कमाने की प्रतिस्पर्धा भी मानसिक स्वास्थ्य को करता प्रभावित करता – डॉ निशांत निर्वाण
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर किया जागरूक

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टरों द्वारा भागदौड़ भरी जिंदगी में बिगड़ते मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य सुधार पर जानकारी दी गयी। शुक्रवार को
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एनबी.सिंह के निर्देशन में एवरेडी इंडस्ट्रीज लिमिटेड में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता बलरामपुर जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीके श्रीवास्तव ने की।
डॉ. श्रीवास्तव ने ओसीडी यानि (ऑब्जसिव कंपलसिव डिसऑर्डर ) सिजोफ्रेनिया, मैनिया, कन्वर्जन डिसऑर्डर तथा आत्महत्या जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने इन मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षणों, उनकी पहचान और उपचार के बारे में बताया। साथ ही, समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत निर्वाण ने बताया कि हर साल 10 अक्टूबर को लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
इस वर्ष की थीम “अनुभवों को मिले आवाज़, असल बदलाव की हो शुरुआत” (लिव्ड एक्सपीरियंसस हार्ड : रियल वॉइसेस , रियल चेंज ) है।
इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ चुके लोगों के अनुभवों को सुनना और उनकी राय को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, नीतियों तथा निर्णयों में शामिल करना है।
डॉ. निर्वाण ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, पैसा कमाने और दूसरों से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा तथा काम का अत्यधिक दबाव न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
इसके कारण तनाव, अवसाद और एंग्जायटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्वयं के, परिवार के किसी सदस्य या आसपास के किसी व्यक्ति के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी शारीरिक बीमारियों की तरह ही हैं. जिनके लिए समय पर सहायता और उपचार जरूरी है।
उन्होंने फैक्ट्री के अधिकारियों और कर्मचारियों को तनाव के दौरान होने वाले लक्षणों, जैसे अत्यधिक घबराहट, बेचैनी, अधिक पसीना आना, हथेलियों में पसीना आना तथा माथे में खिंचाव और भारीपन महसूस होने के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
साथ ही, तनाव के लक्षणों को पहचानने और आवश्यकता पड़ने पर उचित चिकित्सकीय परामर्श लेने के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में फैक्ट्री के 62 अधिकारी एवं कर्मचारी तथा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से डॉ. रजनीगंधा, गरिमा सिंह, रवि द्विवेदी, संतोष पाल और आदेश पांडे उपस्थित रहे।



