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डॉक्टरों ने विश्व ऑक्यूपेशनल थेरेपी दिवस पर दिए सुझाव 

पुनर्वास का उद्देश्य केवल जीवन की अवधि बढ़ाना नहीं

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टरों ने विश्व ऑक्यूपेशनल थेरेपी दिवस पर जानकारी साझा की। मंगलवार को

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग द्वारा विश्व ऑक्यूपेशनल थेरेपी दिवस मनाया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य ऑक्यूपेशनल थेरेपी की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा दिव्यांगजनों एवं अस्थायी या स्थायी दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों की स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक प्रो सीएम सिंह थे, जो अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो विक्रम सिंह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पीएमआर विभागाध्यक्ष प्रो वीएस गोगिया, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यशवीर सिंह, डॉ. स्निग्धा मिश्रा (फैकल्टी इंचार्ज, ऑक्यूपेशनल थेरेपी), असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमित रंजन, तथा वरिष्ठ ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट अनंत कुमार सहित अन्य चिकित्सा एवं पुनर्वास विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

संस्थान के निदेशक प्रो सीएम सिंह के प्रस्तावित संदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया।

संदेश में कहा गया कि स्वास्थ्य सेवाओं का लक्ष्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति की कार्यक्षमता, स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना भी है।

व्यापक पुनर्वास सेवाओं में फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग तथा ऑक्यूपेशनल थेरेपी सहित विभिन्न पुनर्वास विशेषज्ञताओं के समन्वित योगदान को महत्वपूर्ण बताया गया।

अकादमिक उत्कृष्टता, नैदानिक सेवाओं, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से ऐसे पुनर्वास मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, जो दिव्यांगजनों एवं कार्यात्मक सीमाओं से प्रभावित व्यक्तियों को अधिक आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम बनाएं। वहीं

कार्यक्रम का शुभारंभ PMR विभागाध्यक्ष प्रो वीएस गोगिया के स्वागत संबोधन से हुआ।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन ऑक्यूपेशनल थेरेपी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इसके योगदान को पहचानने तथा पुनर्वास सेवाओं में विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने व्यापक एवं व्यक्ति-केंद्रित पुनर्वास सेवाओं में ऑक्यूपेशनल थेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका तथा दैनिक जीवन में स्वतंत्रता और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र में अनंत कुमार, वरिष्ठ ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, ने ऑक्यूपेशनल थेरेपी की अवधारणा, इसके प्रमुख कार्यक्षेत्रों तथा सामान्य नैदानिक अनुप्रयोगों का परिचय दिया।

उन्होंने बताया कि ऑक्यूपेशनल थेरेपी विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों से प्रभावित व्यक्तियों को दैनिक जीवन की गतिविधियाँ अधिक स्वतंत्रता और प्रभावशीलता के साथ करने में सक्षम बनाने पर केंद्रित है।

इसके प्रमुख कार्यक्षेत्रों में स्वयं की देखभाल, दैनिक गतिविधियों का प्रशिक्षण, कार्यात्मक क्षमता में सुधार तथा व्यक्ति को पारिवारिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करना शामिल है।

डॉ. स्निग्धा मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपी की फैकल्टी इंचार्ज, ने “एडिंग लाइफ टू इयर्स ” अर्थात् जीवन के वर्षों में सार्थकता जोड़ने की अवधारणा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि पुनर्वास का उद्देश्य केवल जीवन की अवधि बढ़ाना नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक वर्ष को अधिक सार्थक, सक्रिय और गुणवत्तापूर्ण बनाना भी है।

उन्होंने ऑक्यूपेशनल थेरेपी की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि यह व्यक्तियों को उनकी दैनिक गतिविधियों, रुचियों और सामाजिक भूमिकाओं में भागीदारी के लिए सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

डॉ. यशवीर सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, PMR विभाग, ने दैनिक जीवन की गतिविधियों में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पुनर्वास की सफलता का एक महत्वपूर्ण मापदंड यह है कि व्यक्ति अपनी दैनिक गतिविधियाँ यथासंभव स्वतंत्र रूप से कर सके।

स्वयं की देखभाल, कपड़े पहनना, भोजन करना और अन्य आवश्यक कार्यों में आत्मनिर्भरता व्यक्ति के आत्मविश्वास, गरिमा और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने संस्थान में भविष्य में निर्मित होने वाले भवनों में सार्वभौमिक सुगम्यता के मानकों को प्रारंभिक योजना और अभिकल्पना के चरण से ही शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

