सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकार हुए सम्मानित
तबला वादन की प्रस्तुति पर झूमें श्रोता

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी तबला वादन की मनमोहक प्रस्तुति पर श्रोता झूम उठे। रविवार को
बड़ा मंगल उत्सव के उपलक्ष्य में रामकृष्ण मठ निराला नगर द्वारा उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसे कार्यक्रम को यूट्यूब चैनेल ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के माध्यम से सीधा प्रसारित भी किया गया।
संध्या आरती के उपरान्त रात्रि 8 बजे से एक सास्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन मठ सभागार में किया। जिसमें टेक्सास (अमेरिका) के सुप्रसिद्ध तबला वादक डॉ. आशुतोष वर्मा द्वारा तबला एकल वादन की मनोहारी प्रस्तुति दी गई।
उस दौरान उनके साथ लखनऊ के युवा एवं प्रतिभाशाली सारंगी वादक ज़ीशान अब्बास सारंगी पर लहरा दिया। जिससे मंदिर सभागार में बैठे समस्त भक्तएवं श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गये।
जानें कलाकारों का परिचय..
डॉ. आशुतोष वर्मा भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के एक प्रतिभाशाली एवं उदीयमान तबला वादक हैं।
उन्होंने मात्र तीन वर्ष की आयु में अपने पिता दीनदयाल के मार्गदर्शन में संगीत साधना प्रारम्भ की तथा विश्वविख्यात अजराड़ा घराने के तबला सम्राट स्वर्गीय उस्ताद हाशमत अली ख़ाँ साहब एवं बाद में उस्ताद अकरम ख़ाँ साहब से परम्परागत तालीम प्राप्त की।
लय पर असाधारण अधिकार एवं भावपूर्ण प्रस्तुति के कारण उन्होंने लखनऊ महोत्सव, झाँसी महोत्सव तथा प्रतिष्ठित स्वामी हरिदास संगीत समारोह सहित अनेक प्रमुख मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
उन्हें स्वामी हरिदास कला रत्न सम्मान, पंडित निखिल बनर्जी पुरस्कार तथा पंडित छोटेलाल मिश्र पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
डॉ. वर्मा ने पंडित पूर्वायन चटर्जी, पंडित पार्थाे बोस, पंडित हरीश तिवारी, देवस्मिता भट्टाचार्य एवं विदुषी माला गांगुली सहित अनेक ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ मंच साझा किया है।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से संगीत विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है तथा वर्तमान में अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सास में एथ्नोम्यूज़िकोलॉजी विषय में स्नातकोत्तर अध्ययनरत हैं।
ज़ीशान अब्बास भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परम्परा के प्रतिष्ठित सारंगी वादक हैं। वे विख्यात सोनीपत-पानीपत घराने से हैं। जिसकी लगभग 400 वर्षों पुरानी संगीत परम्परा भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन में निरन्तर योगदान देती रही है। वे इस गौरवशाली सारंगी परम्परा की 17वीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने सारंगी की विधिवत शिक्षा अपने दादा एवं आकाशवाणी, दिल्ली के ए-ग्रेड कलाकार उस्ताद वज़ीर हुसैन से प्राप्त की। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने सारंगी वादन की बारीकियों एवं परम्परागत शैली में दक्षता प्राप्त की।
ज़ीशान अब्बास ने सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायकों उस्ताद अहमद हुसैन-उस्ताद मोहम्मद हुसैन तथा प्रख्यात कथकाचार्य पंडित राजेन्द्र गंगानी सहित अनेक ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ मंच साझा किया है। उनकी प्रस्तुतियाँ देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संगीत समारोहों एवं सांस्कृतिक आयोजनों में सराही गई हैं।
वर्तमान में वे एक स्वतंत्र फ्रिलांस) सारंगी वादक के रूप में सक्रिय हैं तथा अपनी प्रस्तुतियों एवं सहयोगात्मक संगीत कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
अन्त में सभी कलाकारों को मठ अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा स्मृति चिन्ह, कैलेन्डर, पुस्तकें और रामकृष्ण, माँ सारदा देवी और स्वामी विवेकानन्द की तस्वीरें भेट की गयी।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम कें अन्त में भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।



