक शिवम गुप्ता पर पहुंची, तो दुकान बंद मिली।
प्रोपराइटर को बुलाकर जांच करने पर उसने बताया कि उसने यह माल ‘आरएमडी फार्मा’ संचालक राजेश गुप्ता से लिया था। साक्ष्य छुपाने और संदिग्धता के आधार पर विभाग द्वारा उसी दिन इन तीनों दुकानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया था।
तीनों दुकानों के स्वामियों द्वारा दी गई अर्जियों के आधार पर जब जांच के लिए इनके ताले खोले गए और ‘शारदा फार्मा’ के CCTV फुटेज की गहन स्क्रूटनी की गई, तो एक गंभीर वित्तीय और औषधीय अपराध सामने आया ।
फुटेज में साफ देखा गया कि छापे की भनक लगते ही शारदा फार्मा के प्रोपराइटर का भाई और उसका लड़का नबील खान और सोनू बघेल दुकान से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाओं के डिब्बे और स्टॉक समेटकर पिछले दरवाजे से फरार हो गए थे ।
फरार चल रहे आरोपियों को एसटीएफ गाजियाबाद की टीम द्वारा धर-दबोचा गया । पूछताछ में पकड़े गए लड़कों ने स्वीकार किया की वे अस्पताल की दवाओं की चोरी मोहित गुप्ता प्रो महादेव गुप्ता’ से सरकारी अस्पताल
आपूर्ति की औषधियां बिना बिल के सस्ते दामों पर अवैध रूप से खरीदते थे और इन दवाओं पर सरकारी,अस्पताल की जो पहचान ‘चिप या मुहर लगी होती थी। उसे ये लोग केमिकल व गोंद की मदद से मिटा देते थे।
इसके बाद उन पर नया फर्जी लेबल और मनमानी एमआरपी अंकित करके खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बिना बिल के बेच देते थे। अतः उपरोक्त ‘मेसर्स युग फार्मा’ प्रो सचिन गुप्ता, ‘शारदा फार्मा’ संचालक शिवम गुप्ता व
नितिन गुप्ता ‘आरएमडी फार्मा’ संचालक राजेश गुप्ता, मोहित गुप्ता प्रो महादेव फार्मा’ व हितेन्द्र अग्रवाल के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 276, 277, 278, 316, 318 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गयी है ।
मेसर्स वीए मेडिकोज, रुद्रा एवं भगवती मेडिकल द्वारा नकली दवाओं का विक्रय व री-लेबलिंग किया जाना बीते 1 और 2 व 3 जुलाई को निम्न फ़र्मों का निरीक्षण औषधि निरीक्षकों द्वारा किया गया ।
मेसर्स वीए मेडिकोज के निरीक्षण के दौरान बहुचर्चित कंपनियों की गंभीर औषधियां—टैब . जर्डियंस , टेल्मा -एच , थाइरोक्स टैब . एवं ग्लूकोनॉर्म पीजी -2 भंडारित पाई गईं। जिनके क्रय बिल (बीजक) पार्टनर शोभित अग्रवाल प्रस्तुत नहीं कर सके । सघन अवलोकन में पाया गया कि इन
दवाओं के मूल लेबल हटाकर पुनः नए लेबल लगाए गए थे । सुरक्षा जांच के तहत टेल्मा -एच दवा पर UV लाइट रिफ्लेक्ट नहीं हुई। जिससे प्रथम दृष्टया इसके पूर्णतः नकली होने की पुष्टि हुई। इसके अतिरिक्त दुकान के कोने
से फटे गत्तों में पुरानी व खुली हुई (ओपन मोनोकार्टन) दवाएं बरामद हुईं । शोभित अग्रवाल प्रो मेसर्स वीए मेडिकोज ने दावा किया कि ये दवाएं उसे मेसर्स हर्षित ट्रेडर्स ने बिना बिल के दी थीं, जबकि विभाग नकली दवाओं के चलते 16 जून को ही हर्षित ट्रेडर्स का लाइसेंस निरस्त कर चुका था ।
प्रकरण में बिलों के सत्यापन में यह ज्ञात हुआ कि इस सिंडिकेट द्वारा 30 जनवरी को नकली दवाओं के कारण विभाग द्वारा निरस्त की जा चुकी मेसर्स वरदान मेडिकल ऐजेन्सी जिसके स्वामी अंकुर अग्रवाल है, के पुराने बिलों का अवैध इस्तेमाल किया जा रहा था ।
