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उत्तर प्रदेश में पहली बार हृदय प्रत्यारोपण करने में डॉक्टरों ने पायी बड़ी कामयाबी 

डिप्टी सीएम ने हृदय प्रत्यारोपण टीम को दी बधाई 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। प्रदेश में पहली बार डॉक्टरों ने हृदय प्रत्यारोपण करने में बड़ी कामयाबी हासिल कर इतिहास रच दिया। सोमवार को

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने उत्तर प्रदेश का पहला हृदय प्रत्यारोपण करने में सफलता प्राप्त की है। पीजीआई में भर्ती महिला मरीज में हृदय प्रत्यारोपित किया गया है। प्रत्यारोपण के बाद महिला मरीज स्वस्थ्य है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पीजीआई की इस उपलब्धि के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली के एक डोनर ने जीवन रक्षक कई अंग-लिवर, गुर्दे और हृदय-दान किए।

लिवर और गुर्दे का प्रत्यारोपण दिल्ली में ही किया गया जबकि हृदय को पीजीआई में भर्ती महिला मरीज के लिए भेजा गया। प्राप्तकर्ता हृदय की मांसपेशियों की बीमारी, डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के कारण गंभीर हार्ट फेल्योर से पीड़ित था।

डिप्टी सीएम ने बताया कि दिल्ली से हृदय एयर एम्बुलेंस के माध्यम से लाया गया था। चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से पीजीआई तक ग्रीन कॉरिडोर का उपयोग किया गया ताकि मानव अंग को समय पर पीजीआई तक पहुंचाया जा सके।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस सफल ऑपरेशन करने वाली टीम को बधाई देते हुए, इस प्रत्यारोपण को राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश आधुनिक इलाज के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अंग प्रत्यारोपण बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।

हृदय प्रत्यारोपण जटिल और जीवनरक्षक भी…

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि हृदय प्रत्यारोपण एक जटिल लेकिन जीवनरक्षक सर्जरी है। जिसमें गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे मरीज को किसी डोनर का स्वस्थ दिल प्रत्यारोपित किया जाता है। यह प्रक्रिया तब की जाती है जब दवाओं या अन्य उपचारों से लाभ नहीं मिलता।

पीजीआई में भर्ती महिला मरीज का भी दिल काफी हद तक जवाब दे चुका था। लिहाजा डॉक्टरों ने मरीज में ह्दय प्रत्यारोपण का फैसला किया। उन्होंने जैसे ही दिल्ली में डोनर का पता चला।

उसी दौरान जरूरी जांचें शुरू करा दी गई। प्रत्यारोपण से पहले डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप, टिश्यू मैचिंग और अन्य चिकित्सीय जांच कराई गईं। सर्जरी के दौरान मरीज के बीमार दिल को हटाकर डोनर का दिल लगाया गया।

उसे प्रमुख रक्त वाहिकाओं से जोड़ा गया। घंटों तक चली सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है। फिलहाल अस्पताल में भर्ती है।

प्रत्यारोपण टीम में सीवीटीएस विभाग के डॉ. एसके अग्रवाल, डॉ. शांतनु पांडे, डॉ. मिलिंद होते, डॉ विजय अग्रवाल, डॉ मुंशी, डॉ सिद्धार्थ, डॉ अरीब, डॉ अवनींद्र, डॉ सौरभ,

डॉ विवेक, डॉ हर्ष, कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. रूपाली खन्ना, डॉ. सत्येन्द्र तिवारी, डॉ अंकित साहू, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. पुनीत गोयल, डॉ अमित, डॉ पल्लव सिंह, डॉ नितिन त्रिवेदी, डॉ आनंदिता कश्यप,

डॉ मलिका धवल, डॉ श्रद्धा गंगेले, प्रोफेसर संजय धीरज, प्रोफेसर देवेंद्र गुप्ता आदि डॉक्टरों ने सहयोग किया।

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