जीआईएमएस में राष्ट्रीय मेडिकल डिवाइस रेगुलेशन कार्यशाला
YEIDA ने प्रस्तुत किया मेडिकल डिवाइस पार्क का विजन

ग्रेटर नोएडा। लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राष्ट्रीय मेडिकल डिवाइस रेगुलेशन कार्यशाला में देश भर प्रतिनिधि शामिल हुए। मंगलवार को
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) एवं भारत सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के संयुक्त तत्वावधान में गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में राष्ट्रीय मेडिकल डिवाइस रेगुलेशन कार्यशाला आयोजित की गयी ।
GIMS द्वारा आयोजित एवं सहयोगित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देशभर से नियामक संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, मेडिकल डिवाइस निर्माता, चिकित्सक, शोधकर्ता, निवेशक तथा हेल्थकेयर स्टार्टअप्स ने भाग लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य भारत के मेडिकल डिवाइस इकोसिस्टम को नियामकीय अनुपालन, गुणवत्ता, अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने संस्थान में अत्याधुनिक क्लिनिकल ट्रायल फैसिलिटी का उद्घाटन किया।
अपने संबोधन में उन्होंने संस्थान द्वारा चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
उन्होंने हॉस्पिटल डेमो डे के दौरान कई स्टार्टअप्स के नवाचारों का अवलोकन किया, संस्थापकों से संवाद किया और कहा कि चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ऐसे समाधान ही भारत को वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएंगे।
इस अवसर पर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेन्द्र कुमार भाटिया, आईएएस ने आगामी मेडिकल डिवाइस पार्क की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
उन्होंने जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, यमुना एक्सप्रेसवे एवं अन्य आधुनिक कनेक्टिविटी सुविधाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार की दूरदर्शी नीति के तहत यह मेडिकल डिवाइस पार्क देश को चिकित्सा उपकरण निर्माण, अनुसंधान, निर्यात एवं निवेश का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में आशीम साही (CDSCO), राजीव चिब्बर, डॉ. रवि राठौर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर मेडिकल डिवाइसेज (EPCMD) के प्रबंध निदेशक प्रवीण मित्तल, CII, CDSCO, EPCMD, YEIDA, चिकित्सा संस्थानों, उद्योग जगत एवं विभिन्न हेल्थकेयर संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश कुमार गुप्ता, निदेशक ने कहा कि आज चिकित्सा शिक्षा, उत्कृष्ट मरीज सेवा, अनुसंधान एवं नवाचार का एक सशक्त केंद्र बन चुका है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल आधारित मेडिकल इन्क्यूबेशन सेंटर सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) वर्तमान में 50 से अधिक हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को क्लिनिकल वैलिडेशन, विशेषज्ञ मार्गदर्शन,
अनुसंधान सुविधाएं तथा उद्योग से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि GIMS का उद्देश्य ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है जहाँ अनुसंधान, नियामकीय सहयोग, उद्योग और चिकित्सकीय विशेषज्ञता मिलकर विश्वस्तरीय स्वास्थ्य तकनीकों के विकास को गति दें।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण हॉस्पिटल डेमो डे रहा, जिसमें GIMS इन्क्यूबेशन सेंटर के 15 चयनित स्टार्टअप्स ने अपने नवाचारों एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों का प्रदर्शन किया।
इस मंच ने नियामकों, चिकित्सकों, उद्योग जगत, निवेशकों एवं स्टार्टअप्स के बीच संवाद, क्लिनिकल वैलिडेशन, व्यावसायीकरण एवं निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा दिया।
GIMS की नवस्थापित क्लिनिकल ट्रायल फैसिलिटी के शुभारंभ के साथ संस्थान की अनुसंधान क्षमता को और मजबूती मिली है। संस्थान में पहले से ही ICMR इंटेंट
सेंटर , Genome Sequencing Facility, Viral Research and Diagnostic Laboratory (VRDL), BSL-2 एवं BSL-3 प्रयोगशालाएँ, नेगेटिव प्रेशर लैब तथा अनेक राष्ट्रीय स्तर की अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित हैं, जो इसे चिकित्सा अनुसंधान एवं स्वास्थ्य नवाचार का अग्रणी संस्थान बनाती हैं।



