डॉक्टरों की सूझबूझ से सड़क हादसे में घायल मरीज को मिली नई जिंदगी
मरीज के जमा 1.2लीटर मवाद निकाला बाहर,संस्थान निदेशक ने टीम को दी बधाई

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टरों की सूझबूझ से मरीज के सीने में जमा 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद और पूरी तरह ध्वस्त फेफड़ा से ग्रसित मरीज को नई जिंदगी मिल गयी।
सोमवार को एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रामा सेंटर में सड़क हादसे में घायल मरीज के जमा मवाद और फेफड़े को जकड़े मोटी प्लूरल पील की परत बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक VATS सर्जरी से मरीज का सफल उपचार कर उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज किया।
सोनभद्र निवासी 50 वर्षीय मेवालाल, किसान एवं मेडिकल स्टोर संचालक 8 अप्रैल की रात बाइक और कार की टक्कर में घायल होने के बाद उनका प्रारंभिक उपचार जिला अस्पताल में किया गया।
जबकि समय के साथ उनकी सांस की तकलीफ बनी रही और वे गंभीर स्थिति में एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। डॉक्टरों का कहना है कि मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मरीज को पहले से कई गंभीर सह-रुग्णताएं थीं।
उन्हें लंबे समय से उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह था तथा हृदय संबंधी बीमारी के कारण वर्ष 2023 में PTCA भी किया जा चुका था। वहीं
ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने देखा कि मरीज के सीने में गंभीर पायोथोरेक्स विकसित हो चुका था। सीने के अंदर लगभग 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद जमा था। फेफड़े के ऊपर मोटी प्लूरल पील की परत जम चुकी थी और फेफड़ा पूरी तरह ध्वस्त हो गया था।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सर्जरी के दौरान मरीज को सिंगल-लंग वेंटिलेशन की आवश्यकता पड़ी। इसके बावजूद विशेषज्ञ टीम ने चुनौती स्वीकार करते हुए अत्याधुनिक VATS (Video-Assisted Thoracoscopic Surgery) तकनीक से ऑपरेशन किया।
सर्जनों ने VATS के माध्यम से सीने से भारी मात्रा में गाढ़ा मवाद बाहर निकाला और फेफड़े को जकड़ने वाली मोटी प्लूरल पील को हटाकर डिकॉर्टिकेशन किया। इससे पूरी तरह ध्वस्त फेफड़े को दोबारा फैलने का अवसर मिला।
सर्जरी के बाद मरीज को दो दिनों तक ICU में गहन निगरानी में रखा गया। हालत में लगातार सुधार होने के बाद उन्हें वार्ड में स्थानांतरित किया गया और अंततः 14 सितंबर को संतोषजनक स्थिति में डिस्चार्ज कर दिया गया।
इस जटिल ऑपरेशन टीम में डॉ. अमित कुमार सिंह, एडिशनल चीफ, एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के नेतृत्व में डॉ. आदित्य सिंह, डॉ. वरुण गुप्ता, सीनियर रेजिडेंट, ट्रॉमा सर्जरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर प्रबंधन डॉ. गणपत, डॉ. रफात शमीम, एडिशनल प्रोफेसर, एनेस्थीसिया द्वारा किया गया। आईसीयू एवं OT की पूरी टीम ने भी मरीज की सफल रिकवरी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वहीं संस्थान निदेशक प्रो आरके धीमन ने इस अत्यंत जटिल एवं हाई-रिस्क केस के सफल उपचार पर ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया, ICU एवं OT टीम को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि ऐसे जटिल मामलों का सफल प्रबंधन संस्थान में उपलब्ध व समर्पित मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रॉमा केयर, विशेषज्ञ सर्जिकल क्षमता तथा उन्नत क्रिटिकल केयर सुविधाओं का प्रमाण है।
संस्थान ने मरीज के 1.2 लीटर गाढ़े मवाद से भरा सीना, पूरी तरह ध्वस्त फेफड़ा और गंभीर सह-रुग्णताओं के बावजूद VATS से सफल सर्जरी संस्थान की उन्नत ट्रॉमा केयर क्षमता को दर्शाया है।



