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उत्तर प्रदेश में अब तक 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित – योगी आदित्यनाथ 

मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री के साथ क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का किया शुभारंभ 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। अब प्रदेशवासियो को मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी। सोमवार को

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रीजनल मेटेरोलॉजिकल सेंटर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक, त्वरित और विश्वसनीय बनाने के लिए आधुनिक डॉप्लर रडार सहित अत्याधुनिक तकनीक का विस्तार किया जा रहा है।

इससे किसानों, आपदा प्रबंधन तंत्र और आम नागरिकों को समयबद्ध मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे जनसुरक्षा और जनसुविधा को और मजबूती मिलेगी।

उत्तर प्रदेश में अब तक 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन तथा ब्लॉक स्तर पर 2,000 ऑटोमेटिक रेन गेज स्थापित किए जा चुके हैं।

आजमगढ़, वाराणसी, अलीगढ़, झांसी और लखनऊ जैसे जनपदों में X-Band Doppler Weather Radar विभिन्न चरणों में स्थापित किए जा रहे हैं। ये रडार आंधी, तूफान, भारी वर्षा और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं की निगरानी में हमारी मदद करेंगे।

इस अवसर पर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। जिससे देश भर में अधिक सटीक, स्थान-विशिष्ट और प्रभाव-आधारित मौसम पूर्वानुमान सेवाएं संभव हो पाई हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दशक में मौसम पूर्वानुमान और अवलोकन प्रणालियों में प्राप्त की गई प्रगति ने नागरिकों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, किसानों, पर्यटकों और विमानन क्षेत्र को मौसम सेवाएं प्रदान करने के तरीके को बदल दिया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत में केवल 17 डॉप्लर मौसम रडार थे। जबकि जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में एक भी रडार नहीं था।

उन्होंने जानकारी दी कि अब यह नेटवर्क बढ़कर 50 डॉप्लर मौसम रडार तक पहुंच गया है और मिशन मौसम के अंतर्गत 50 और रडार प्रस्तावित हैं। जिससे अगले दो वर्षों में कुल संख्या लगभग 100 हो जाएगी। इस विस्तार से पूरे देश में वास्तविक समय में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मौसम पूर्वानुमान सेवाओं में हुई प्रगति पर कहा कि मौसम पूर्वानुमान व्यापक क्षेत्रीय पूर्वानुमानों से विकसित होकर अब अत्यधिक स्थानीय और समय-विशिष्ट पूर्वानुमानों तक पहुंच गया है।

अब नागरिक अगले कुछ घंटों की मौसम स्थितियों सहित सटीक अल्पकालिक पूर्वानुमान प्राप्त कर सकते हैं। जिससे बेहतर योजना बनाने और तैयारी करने में मदद मिलेगी। मौसम पूर्वानुमानों पर जनता का बढ़ता विश्वास अवलोकन नेटवर्क, पूर्वानुमान मॉडल और प्रसार प्रणालियों में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों का परिणाम है।

उत्तर प्रदेश का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य की भौगोलिक विविधता और जलवायु परिवर्तनशीलता इसे उन्नत मौसम विज्ञान सेवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बनाती है।

उत्तर प्रदेश बाढ़, सूखा, लू, आंधी-तूफान और अन्य चरम मौसम घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, इसलिए जन सुरक्षा और आपदा तैयारियों के लिए समय पर पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर कहा कि जहां वर्ष 2014 में राज्य में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था, अब इनकी संख्या बढ़कर तीन हो गई हैं और कई अन्य चालू किए जा रहे हैं।

राज्य में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या 59 से बढ़कर 107 हो गई है, स्वचालित वर्षामापी स्टेशनों की संख्या 132 से बढ़कर 140 हो गई है और बिजली गिरने के सेंसरों की संख्या 0 से बढ़कर 7 हो गई है। राज्य में विमानन बुनियादी ढांचे के बढ़ते विस्तार को दर्शाते हुए, अब उत्तर प्रदेश के ग्यारह हवाई अड्डों पर विमानन मौसम विज्ञान सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तराखंड में मौसम विज्ञान सेवाओं के महत्वपूर्ण विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाढ़, बादल फटने, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी आपदाओं के प्रति संवेदनशील होने के बावजूद, राज्य में पहले कोई डॉप्लर मौसम रडार नहीं था।

आज, ऐसे तीन रडार स्थापित किए जा चुके हैं और ‘मिशन मौसम’ के तहत अतिरिक्त प्रणालियों की योजना बनाई जा रही है। स्वचालित मौसम स्टेशनों, हवाईअड्डे मौसम वेधशालाओं और बिजली गिरने का पता लगाने वाली प्रणालियों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है।जिससे हिमालयी क्षेत्र में मौसम की निगरानी क्षमता मजबूत हुई है।

लखनऊ में नव घोषित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के महत्व पर डॉ. सिंह ने कहा कि यह केंद्र मौसम विज्ञान सेवाओं के विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय पूर्वानुमान क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह केंद्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा, जिससे मौसम संबंधी जानकारी की अधिक केंद्रित निगरानी, ​​पूर्वानुमान और प्रसार संभव हो सकेगा। राज्य सरकार के सहयोग से उन्नत डॉप्लर मौसम रडार और पवन प्रोफाइलर प्रणालियों सहित समर्पित बुनियादी ढांचे के विकास की योजनाएं चल रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बेहतर पूर्वानुमान प्रणालियां अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने, आंधी-तूफान, बिजली गिरने, हिमस्खलन और अन्य चरम मौसम संबंधी घटनाओं की अग्रिम चेतावनी प्रदान करके आपदा जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्वानुमान की सटीकता में काफी सुधार हुआ है, लेकिन मौसम सेवाओं की प्रभावशीलता अंततः स्थानीय प्रशासन द्वारा समय पर की गई कार्रवाई और मौसम विज्ञान एजेंसियों द्वारा जारी सलाह और चेतावनियों का जनता द्वारा पालन करने पर निर्भर करती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नागरिकों, स्थानीय अधिकारियों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से मौसम पूर्वानुमानों का पूरा उपयोग करने और विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से उपलब्ध प्रारंभिक चेतावनियों को गंभीरता से लेने का आग्रह किया।

मौसम संबंधी जानकारी अब जिलों, स्थानीय प्रशासनों और पंचायतों तक वास्तविक समय में पहुंच रही है और इसे योजना और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल किया जाना चाहिए।

लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की घोषणा भारत की मौसम एवं जलवायु सेवाओं की संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उम्मीद है कि यह केंद्र पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाएगा, मौसम संबंधी सलाहों के प्रसार में सुधार करेगा और पूरे क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, कृषि, विमानन और सार्वजनिक सुरक्षा को सहयोग प्रदान करेगा। हाल ही में देखा होगा मोबाइल पर अलर्ट मिला लोगों को सावधानी बरतने में मददगार साबित होगी।

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