सेव डॉटर सेव वाटर की जगानी है अलख – विहसंत सागर मुनिराज
19 जुलाई को कानपुर रोड के सीएमएस ऑडिटोरियम में चातुर्मास महोत्सव

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। जीवन काल में पहली बार राजधानी आना हुआ। साधु जीवन के 26 साल हो रहे हैं, गृहस्त जीवन के 16 साल हो गए है।
देश की राजधानी दिल्ली में 11 चातुर्मास किया। मध्य प्रदेश में 8 चातुर्मास किये , एक हरियाणा में दो छत्तीसगढ़ में, 11 चातुर्मास यूपी में किये हैं।
यह बातें गुरुवार को आशियाना स्थित भगवान तीर्थनकर महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान विहसंत सागर मुनिराज ने कही। उन्होंने कहा कि आज के 15 दिन पहले राजधानी में महावीर स्वामी जैन मंदिर में पदार्पण करना हुआ।
इस मंदिर के 24 वर्ष पूरे हो चुके हैं 25 वें में प्रवेश कर चुका है। अभी तक इस मंदिर में किसी साधु द्वारा चातुर्मास अनुष्ठान नहीं कराया गया। लोगों की इच्छा थी की राजधानी वासियों को चातुर्मास अनुष्ठान का लाभ मिले।
इसलिए लोक कल्याण की भावना के साथ आगामी 19 जुलाई को चातुर्मास स्थापना महोत्सव का आयोजन किया जा रहा। उन्होंने कहा मुझे मेडिटेशन गुरु के नाम से जाना जाता है।
विहसंत सागर मुनिराज ने बताया कि पहली बार राजधानी में ऐतिहासिक चातुर्मास होने जा रहा है। चातुर्मास की स्थापना कानपुर रोड सीएमएस ऑडिटोरियम में भव्य स्तर रूप से आयोजित किया जा रहा है ।
जिसमें देश के अनेक राज्यों से हजारों की संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु, धर्मप्रेमी भाग लेंगे। विहसंत सागर मुनिराज ने अपने जीवन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि
अब तक 80 जैन मंदिरों का जीर्णोद्धार, 54 पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, 380 वेदी प्रतिष्ठाएँ, 95 शिखर निर्माण, 780 शिखर कलशारोहण, 47 नवीन जिन मंदिरों का निर्माण, 13 चौबीसी एवं मान-स्तंभ, कीर्ति-स्तंभ,
185 संत भवन, 59 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान, 6 अस्पताल, 7 जैन विद्यालय तथा 3 भोजनशालाओं का संचालन किया है ।
विगत 26 वर्षों में उन्होंने लगभग 90,000 किलोमीटर का पदविहार कर धर्म का प्रचार प्रसार करते हो रहा है। ज्ञात हो कि विहसंत सागर मुनिराज अपने कठोर संयम, त्याग, तप, ध्यान साधना एवं वचन-सिद्धि के लिए देशभर में विशेष रूप से विख्यात हैं।
मंदिर जीर्णोद्धार के प्रत्येक संकल्प के साथ वे किसी एक वस्तु का त्याग करते हैं और कार्य पूर्ण होने पर उसका आजीवन परित्याग कर देते हैं। उन्होंने जीवनभर अनेक वस्तुओं एवं सभी प्रकार की औषधियों का भी त्याग किया है।
विहसंत सागर महाराज ने अपने त्याग जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खाद्य पदार्थो में दही तेल का परित्याग किया जन्म से अभी तक नहाया नहीं हूं,कभी कोई दवा का सेवन नहीं किया, कभी कोई कपड़े नहीं पहने, चाहे गर्मी हो,बरसात हो, हमेशा एक समान रहता हूं।
अंधेरा होते ही मौन हो जाता हूं। कभी कोई वाहन का सहारा नहीं लिया पैदल ही यात्रा करता हू। कहा चातुर्मास स्थापना महोत्सव में भगवान बनने की प्रक्रिया की जानकारी देंगे। ‘सेव डॉटर, सेव वाटर’ की अलख जगानी है।
आज समाज होटल और बॉटल के चक्कर में माता पिता की सेवा करने का कर्तव्य भूल गया है। इन्हीं सब बुराइयो से छुटकारा दिलाने के लिए यह चातुर्मास महोत्सव किया जा रहा है।
जिसमें भारतीय आध्यात्मिक, सामाजिक संस्कृति का पाठ पढ़ाया जायेगा। उन्होंने जन मानस से अपील करते हुए कहा कि अपने परिवार के साथ चातुर्मास में सहभागी बने और अपने जीवन के साथ अपने वाली पीढ़ी का उज्जवल भविष्य बनाये।
चातुर्मास महोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों का विवरण..
👉 19 जुलाई चातुर्मास कलश स्थापना, 12 बजे, कानपुर रोड सीएमएस ऑडिटोरियम में किया जायेगा।
👉 20 जुलाई ज्योतिष सम्मेलन।
👉 28 जुलाई – चातुर्मास प्रतिष्ठापन विधि, प्रातः 8 बजे।
👉 29 जुलाई गुरु पूर्णिमा महोत्सव
👉 12 अगस्त 43वाँ जन्मोत्सव एवं दिवसभर भंडारा।
👉 15 अगस्त राष्ट्र के नाम संदेश
👉 19 अगस्त – भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष सप्तमी एवं सम्मेद शिखर रचना।
👉 28 अगस्त वात्सल्य पर्व एवं रक्षाबंधन विशेष प्रवचन।
👉 4 सितंबर जन्माष्टमी
👉 16 से 25 सितंबर तक दस लक्षण महापर्व।
👉 27 सितंबर विश्व मैत्री दिवस एवं क्षमावाणी।
👉 11 अक्टूबर – सरस्वती महाअर्चना।
👉 9 नवंबर चातुर्मास कलश निष्ठापन एवं भगवान महावीर निर्वाण उत्सव
विशेष सम्मेलन एवं आयोजन किया जायेगा। साथ ही कैरियर काउंसलिंग,ज्योतिष सम्मेलन, सर्वधर्म सम्मेलन, बुद्धिजीवी सम्मेलन जैन समाज के डॉक्टर, आईपीएस , आईएएस , इंजीनियर, वकील, न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी, सांसद, विधायक का सम्मान होगा । इसके अलावा महिला सम्मेलन, वरिष्ठ व्यापारी वैश्य सम्मेलन, प्रतिभा सम्मान समारोह, मेडिकल कैंप
,वृक्षारोपण, भंडारा, नियमित साप्ताहिक आयोजन प्रत्येक शनिवार दोपहर 3 बजे जैन पाठशाला में सभी आयु वर्ग के बच्चे, युवा, महिलाएँ एवं वरिष्ठजन भाग ले सकते हैं। वहीं जैन धर्म, जिनवाणी, संस्कार, नैतिक शिक्षा एवं धार्मिक अध्ययन कराया जाएगा।
प्रत्येक रविवार – “संत-डे होगा। संत सान्निध्य में विशेष विचार गोष्ठियाँ में प्रश्नोत्तर सत्र, आध्यात्मिक चर्चा, व्यक्तित्व एवं संस्कार विकास कार्यक्रम होगा।
प्रतिदिन के नियमित कार्यक्रम में प्रातः 6 बजे क्रीम क्लासेस (जिनवाणी एवं जैन शास्त्रों का अध्ययन) प्रातः 8 बजे मंगल प्रवचन,अपराह्न 3:30 बजे स्वाध्याय सायं 6:30 बजे गुरु भक्ति, आरती एवं प्रवचन किया जायेगा।



