फायर एनओसी के नाम पर धन उगाही की गूंजी आवाज,व्यापारियों ने उठाये सवाल
1990 में पुराने लखनऊ में सक्रिय फायर हाइड्रेंट हुए निष्क्रिय , पुनर्जीवित करने की उठाते रहे मांग

लखनऊ भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में फायर एनओसी के नाम दुकानों में नोटिस चस्पा जा रही है। साथ ही व्यापारियों को चेतावनी देने के साथ धन उगाही का खेल शुरू हो गया।
जिससे आहत व्यापारियों ने एक स्वर में सम्बंधित जिम्मेदारो पर गंभीर आरोप लगाए। मंगलवार को लाटूश रोड स्थित लखनऊ व्यापार मंडल कार्यालय पर अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित प्रेस वार्ता में पदाधिकारी ने आंदोलन करने के लिए बाध्य होने की बात कही।
अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने लखनऊ में हुए अग्निकांड की घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह त्रासदी केवल किसी एक व्यक्ति या विभाग की नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थित शहरी व्यवस्था प्रशासनिक लापरवाही सामाजिक उदासीनता तथा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी का परिणाम है।
इस हृदय विदारक घटना में 15 मासूम बच्चों की असामयिक मृत्यु ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। इस अपूरणीय क्षति की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना की जिम्मेदारी एक.दूसरे पर डालने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक समाधान खोजा जाएं।
दुकानों में नोटिस लगाने से व्यापारियों में फैला आक्रोश..
उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण एवं आवास विकास परिषद द्वारा व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बड़ी संख्या में नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं।
इससे ऐसा प्रतीत होता है कि व्यापारी वर्ग को निशाना बनाकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
किसी भी व्यवस्था में सुधार एक दिन में संभव नहीं होता। आनन.फानन में की गई कार्रवाई से समाज में भय भ्रम एवं अफरा.तफरी का वातावरण बन रहा है। जिससे प्रशासन और समाज के बीच विश्वास भी प्रभावित होता है।
राजधानी की गिनाई विकासगति..
👉 लखनऊ का पुराना व्यापारिक क्षेत्र लगभग 200 वर्ष पुराना है। इंदिरा नगर का विकास 1970 के दशक में तथा गोमतीनगर का विकास लगभग 25 से 30 वर्ष पूर्व हुआ। शहर के विस्तार के साथ बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से व्यापारिक गतिविधियां विकसित हुईं।
👉 एलडीए एवं आवास विकास परिषद द्वारा विकसित योजनाओं जैसे राजाजीपुरम इंदिरा नगर गोमतीनगर कानपुर रोड रायबरेली रोड आदि में आबादी की तुलना में अत्यंत सीमित संख्या में व्यवसायिक सुविधा केंद्र (कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स) विकसित किए गए। परिणाम स्वरूप स्थानीय
आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लोगों ने स्वयं छोटे.छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठान विकसित कर लिए। पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि
यदि सरकारी विभागों द्वारा निर्मित व्यवसायिक कॉम्प्लेक्सों में भी सभी अग्नि सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन नहीं हो रहा है तो केवल व्यापारियों को ही दोषी ठहराना कितना उचित है।
उन्होंने कहा कि यदि योजना बनाने वाले जिम्मेदार हैं तो उनकी निगरानी करने वाले विभाग भी समान रूप से उत्तरदायी हैं। पिछले लगभग 30 वर्षों में विकसित हुए क्षेत्रों तथा 200 वर्ष पुराने बाजारों, अमीनाबाद, यहियागंज, चैक एवं अकबरी गेट को कुछ दिनों में पूरी तरह व्यवस्थित कर देना व्यावहारिक नहीं है।
यदि सभी सरकारी भवनों का निष्पक्ष फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए तो अनेक कमियां सामने आ सकती हैं। ऐसी स्थिति में संपूर्ण दायित्व केवल व्यापारी वर्ग पर डालना न्यायसंगत नहीं होगा। मिश्र जी ने सुझाव दिया कि चरणबद्ध तरीके से आवश्यक सुधार किए जाएं जिससे समाज में अनावश्यक भय और अव्यवस्था न फैले।
पुराने लखनऊ में फायर हाइड्रेंट हुए निष्क्रिय..
