उत्तर प्रदेशबड़ी खबरराष्ट्रीय

जिस भी शोध क्षेत्र में कार्य करें, उसे पूर्ण समर्पण के साथ आगे बढ़ाएँ- डॉ अजीत कुमार शासनी 

एनबीआरआई में पादप विकास एवं तनाव अनुक्रियाओं में हार्मोनल क्रॉस-टॉक 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में वैज्ञानिकों ने कई विषयों पर क्रॉस टॉक किया।

गुरुवार को राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “पादप विकास एवं तनाव अनुक्रियाओं के नियमन में हार्मोनल क्रॉस-टॉक” का समापन किया गया ।

देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं सीएसआईआर प्रयोगशालाओं से आए वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने दो दिनों तक पादप हार्मोन सिग्नलिंग, जीनोमिक्स,

जैव प्रौद्योगिकी, तनाव जीवविज्ञान तथा सतत कृषि से जुड़े नवीनतम अनुसंधानों पर गहन वैज्ञानिक विचार-विमर्श किया। यह संगोष्ठी ज्ञान-विनिमय, वैज्ञानिक सहयोग तथा भविष्य की कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि ब्रिक-नेशनल एग्री-फूड एंड बायोमैन्युफैक्चरिंग इंस्टीट्यूट, मोहाली के कार्यकारी निदेशक डॉ. अश्विनी पारिक थे।

वहीं एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने मुख्य अतिथि, देशभर से वैज्ञानिकों, प्रतिभागियों एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया।

उन्होंने अपने स्वागत संबोधन में युवा शोधार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे जिस भी शोध क्षेत्र में कार्य करें, उसे पूर्ण समर्पण, लगन एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाएँ, ताकि उनका अनुसंधान विज्ञान,

संस्थान तथा राष्ट्र की प्रगति में सार्थक योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान ही भविष्य की वैज्ञानिक एवं कृषि संबंधी चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकता है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. अश्विनी पारिक ने “खोजों से आगे,बायोमैन्युफैक्चरिंग के ज़रिए पादप विज्ञान में बदलाव लाने के लिए युवाओं को सशक्त बनाना” विषय पर आधारित अपने व्याख्यान में पादप संसाधनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में खाद्य सुरक्षा एवं

पोषण सुरक्षा आज अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि पादप एवं कृषि वैज्ञानिकों का उद्देश्य ऐसी नवीन प्रौद्योगिकियों का विकास होना चाहिए।

जिनके माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक जैव-आधारित समाधान एवं समृद्धि पहुँचाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश को एक नई हरित क्रांति की आवश्यकता है।

जिसका मार्ग जीनोम विज्ञान एवं जीन प्रौद्योगिकी से होकर गुजरता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में नवीन प्रौद्योगिकियाँ, उन्नत अनुसंधान अवसंरचना तथा बेहतर नीतियाँ कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में परिवर्तन के प्रमुख स्तंभ बनेंगी।

उन्होंने कहा कि कृषि आधारित जैव-अर्थव्यवस्था भविष्य की चुनौतियों के समाधान की कुंजी है। इस अवसर पर उन्होंने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बायो-ई3 ‘ नीति की जानकारी देते हुए

एक सतत जैव-अर्थव्यवस्था के निर्माण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला तथा इस दिशा में नबी द्वारा किए जा रहे अत्याधुनिक अनुसंधानों एवं नवाचारों की भी जानकारी साझा की।

दूसरे दिन का आरम्भ सत्र–II : जीनोमिक्स, जीन नियमन एवं जैव प्रौद्योगिकी से हुआ। इस सत्र में डॉ.प्रबोध कुमार त्रिवेदी (सीमैप) ने पौधों की वृद्धि, तनाव अनुकूलन एवं फसल सुधार में स्मॉल पेप्टाइड्स की भूमिका पर प्रकाश डाला।

डॉ. जितेन्द्र कुमार ठाकुर (आईसीजीईबी, नई दिल्ली) ने पौधों में वृद्धि एवं तनाव प्रतिक्रियाओं के संतुलन में मेडिएटर कॉम्प्लेक्स की भूमिका स्पष्ट की।

प्रो. वाई. श्रीलक्ष्मी (हैदराबाद विश्वविद्यालय) ने फोटोट्रोपिन-2 द्वारा संचालित ब्लू-लाइट सिग्नलिंग पर अपने नवीन शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए, जबकि प्रो. सौरव दत्ता (आईआईएसईआर भोपाल) ने ब्रैसिनोस्टेरॉइड प्रेरित

BBX प्रोटीन्स की पौधों की हरियाली (ग्रीनिंग) में भूमिका पर व्याख्यान दिया। सत्र का समापन डॉ. आशुतोष पाण्डेय (एनआईपीजीआर) द्वारा केले में साइटोकाइनिन-नियंत्रित एंथोसाइनिन जैवसंश्लेषण पर व्याख्यान के साथ हुआ।

अपराह्न में आयोजित सत्र–III : तनाव एवं पोषक तत्व जीवविज्ञान में पर्यावरणीय एवं आंतरिक सिग्नलिंग तंत्रों के माध्यम से पौधों के अनुकूलन पर विस्तृत चर्चा हुई।

डॉ. अमर पाल सिंह (एनआईपीजीआर) ने पोषक तत्वों की कमी की परिस्थितियों में हार्मोनल नेटवर्क की भूमिका बताई। डॉ. श्रीरामैया एन. गंगप्पा (आईआईएसईआर कोलकाता) ने तापमान आधारित वृद्धि नियमन के आणविक तंत्रों पर प्रकाश डाला,

जबकि डॉ. संतोष बी. सतभाई (आईआईएसईआर मोहाली) ने पौधों में लौह (आयरन) समस्थिति को नियंत्रित करने वाले पर्यावरणीय सिग्नलिंग तंत्रों की जानकारी दी। सभी व्याख्यानों के दौरान वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की।

अंत में डॉ. समीर वी. सावंत, मुख्य वैज्ञानिक एवं संगोष्ठी के संयोजक ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, सहयोगी संस्थाओं, आयोजन समिति, स्वयंसेवकों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button