ताकि दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक तथा सीमित गतिशीलता वाले व्यक्ति संस्थान की सुविधाओं का सुरक्षित, समान और स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकें।

विशिष्ट अतिथि प्रो विक्रम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने अपने संबोधन में आश्वस्त किया कि भविष्य में संस्थान के भवनों में सुगम्यता मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए PMR विशेषज्ञों को संबंधित समितियों में शामिल करने

की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने संस्थान के भौतिक वातावरण को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने के लिए भवनों की योजना एवं निर्माण प्रक्रिया में सुगम्यता को प्राथमिकता देने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने आगे जोर दिया कि PMR के युवा संकाय सदस्यों को शैक्षणिक गतिविधियों, नैदानिक सेवाओं और अनुसंधान के साथ-साथ नवाचार पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

ऐसे नवाचारों के माध्यम से अस्थायी या स्थायी दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों की वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

इसका उद्देश्य मरीजों की कार्यक्षमता, स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना तथा पुनर्वास सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और व्यक्ति-केंद्रित बनाना होना चाहिए।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रभावी पुनर्वास एक बहुआयामी एवं समन्वित प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न चिकित्सीय एवं पुनर्वास विधियों का उचित समन्वय आवश्यक है।

फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR) एक ऐसी विशेषज्ञता है, जो विभिन्न पुनर्वास सेवाओं को एकीकृत करते हुए प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं, कार्यात्मक सीमाओं और पुनर्वास लक्ष्यों के अनुरूप समग्र उपचार योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके अंतर्गत फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, सहायक उपकरणों तथा अन्य आवश्यक पुनर्वास हस्तक्षेपों का उचित चयन, समयबद्ध उपयोग और समन्वय महत्वपूर्ण होता है।

जहाँ फिजियोथेरेपी व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, संतुलन, गतिशीलता तथा खड़े होने और चलने की क्षमता में सुधार लाने में योगदान देती है, वहीं ऑक्यूपेशनल थेरेपी इन

क्षमताओं का दैनिक जीवन में उपयोग करने, अपनी भूमिकाओं को पुनः अपनाने तथा परिवार और समाज में फिर से सक्रिय रूप से जुड़ने में सहायता करती है।

इसे सरल शब्दों में कहा जा सकता है – फिजियोथेरेपी व्यक्ति को खड़े होने और चलने में मदद करती है, जबकि ऑक्यूपेशनल थेरेपी उसे जीवन की दैनिक गतिविधियों और सामाजिक भूमिकाओं से दोबारा जोड़ने में सहायता करती है। PMR इन विभिन्न प्रयासों को व्यक्ति के समग्र पुनर्वास के लक्ष्य से जोड़ता है।

इस प्रकार, ऑक्यूपेशनल थेरेपी PMR विभाग के अंतर्गत व्यापक एवं समग्र पुनर्वास का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण घटक है।

विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच प्रभावी समन्वय, उचित चिकित्सीय निर्णय और व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हैं कि प्रत्येक पुनर्वास हस्तक्षेप का अधिकतम लाभ संबंधित व्यक्ति तक पहुँच सके।

पुनर्वास का अंतिम उद्देश्य केवल शारीरिक क्षमता में सुधार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को अपने परिवार, कार्यस्थल और समाज में यथासंभव स्वतंत्र एवं सार्थक जीवन जीने में सक्षम बनाना है।

कार्यक्रम में ऑक्यूपेशनल थेरेपी के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों, मानकीकृत आकलन तथा पुनर्वास सेवाओं में गुणवत्ता आश्वासन के महत्व पर भी चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने मरीजों की प्रगति के व्यवस्थित मूल्यांकन और गुणवत्तापूर्ण, व्यक्ति-केंद्रित पुनर्वास सेवाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुधि कुलश्रेष्ठ, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन करते हुए विभिन्न सत्रों और वक्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखा।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमित रंजन, असिस्टेंट प्रोफेसर, PMR विभाग, ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विशिष्ट अतिथि, विभागाध्यक्ष, सभी वक्ताओं, संकाय सदस्यों, प्रतिभागियों तथा कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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