अमरनाथ मिश्र ने बताया कि अंग्रेजों के समय से पुराने लखनऊ के विभिन्न बाजारों में फायर हाइड्रेंट स्थापित थे। जो लगभग 1990 के दशक तक सक्रिय रहे। बाद में सड़क निर्माण के दौरान अधिकांश फायर हाइड्रेंट जमीन के नीचे दब गए।
पिछले लगभग 10 वर्षों से मैं एवं लखनऊ व्यापार मंडल संबंधित विभागों से इन फायर हाइड्रेंटों का नक्शा उपलब्ध कराने का अनुरोध करते आ रहा है ताकि व्यापार मंडलों द्वारा अपने संसाधनों से उन्हें पुनर्जीवित करा सके किंतु आज तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि लखनऊ की अधिकांश आबादी संकरी गलियों में रहती है। यदि पुराने फायर हाइड्रेंट पुनः चालू कर दिए जाएं तथा नई पाइपलाइन की व्यवस्था हो जाए तो अग्निशमन वाहनों को पानी लेने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और घटनास्थल पर ही तत्काल पानी उपलब्ध हो सकेगा जिससे आग पर शीघ्र नियंत्रण पाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि वर्षों से अनेक कॉम्प्लेक्स बनते रहे लोगों ने दुकानें खरीदीं एवं व्यवसाय शुरू किए तथा संबंधित विभागों से व्यवसायिक विद्युत कनेक्शन, जल कनेक्शन, जीएसटी पंजीकरण, फूड लाइसेंस सहित अन्य सभी अनुमतियां प्राप्त होती रहीं।
यदि किसी भवन में गंभीर कमियां थीं तो संबंधित विभागों ने समय रहते उन्हें क्यों नहीं रोका यदि कोई भवन वास्तव में असुरक्षित था तो उसकी रजिस्ट्री एवं अन्य अनुमतियां कैसे जारी होती रहीं
लखनऊ व्यापार मंडल का सुझाव है कि व्यापारियों एवं संबंधित विभागों के बीच संयुक्त बैठक कर व्यवहारिक एवं सर्वमान्य समाधान निकाला जाए।
जहां आवश्यक हो वहां अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाए जाएं फायर हाइड्रेंट सक्रिय किए जाएं तथा जिन पुराने भवनों में भूमिगत जल भंडारण जैसी व्यवस्थाएं संभव नहीं हैं, वहां उपलब्ध विकल्पों के अनुसार सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि व्यापारी सुरक्षा उपायों के लिए आर्थिक सहयोग देने को भी तैयार हैं लेकिन एक तरफा कार्रवाई एवं नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया उचित नहीं है। प्रशासन को संवाद एवं सहयोग की भावना से आगे बढ़ना चाहिए।
अमरनाथ मिश्र ने कहा कि अग्निकांड की सूचना वायरलेस के माध्यम से पुलिस को भी तत्काल प्राप्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में पुलिस का दायित्व है कि वह तुरंत सड़क को जाममुक्त कर अग्निशमन वाहनों के लिए निर्बाध मार्ग उपलब्ध कराए ताकि राहत एवं बचाव कार्य में विलंब न हो।
उन्होंने कहा कि पूर्व में ब्रजेश पाठक के प्रयास से अमीनाबाद में फायर स्टेशन स्थापित कराया गया था। किंतु आज उसी के बाहर सड़क तक अतिक्रमण है।
जहां वेंडिंग जोन अनुमन्य नहीं है वहां भी अतिक्रमण बना हुआ है। आज तक सरकार समुचित वेंडिंग जोन विकसित नहीं कर सकी है। ई.रिक्शा संचालन, अवैध पार्किंग तथा सड़क प्रबंधन जैसी समस्याओं का भी स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में केवल व्यापारियों के विरुद्ध कार्रवाई करना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी मानकों के अनुसार अग्निशमन वाहनों में आधुनिक उपकरण जैसे वॉल कटर शटर कटर एवं अन्य आवश्यक बचाव उपकरण उपलब्ध होने चाहिए।
यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पुलिस एवं अग्निशमन विभाग के पास पर्याप्त फायर सूट आधुनिक उपकरण एवं प्रशिक्षित संसाधन उपलब्ध हों। इन आवश्यकताओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए जितना व्यापारियों पर कार्रवाई करने में दिया जा रहा है।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन केवल नोटिस जारी कर व्यापारियों पर कार्रवाई करता रहा और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय नहीं की गई तो इससे भ्रष्टाचार एवं अवैध वसूली को बढ़ावा मिलेगा। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी। यदि यही रवैया जारी रहा तो व्यापारी
आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे तथा प्रतीकात्मक रूप से अपनी दुकानों की चाबियां प्रशासन को सौंपने पर भी विचार करेंगे।
उन्होंने कहा कि इस त्रासदी से सबक लेते हुए दोषारोपण की राजनीति छोड़कर प्रशासन व्यापारी एवं समाज को मिलकर ऐसा स्थायी एवं व्यवहारिक समाधान निकाले।जिससे भविष्य में ऐसी किसी भी दुखद घटना की पुनरावृत्ति न हो।
वहीं प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र,नीरज जौहर वरिष्ठ महामंत्री पवन मनोचा जितेंद्र सिंह चौहान, अनुराग मिश्र, उमेश शर्मा ट्रांसगोमती अध्यक्ष, देवेंद्र गुप्ता कोषाध्यक्ष सुहैल हैदर अल्वी महामंत्री सोमेश मिश्रा मनीष गुप्ता प्रियंक गुप्ता मीडिया महामंत्री सुमित गुप्ता मुस्वीर अली मंसू शोएब जलाली परमजीत सिंह ने अपने विचार साझा किये।



