केजीएमयू कर्मचारी परिषद ने लोकायुक्त को लिखा पत्र, जाँच की उठाई मांग
संस्थान की मिट्टी घोटाले के लगाए गंभीर आरोप

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। केजीएमयू कर्मचारी परिषद ने संस्थान से मिट्टी घोटाले के गंभीर आरोप लगाते हुए लोकायुक्त को पत्र जारी किया है।
बुधवार को केजी मेडिकल कॉलेज एंड जीएम एंड एसोसिएटेड कर्मचारी परिषद ने संस्थान की पूर्व कुलसचिव पर विश्वविद्यालय के सिविल विभाग एवं कार्यदायी संस्थाओं से मिलकर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिषद द्वारा जारी पत्र में कहा कि शासनादेश का उल्लंघन संस्थान में किसी भी परियोजना के लिए कार्यदायी
संस्था शासन स्तर से नामित होती है। परियोजना के शासनादेश में स्पष्ट उल्लेख है कि कुलसचिव यह सुनिश्चित करेंगी कि योजना की सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति के पश्चात ही कार्य कराया जाए।
कार्य की गुणवत्ताए मानक एवं विशिष्टियों की जिम्मेदारी कुलसचिव कार्यदायी संस्था की होगी। खुदाई से प्राप्त पुरानी सामग्री (मिट्टी सहित) का हासित मूल्य निर्धारित कर प्राप्त धनराशि को राजकोष में जमा कराने का उत्तरदायित्व कुलसचिव का होगा।
परिषद का आरोप है कि पूर्व कुलसचिव अर्चना गहरवार ने उक्त शासनादेश का पालन नहीं किया और राजकोष को सीधी क्षति पहुँचाई। मिलीभगत का खेल और दोहरा मापदंड पूर्व कुलसचिव द्वारा यह कह देना
कि “हैंडओवर के पश्चात समस्त जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था की होती है” यह अपने दायित्व से बचने का प्रयास है।
कुलसचिव और सिविल विभाग को पता था कि बेसमेंट से निकली मिट्टी को बाहर बेचने का कोई नियम नहीं है, फिर भी मिट्टी बेची गई और आरोप पीडब्लूडी व ठेकेदार पर डाल दिया गया।
बिना कुलसचिव की सहमति के संस्थान से एक भी डंपर बाहर नहीं जा सकता। यह करोड़ों का खेल था, इसलिए जानबूझकर आँखें बंद कर ली गईं। कर्मचारी परिषद ने कहा कि जहाँ मिट्टी कम निकली वहाँ नियम बताया गया कि” यह संस्थान की संपत्ति है, राजकोष में जमा कराओ” और जहाँ हजारों डंपर निकली वहाँ चुपचाप बाहर बेच दी गई।
जिसमें आरोप लगाते हुए कहा कि खदरा परिसर में न्यू बॉयज हॉस्टल के बेसमेंट की मिट्टी को पुराने दंत संकाय भवन के पीछे डंप कराने का लिखित आदेश स्वयं पूर्व कुलसचिव अर्चना गहरवार एवं अधिशासी अभियंता ने दिया था।
बिंदुवार आरोप लगाते हुए कहा कि घोटाले का आकार-4587 डंपर गायब पूर्व कुलसचिव ने मिट्टी निस्तारण के लिए कभी कोई कमेटी नहीं बनाई। जब प्रकरण कुलपति के संज्ञान में आया तब उन्होंने रोकने के लिए कमेटी बनाई, लेकिन तब तक करोड़ों की मिट्टी बिक चुकी थी।
साथ ही यह भी आरोप लगाया कि केवल 500 बेड ट्रॉमा सेंटर में लगभग 5000 डंपर मिट्टी निकली। जिसमें से मात्र 413 डंपर दंत संकाय के पीछे डाली गई। शेष 4587 डंपर मिट्टी कहाँ गई? किसे बेची गई, और कितने में बेची गई।
आज तक एक भी रुपया राजकोष में जमा नहीं हुआ। यह तो सिर्फ एक प्रोजेक्ट का आंकड़ा है, सभी ईपीसी प्रोजेक्टों की जांच होने पर घोटाला कई करोड़ का निकलेगा।
कर्मचारी परिषद ने पूर्व कुलसचिव अधिशासी अभियंता, सिविल विभाग एवं संबंधित कार्यदायी संस्था की मिलीभगत की लोकायुक्त स्तर से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।



