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मानव सेवा ही ईश्वर सेवा – मुक्तिनाथानन्द 

विवेकानंद अस्पताल में मना विश्व होम्योपैथी दिवस

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने होम्योपैथिक उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।

शुक्रवार को विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान के होम्योपैथी विभाग द्वारा रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के सहयोग से डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनिमैन की 271वीं जयंती के अवसर पर विश्व होम्योपैथी दिवस का सफल आयोजन किया गया।

इस अवसर पर चिकित्सकों, विशेषज्ञों, विद्यार्थियों एवं अतिथियों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली।

। कार्यक्रम की शुरूआत संस्थान की उपचारिकाओं द्वारा वैदिक मन्त्रोंच्चारण से साथ दीप प्रज्जवलन कर किया गया । इस अवसर पर संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज, मुख्य अतिथि

डा किरन कुमारी दास, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, लखनऊ मंण्डल, अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डा बीके सिंह, होम्योपैथी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित पाण्डेय व अन्य कर्मचारी व अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का आयोजन “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” विषय के अंतर्गत किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इसके वैज्ञानिक, सुरक्षित एवं किफायती स्वरूप को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने होम्योपैथी की मूल अवधारणाओं, इसकी प्रभावशीलता तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं राजधानी के आस-पास के मरीजों के लिए एक निःशुल्क होम्योपैथी चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।

वहीं संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने “होम्योपैथी के माध्यम से सामंजस्यः सीमाओं से परे उपचार” विषय पर अपने प्रेरणादायक एवं विचारोत्तेजक संबोधन में कहा कि होम्योपैथी केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है।

बल्कि यह एक ऐसी समग्र चिकित्सा पद्धति है जो व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति कम लागत में सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार प्रदान करती है।

जिससे यह समाज के सभी वर्गों के लिए सुलभ बनती है। साथ ही, यह पद्धति रोग के मूल कारण को समझकर उपचार करती है, जिससे रोग की पुनरावृत्ति की संभावना कम हो जाती है।

स्वामी ने आगे कहा कि “स्वास्थ्य केवल शारीरिक अवस्था नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन का भी प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब तक व्यक्ति के भीतर संतुलन और सामंजस्य स्थापित नहीं होगा, तब तक वास्तविक स्वास्थ्य की प्राप्ति संभव नहीं है। होम्योपैथी इसी समग्र दृष्टिकोण को अपनाते हुए व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का उपचार करती है।

स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है” और इसी भावना के साथ संस्थान निरंतर समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए कार्यरत है।

उन्होंने सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से आह्वान किया कि वे अपनी सेवाओं को केवल पेशा न मानकर एक सेवा एवं साधना के रूप में अपनाएं।

अंत में स्वामी ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन न केवल होम्योपैथी के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगे, बल्कि समाज में स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली को भी प्रोत्साहित करेंगे। उन्होंने सभी को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने एवं प्राकृतिक एवं समग्र चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही

मुख्य अतिथि डा किरन कुमारी दास ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति विश्वभर में अपनी प्रभावशीलता के कारण तेजी से स्वीकार की जा रही है और यह भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूर्णतः सक्षम है।

उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी यह पद्धति अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है, क्योंकि यह किफायती होने के साथ-साथ सुरक्षित भी है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में, जहां जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और मानसिक तनाव आम होता जा रहा है।

वहां होम्योपैथी एक सुरक्षित, कोमल और दीर्घकालिक समाधान के रूप में उभर रही है। यह चिकित्सा पद्धति रोग के लक्षणों को दबाने के बजाय उसके मूल कारण को समझकर उपचार करती है, जिससे रोगी को स्थायी राहत प्राप्त होती है।

होम्योपैथी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित पाण्डेय ने विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि होम्योपैथी विभाग ने अल्प समय में उल्लेखनीय प्रगति की है। जिसका श्रेय स्वामी मुक्तिनाथानन्द के सतत मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं सहयोग को जाता है।

उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसी क्रम में विश्व होम्योपैथी जागरूकता सप्ताह दिनांक 10 से 16 अप्रैल तक आयोजित किया जायेगा।

उन्होंने आगे जानकारी दी कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के अंतर्गत डॉ. सौरभ श्रीवास्तव के नेतृत्व में नियमित रूप से चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। जिनमें बड़ी संख्या में ग्रामीण लाभान्वित हो रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से न केवल उपचार प्रदान किया जा रहा है, बल्कि स्वास्थ्य शिक्षा एवं जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इसके अलावा संस्थान द्वारा अयोध्या धाम में निःशुल्क होम्योपैथी ओपीडी का सफल शुभारंभ किया गया है। जहां डॉ. शालिनी सिंह अपनी विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

इस ओपीडी का उद्घाटन स्वामी मुक्तिनाथानन्द द्वारा भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव राम नवमी के पावन अवसर पर किया गया,जो सेवा एवं आध्यात्मिकता का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीके सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

उन्होंने मुख्य अतिथि, सभी वक्ताओं के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रेरणादायक विचारों एवं मार्गदर्शन से कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं सार्थक बन सका। उन्होंने विशेष रूप से स्वामी मुक्तिनाथानन्द के प्रति आभार प्रकट किया। जिनके नेतृत्व एवं प्रेरणा से संस्थान निरंतर सेवा एवं चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।

डॉ. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाते हैं। बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी सुदृढ़ करते हैं। अंत में उन्होंने सभी उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल समापन की घोषणा की।

अंत में, इस आयोजन ने होम्योपैथी के माध्यम से सतत, सुलभ एवं समावेशी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के संस्थान के संकल्प को पुनः दृढ़ किया। यह कार्यक्रम न केवल चिकित्सा क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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