अंकुर अग्रवाल ने निरस्तीकरण के बाद भी रु1 करोड़ 88 लाख की दवाओं की कागजी बिलिंग की । उसने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने पूर्व में विभोर मेडिकल ऐजेन्सी के प्रो संजीव गुप्ता से बिना बिल के नकली चीमोरल फोर्टे
दवाएं कम दाम में खरीदी थीं । विधिक जांच से बचने के लिए उसने जानबूझकर अपने लैपटॉप को ट्रक के नीचे कुचलकर साक्ष्य नष्ट करने का झूठा बहाना बनाया । दवाओं का भौतिक रूप से कोई परिवहन नहीं किया गया ।
मेसर्स रुद्रा एन्टरप्राइजेज के प्रो मोहित बंसल और भगवती मेडिकल ऐजेन्सी,मथुरा, ने आपस में मिलीभगत कर 01 मई और 02 मई की तिथियों में फर्जी बिल काटे, जबकि उस पते पर मथुरा की फर्म को लाइसेंस विभाग द्वारा 20 मई को जारी किया गया था ।
इससे स्पष्ट हुआ कि बिलों के साथ भारी कूटरचना व छेड़छाड़ की गई । दवाओं के अवैध फेरबदल के लिए ऑटो-रिक्शा और गाड़ी संख्या UP80EL0069 का उपयोग किया गया। बिलों को डायवर्ट करके मूल्य बढ़ाकर कागजी करू विक्रय दिखाया गया ताकि नकली दवाओं को
बाजार में वैध रूप दिया जा सके । उपरोक्त वीए मेडिकोज, शोभित अग्रवाल व प्रमोद अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, प्रो वरदान मेडिकल एजेंसी, संजीव गुप्ता प्रो विभोर मेडिकल एजेंसी, मोहित बंसल प्रो रुद्रा एंटेरप्राइसेज,
भगवती मेडिकल एजेंसी मथुरा एवं आगरा प्रो प्रवीण अग्रवाल के विरुद्ध संगठित अपराध में भारतीय न्याय संहिता के सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गयी है ।
जनपद आगरा में नकली दवाओं पर कसा शिकंजा..
जनपद आगरा में अबतक रु 3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की अवैध, नकली और सरकारी डिफेन्स सप्लाई की औषधियां सीज की गई।
जिसमें मई में अभियान में ‘ज्योति ड्रग हाउस’ के अवैध गोदामों से रु 2.5 करोड़ की इंसुलिन, वैक्सीन व डिफेन्स/ESI सप्लाई की दवाएं बिना कोल्ड-चेन के भंडारित मिलीं। वहीं मेडिकल एजेंसीज’ से रु 50 लाख की नकली ‘ Oxalgin DP’ जब्त हुई।
इसका अंतर-राज्यीय नेटवर्क अलीगढ़ होते हुए रुड़की (उत्तराखंड) की ‘Leroi Pharmaceuticals तक जुड़ा मिला, जहां छापा मारकर नकली पैकेजिंग सामग्री जब्त की गई। जून अभियान में ‘ब्राइट फार्मा’ संचालक के
आवास पर रु 5.20 लाख की जीवनरक्षक व सरकारी दवाओं पर अवैध री-लेबलिंग (मूल्य री-प्रिंट) पकड़ी गई। इसके अलावा सीएफ इंटरप्रयसीस (स्वतः निरस्त गोदाम
का उपयोग), सुमित माधवानी और सुमित गुप्ता के अवैध गोदामों पर छापेमारी कर कुल रु 67 लाख मूल्य की अवैध दवाएं व फिजिशियन सैंपल्स जब्त किए गए।
जांच में अनियमितता एवं अवैध कारोबार में संलिप्तता के आधार पर 58 थोक फर्मों के लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की गई ।
इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ कुल 06 नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं तथा उपरोक्त वर्णित 3 एफआईआर दर्ज कराई जा रही है । वहीं
आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा सख्त निर्देश दिए गए की जनपद आगरा में इन नकली एवं री-लेबलिंग और फिजिशियन सैंपल्स की कालाबाजारी एवं अन्तर्जनपदीय मूवमेंट पर प्रभावी रोकथाम के लिए निगरानी रखी जाए ।
ड्रग एसोसिसिएशनों द्वारा दवा व्यापारियों से अवैध वसूली करने की प्राप्त सूचनाओं के दृष्टिगत आयुक्त द्वारा निर्देश दिए गए कि दवा विक्रेताओं के आर्थिक शोषण की पुष्टि होने पर सम्बन्धित के खिलाफ एक्स्ट्राॉर्शन में मुकदमा लिखकर कार्रवाई करें।



