कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में डॉक्टरों की कमी से कैंसर मरीजों पर मंडराया संकट
121पदों में सिर्फ 41 डॉक्टरों की तैनाती, बिना डॉक्टर के चल रहे 11 विभाग

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी स्थित कल्याण सिंह सुपरस्पेशलिटी कैंसर संस्थान में डॉक्टरों की कमी के चलते कैंसर मरीजों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं।
जिसमें लगभग 11 विभाग बिना डॉक्टर के संचालित हो रहें हैं। ऐसे में दूर दराज से आने वाले कैंसर मरीजों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं।
जहाँ प्रदेश सरकार मरीजों को हर संभव इलाज देने के लिए सुविधाओं में सुधार कर रही है और चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टर बगैर मरीजों का इलाज कैसे संभव हो पायेगा। वहीं कैंसर संस्थान में लगभग 300 बेड की क्षमता है। जहाँ अक्सर सभी बेड मरीजों से भरे रहते हैं।
जिसमें प्रतिदिन लगभग 400 से लगाकर 500 मरीजों की ओपीडी होती है। ऐसे ही डॉक्टर नर्सिंग कर्मियों का पलायन होता रहा तो इलाज के लिए आने वाले कैंसर मरीजों को निराशा के अलावा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।
बल्कि अन्य चिकित्सा संस्थानों में मरीजों का भारी भरकम बोझ बना रहता है और जबकि इलाज के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। खासकर उन मरीजों को इंतजार करना किसी भारी दिक्कत से कम नहीं है, जो कैंसर बीमारी की असहनीय पीड़ा से गुजर रहें हैं। वहीं मिली जानकारी के अनुसार
PGI में चयन होने के बाद न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टर ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि संस्थान से अब तक 28 से अधिक डॉक्टरों के इस्तीफे दे चुके हैं। संस्थान में
ब्रेन ट्यूमर और न्यूरो कैंसर मरीजों मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं दबी जुबान डॉक्टरों ने वेतन-भत्तों में असमानता की नाराजगी जाहिर करते हुए संस्थान की मुख्य वजह बताया है। वहीं अन्य संस्थानों में
केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान के मुकाबले कम सुविधाओं का आरोप लगाया जा रहा है। जबकि प्रदेश सरकार द्वारा संस्थान में
करोड़ों की लागत से मशीनो की खरीद फरोख्त कर स्थापित किया गया और डॉक्टरों की कमी के चलते मशीने धूल फाकने की स्थिति बन गयी है। जबकि
121 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 41 डॉक्टर तैनात किये गए है बाकी स्टाफ की भारी कमी से कैंसर मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में संस्थान प्रशासन को मरीज हित देखते हुए त्वरित व्यवस्थाओ को पटरी पर लाना होगा,तभी कैंसर मरीजों का इलाज संभव हो पायेगा।
वहीं जब संस्थान निदेशक डॉ मदन लाल ब्रह्म भट्ट से डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों के पालयन के बारे में जानकारी लेने के लिए कॉल की गयी तो किसी कारणवश कॉल रिसीव नहीं हुई। इससे साबित होता है कि संस्थान प्रशासन अपनी जवाबदेही से किनारा काट रहा है।



