सामाजिक दूरी भी डिप्रेशन का प्रमुख कारण – डॉ मनोज कुमार अस्थाना
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर डॉक्टरों ने रखें विचार

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। आज देश में अधिकतर समाज और परिवार मोबाइल स्क्रीन पर अधिक समय व्यतीत कर रहें हैं। बच्चे भी मोबाइल के एडिक्ट हो रहें हैं।
जिससे डिप्रेशन बीमारी के शिकार हो रहें हैं। इसके लिए जागरूकता ही बचाव है। अपने आसपास भी लोगों को जागरूक करें और मोबाइल एडिक्शन होने से बचाये।
यह जानकारी शनिवार को आईएमए भवन में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित प्रेसवार्ता में मनो चिकित्सक डॉ मनोज कुमार अस्थाना एवं डॉ श्वेता श्रीवास्तव आईएमए सचिव लखनऊ एवं डॉ दर्शन बजाज ने संयुक्त रूप दी।
डॉ मनोज अस्थाना ने कहा जितना हम समाज से दूर होंगे उतना हम डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। यह रिसर्च में भी मिला है। लगातार असंतुष्टि बढ़ती है तो डिप्रेशन हो सकता है।
यहां तक कि नींद बहुत जरुरी है। इसलिए मोबाइल और नशा यह सब डिप्रेशन में प्रमुख कारण होते हैं। मानसिक बदलाव होने पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। ल
डॉ दर्शन बजाज ने कहाँ मैं चेस्ट का विशेषज्ञ हूँ जैसे दमा के मरीज हैं उन्हें भी मानसिक स्वास्थ्य दिक्कत हो जाती हैं। इसलिए डॉक्टर के सलाह अनुसार परामर्श लेते रहें जैसे म्यूजिक मैडिटेशन जरूर करें।
मन चंगा है तो सब चंगा है। प्रतिपार्धा भी मानसिक रोगी बना सकता है, इसलिए प्रतिस्पर्धा से दूर रहें । मानसिक दिक्कत हो तो मनो चिकित्सक को जरूर दिखाए।
विशेषज्ञों ने समय पर पहचान, उपचार और पारिवारिक सहयोग के साथ दवाओं की कीमत एवं गुणवत्ता में पारदर्शिता पर जोर दिया। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. शाश्वत सक्सेना ने बताया कि डिप्रेशन और नशे की समस्याओं का उपचार संभव है।
लगातार उदासी, निराशा, नींद में बदलाव और सामाजिक दूरी को अनदेखा न करें। मोबाइल का समस्याग्रस्त उपयोग भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। आत्महत्या के विचारों पर संवेदनशील संवाद और विशेषज्ञ सहायता महत्वपूर्ण हैं।
दवाएँ चिकित्सकीय निगरानी में ही बंद की जाएँ। मानद सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए सहायता लेने से जुड़ा संकोच दूर करना आवश्यक है। खुशमिजाज दिखने वाला व्यक्ति भी डिप्रेशन से जूझ सकता है।
उन्होंने युवाओं को नशे से बचाने और महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार अस्थाना ने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की समग्र देखभाल पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि डिप्रेशन का उचित उपचार डायबिटीज और रक्तचाप के बेहतर प्रबंधन में सहायक हो सकता है।
डॉ श्वेता श्रीवास्तव ने एफएसडीए की छापमारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि मेरी सरकार से मांग है कि “एक दवा, एक मूल्य” और कुल व्यापारिक मार्जिन की अधिकतम सीमा 30 प्रतिशत रखी जाय।
दवा सस्ती मिलने के पीछे प्रतिस्पर्धा, खरीद की मात्रा, छूट, अलग बैच या शेष उपयोग अवधि जैसे कारण हो सकते हैं। केवल कम कीमत से दवा को नकली और अधिक कीमत से गुणवत्तापूर्ण नहीं माना जा सकता।
नकली, अधोमानक, एक्सपायर्ड या अनुचित परिस्थितियों में रखी दवाओं की पहचान के लिए औषधि प्रशासन नियमित नमूना परीक्षण, बैच सत्यापन और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करे।
आईएमए ने मेडिकल स्टोरों पर आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के बिना निदान, उपचार तय करने और जहाँ आवश्यक हो वहाँ वैध पर्चे के बिना दवा देने पर रोक की माँग की। पंजीकृत फार्मासिस्ट की वैधानिक भूमिका का सम्मान करते हुए अनधिकृत चिकित्सा रोकी जाए, ताकि मरीजों को सुरक्षित उपचार मिले।



