पढ़ाई-लिखाई के साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी जरूरी – पुण्डरीक गोस्वामी
श्रीमदभागवत कथा में बैंडबाजा के साथ श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का विवाह उत्सव

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। पढ़ाई लिखाई के साथ आध्यात्मिक ज्ञान हासिल करने का बोध कराया गया।
शुक्रवार को डीएवी कॉलेज ऐशबाग में श्री राधा रमण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत राधा रमण कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह बैंड बाजा आतिसबाजी के साथ मनाया गया।
पुंडरीक गोस्वामी महाराज के श्रीमुख से कथा श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विवाह उत्सव के दौरान भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने पूरे पंडाल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार प्रातः 9 बजे से महाराज जी ने श्रद्धालुओं को दीक्षा प्रदान की। इसके पश्चात युवाओं के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें युवाओं ने अपने मन की जिज्ञासाएं और प्रश्न महाराज के समक्ष रखी ।
महाराज ने सरल एवं प्रेरणादायी शब्दों में उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।
महाराज ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जबकि अनेक युवाओं के मन में अध्यात्म को लेकर जिज्ञासाएं हैं।
जिस प्रकार जीवन में पढ़ाई-लिखाई आवश्यक है, उसी प्रकार आध्यात्मिक ज्ञान भी जरूरी है। प्रत्येक युवा को अपने चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अच्छे चरित्र के बिना व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
उन्होंने युवाओं को प्रतिदिन भगवान का भजन करने, गोसेवा को जीवन का हिस्सा बनाने और वर्ष में कम से कम एक बार किसी पवित्र धाम की यात्रा करने की प्रेरणा दी।
एक विद्यार्थी के प्रश्न पर कि विद्यार्थी जीवन में सबसे अधिक खुशी की बात क्या होती है, महाराज ने बताया कि जब विद्यार्थी को श्रेष्ठ गुरु का सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त होता है, तो यह उसके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य होता है।
गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करता है और उसके जीवन को सार्थक बनाता है।
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान पुंडरीक गोस्वामी ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य रासलीला का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब तक जीव के भीतर ‘मैं’ और अभिमान का भाव रहता है, तब तक वह भगवान के प्रेम की गहराई को अनुभव नहीं कर पाता।
गोपियों के मन में जब क्षणभर के लिए भी मान का भाव आया, तब श्रीकृष्ण अंतर्ध्यान हो गए।
महाराज ने समझाया कि भगवान के सच्चे प्रेम की प्राप्ति के लिए अहंकार का त्याग आवश्यक है। जहां समर्पण, विनम्रता और निष्कपट प्रेम होता है। वहीं भगवान की कृपा का अनुभव होता है।
भगवान श्रीकृष्ण के विरह में गोपियों द्वारा गाए गए गोपी गीत की व्याख्या करते हुए महाराज भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि गोपी गीत केवल विरह के भावों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवात्मा की परमात्मा से पुनर्मिलन की अलौकिक व्याकुलता का प्रतीक है।
गोपियों का प्रेम सांसारिक आकर्षण से परे पूर्ण समर्पण और अनन्य भक्ति का आदर्श प्रस्तुत करता है।
उद्धव के ब्रज आगमन और गोपियों के साथ उनके संवाद का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि उद्धव ज्ञान के प्रतीक थे. लेकिन ब्रज की गोपियों का निश्छल और अनन्य प्रेम देखकर उनके ज्ञान का अभिमान चूर हो गया।
उन्होंने समझाया कि भगवान को केवल बौद्धिक ज्ञान से नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम, निष्कपट भाव और अनन्य भक्ति से प्राप्त किया जा सकता है।
कथा के प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह उत्सव रहा। महाराज ने इस प्रसंग का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए बताया कि रुक्मिणी शुद्ध बुद्धि का प्रतीक हैं और भगवान श्रीकृष्ण परमात्मा के स्वरूप हैं।
जब मनुष्य की बुद्धि शुद्ध होकर परमात्मा की ओर उन्मुख होती है, तब भगवान स्वयं उसकी सहायता और उद्धार के लिए आगे आते हैं।
व्यासपीठ से रुक्मिणी विवाह प्रसंग का सजीव वर्णन हुआ। विवाह उत्सव के दौरान प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। समूचा कथा पंडाल श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
दिव्यांग भक्त कन्या को कराया महाराज का दर्शन..
आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि कथा के दौरान सेवा और समर्पण का एक भावुक दृश्य देखने को मिला। एक दिव्यांग भक्त कन्या को वॉलंटियर्स ने व्हीलचेयर सहित अपने कंधों पर उठाकर महाराज के दर्शन एवं उनसे मिलने की व्यवस्था कराई।
उन्होंने कहा कि जरूरतमंद श्रद्धालु को सम्मानपूर्वक दर्शन कराना ही सच्ची सेवा और भक्ति का स्वरूप है। श्री राधा रमण सेवा समिति का प्रयास है कि कथा में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुविधाजनक एवं सहज वातावरण प्राप्त है।
आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि शनिवार, 10 अक्टूबर को कथा प्रारंभ होने से पूर्व प्रातः 9 बजे से पितरों की स्मृति एवं उनके निमित्त सामूहिक तर्पण की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता करने का आग्रह किया।
कथा के छठे दिन पुंडरीक गोस्वामी महाराज के दिव्य प्रवचनों, भजनों और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव का श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
प्रमुख आयोजक अमरनाथ मिश्र, राजेंद्र कुमार अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, मुन्ना भैया, समीर मित्तल, शिवम अग्रवाल, नवीन गुप्ता, रोहित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अनुराग मिश्रा,
आनंद रस्तोगी, आरएन सिंह, सुनील कुमार मिश्रा, कुश मिश्रा, दिव्यांशु शुक्ला एवं हनी सहित अन्य सहयोगी शामिल रहे।



