डॉक्टरों ने भारत में शिशुओं पर की पहली रोबोटिक लिवर रिसेक्शन सर्जरी
पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में मिली बड़ी कामयाबी

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। चिकित्सा उपचार के क्षेत्र में नित नई उपलब्धि हासिल करते हुए एक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड संस्थान ने हासिल किया। गुरुवार को
संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशलिटीज़ विभाग ने हेपेटोब्लास्टोमा से पीड़ित 6 केजी से कम वज़न वाले दो शिशुओं में रोबोटिक लिवर रिसेक्शन
(लिवर का कुछ हिस्सा हटाने की सर्जरी) सफलतापूर्वक करके पीडियाट्रिक मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक सर्जरी में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
डॉक्टरों के अनुसार, भारत में शिशुओं पर की गई ये पहली रोबोटिक लिवर रिसेक्शन सर्जरी हैं और देश भर में बच्चों पर की गई शुरुआती कुछ रोबोटिक लिवर रिसेक्शन सर्जरी में से एक हैं।
यह उपलब्धि बहुत कम उम्र और कम वज़न वाले बच्चों की जटिल हेपेटोबिलियरी सर्जरी में रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
शिशुओं में दो जटिल रोबोटिक लिवर रिसेक्शन पहला मरीज़ लगभग 5 केजी वज़न वाला 7 महीने का लड़का था। जिसे लिवर के बाएं हिस्से (लेफ्ट लोब) में हेपेटोब्लास्टोमा होने का पता चला था।
प्री-ऑपरेटिव कीमोथेरेपी के बाद बीते दिनों 5 सितंबर को संस्थान में उसकी रोबोटिक लेफ्ट लेटरल सेक्शनेक्टॉमी सफलतापूर्वक की गई।
दूसरा मरीज़ लगभग 6 केजी वज़न वाली 7 महीने की लड़की थी। जिसे लिवर के बाएं हिस्से (लेफ्ट लोब) में हेपेटोब्लास्टोमा होने का पता चला था।
नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी के बाद, बीते 3 अक्टूबर को संस्थान में उसकी रोबोटिक लेफ्ट हेपेटेक्टॉमी की गई।
इस प्रकार, सर्जरी के समय दोनों मरीज़ 6 केजी से कम वज़न वाले शिशु थे। जिससे तकनीकी नज़रिए से ये प्रक्रियाएं विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो गईं थी।
दोनों बच्चों की सर्जरी के बाद रिकवरी संतोषजनक रही और वे अभी ठीक हैं, साथ ही उनकी नियोजित एडजुवेंट कीमोथेरेपी भी जारी है।
बच्चों की रोबोटिक सर्जरी में रचा इतिहास..
बच्चों की सर्जरी में शिशुओं के लिवर का कुछ हिस्सा निकालना (लिवर रिसेक्शन) सबसे मुश्किल प्रक्रियाओं में से एक है।
पेट में काम करने के लिए बहुत कम जगह, शरीर की नाजुक बनावट, बहुत पतली रक्त वाहिकाएं और पित्त नलिकाएं, और लिवर की कार्यक्षमता को बनाए रखते हुए खून बहने पर सटीक नियंत्रण की जरूरत जैसी चुनौतियां इसे और भी मुश्किल बना देती हैं।
6 किलोग्राम से कम वजन वाले शिशुओं में रोबोट की मदद से लिवर का कुछ हिस्सा निकालने की ये जटिल प्रक्रियाएं बहुत छोटे और कम वजन वाले बच्चों में रोबोटिक सर्जरी की बढ़ती संभावनाओं को दिखाती हैं।
यह उपलब्धि संस्थान में एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक पीडियाट्रिक सर्जरी के लगातार विकास को भी दर्शाती है।
जहां बच्चों में जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, हेपेटोबिलियरी, यूरोलॉजिकल और थोरेसिक प्रक्रियाओं के लिए रोबोटिक सर्जरी का तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है।
संस्थान के लिए एडवांस्ड पीडियाट्रिक मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक सर्जरी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा हैं, जो यह दिखाते हैं कि बहुत कम वजन वाले शिशुओं में भी जटिल रोबोटिक प्रक्रियाएं सुरक्षित रूप से की जा सकती हैं।
इन बच्चों का सफल इलाज संस्थान में पीडियाट्रिक सर्जिकल, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस और मल्टीडिसिप्लिनरी सपोर्ट टीमों के बीच करीबी सहयोग से संभव हो पाया।
भारत में पीडियाट्रिक सर्जरी की सफलता के खुले द्वार..
इन दो शिशुओं में सफल रोबोटिक लिवर रिसेक्शन न केवल संस्थान के लिए एक उपलब्धि है, बल्कि भारत में पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी की प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी है।
एडवांस्ड रोबोटिक तकनीक की बढ़ती उपलब्धता और विशेष विशेषज्ञता के विकास के साथ, रोबोटिक सर्जरी पारंपरिक प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर छोटे और कम उम्र के बच्चों में अधिक जटिल ऑपरेशन की तरफ संस्थान ने कदम बढ़ा दिया है।



