50 टीबी मरीजों को विवेकानंद अस्पताल ने लिया गोद
भाऊ राव देवरस अस्पताल में स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने बांटी पोषण पोटली

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। भाऊ राव देवरस अस्पताल में टीबी मरीजों को पोषण पोटली बांटी गयी। मंगलवार को
विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा टीबी उन्मूलन की दिशा में निरंतर जारी है ।
इसी क्रम में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केयर के तत्वाधान में विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान व विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिग द्वारा “टीबी मुक्त भारत” अभियान के तहत 50 टीबी से पीड़ित मरीजों को गोद लिया गया।
साथ ही संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा प्रत्येक मरीजों को पोषण पोटली महानगर स्थित भाऊराव देवरस सिविल अस्पताल में वितरण किया। यह पोषण पोटली विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान के सहयोग से उपलब्ध करायी गयी।
पोषण पोटली में मूगफली, भूना चना, गुण, सत्तु, तिल का गजक प्रत्येक 1 किलोग्राम पोटली बनाई गयी थी । इस कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मरीजों को बेहतर पोषण सहायता प्रदान करना एवं उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहयोग करना है।
वही संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने कार्यक्रम में उपस्थित डा विशाल कुमार सिंह, भाऊराव देवरस सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा आरके दीक्षित, एसटीएस अखिलेश श्रीवास्तव व टीबीएचबी हमजा खान व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ ही साथ सभी टीबी पीड़ित मरीज एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।
स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि टीबी रोगियों के साथ किसी प्रकार का सामाजिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज भी टीबी रोगियों, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों, को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है, वहीं टीबी से पीड़ित बच्चों के साथ अन्य बच्चे न तो बैठते हैं और न ही खेलते हैं। यह स्थिति मरीजों के हित में नहीं है, क्योंकि इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि उन्हें इस समय परिवार और समाज के सहयोग व हौसले की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
उन्होंने जोर देते हुए सभी टीबी रोगियों को बताया कि टीबी से पीड़ित प्रत्येक रोगी व उनके परिजनों को टीबी को छुपाना नहीं चाहिए, बल्कि बाहर निकलने पर रोगी एवं परिजनों को मास्क का उपयोग करना चाहिए।
जहां तक संभव हो, भीड़-भाड़ से दूर रहना चाहिए। मरीज और परिजनों के बीच बातचीत में भी सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि एक टीबी रोगी खांसने या छींकने से कम से कम 15 नए टीबी रोगी संक्रमित कर सकता है।
उन्होंने बताया कि यदि दो सप्ताह से अधिक खांसी, खांसी में बलगम आना, खांसी में खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने या खांसते समय दर्द महसूस होना, सांस फूलना, लंबे समय तक बुखार रहना, रात में अत्यधिक पसीना आना, थकान और कमजोरी महसूस होना,
लगातार भूख की कमी रहना तथा बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो शीघ्र ही नजदीकी टीबी केंद्र, जिला अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी टीबी मरीजों को अपना उपचार पूर्ण करना चाहिए और दवा बीच में नहीं छोड़नी चाहिए,
अन्यथा गंभीर स्थिति उत्पन्न होकर एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे मरीज की स्थिति अधिक बिगड़ सकती है और समय पर उपचार न मिलने पर जीवन के लिए खतरा भी बढ़ जाता है।
अन्त में स्वामी ने कहा कि इस तरह के प्रयास भगवान श्री रामकृष्ण के सिद्वांत ‘‘नर सेवा नारायण सेवा’’ को सही मायने में चरितार्थ करता है इसके साथ ही उन्होंने टीबी रोगियों के शीघ्र लाभ के लिए श्री ठाकुर जी के श्री चरणों में कामना की।



