प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने नियमावली-2020 की कमियों को सुधार करने की उठाई आवाज
प्रेसवार्ता में डॉक्टरों ने 13 सूत्रीय मांग-पत्र रखा, सुधार करने का उठा मुद्दा

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने डॉक्टर हित में नियमावली-2020 की कमियों को सुधार करने की आवाज उठाई।
गुरुवार को संघ कार्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ प्रदेश अध्यक्ष डॉ यशवीर सिंह एवं
डॉ शरद वैश्य महासचिव प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने पीएमएस संवर्ग के चिकित्सकों की वर्षों से लंबित सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश सरकार के समक्ष 13 सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया ।
संघ का मानना है कि इन मांगों का उद्देश्य केवल चिकित्सकों के सेवा हितों का संरक्षण नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सक्षम, जवाबदेह एवं गुणवत्तापूर्ण बनाना है।
प्रेस वार्ता के दौरान संयुक्त रूप से डॉक्टरों ने एक स्वर में कहा कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के करोड़ों नागरिकों को मिलेगा।
संघ ने यह स्पष्ट किया की उनकी यह मांगें किसी आर्थिक लाभ अथवा विशेष सुविधा की मांग नही है। केवल न्यायपूर्ण कैरियर प्रगति की मांग है। जिससे किसी भी चिकित्सक को प्राशासनिक विलम्ब का दण्ड ना भुगतना पड़ें।
साथ ही संघ ने सर्वप्रथम नियमावली 2020 की कमियां उजागर करते हुए बताया कि सेवा नियमावली-2020 के वर्तमान स्वरूप के कारण स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। वर्तमान में लगभग 7,000 लेवल 1 चिकित्सकों के सापेक्ष लेवल-2 के मात्र 3,620 पद ही स्वीकृत हैं।
यदि इन पदों पर वर्तमान में पदोन्नति कर भी दी जाए, तो भी अगले लगभग 6 वर्षों तक ये पद पुनः रिक्त नहीं होंगे। इसी क्रम में कहा कि लेवल-1 के लगभग 3,620 उपलब्ध पदों पर पहले से कार्यरत लगभग 3,380 चिकित्सकों के कारण नई रिक्तियाँ उपलब्ध नहीं होंगी।
परिणाम स्वरूप विगत वर्ष 2019 के बाद से विभाग में कोई भी नई नियुक्ति नहीं हुई है। जबकि इससे आगामी वर्षों में भी नई भर्ती की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से प्रतिवर्ष लगभग 10,000 एमबीबीएस चिकित्सक स्नातक होकर निकलते हैं।
जिनमें से बड़ी संख्या राज्य की सरकारी सेवा में आने की इच्छुक होती है और नियमावली-2020 की वर्तमान व्यवस्था के कारण सेवा में कैरियर प्रगति के अभाव एवं पदोन्नति की अनिश्चितता के कारण अधिकांश योग्य चिकित्सक अन्य राज्यों अथवा निजी क्षेत्र की ओर पलायन करने को विवश हो रहे हैं।
6 सालों के बाद भी वर्तमान में मात्र 484 विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं..
इसके विपरीत नियमावली 2020 में विशेषज्ञ चिकित्सकों को राजकीय सेवा में आकर्षित करने के उद्देश्य से लेवल 2 पर सीधी भर्ती करने की व्यवस्था की गई है।
जिसके लिए आरक्षित 3620 पदों के सापेक्ष विगत 6 सालों के बाद भी वर्तमान में मात्र 484 विशेषज्ञ चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में इस प्रकार से सीधी भर्ती किये जाने की व्यवस्था त्रुटिपूर्ण है एवं इसमें संशोधन आवश्यक है।
संघ ने उत्तर प्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा नियमावली-2020 में आवश्यक संशोधन की मांग करते हुए कहा है कि वर्ष 2020 से पूर्व सेवा में आए चिकित्सकों की पदोन्नति पूर्ववर्ती सेवा नियमावली-2011 के अनुसार सुनिश्चित की जाए।
साथ ही वर्ष 2020 के बाद सेवा में आए एवं भविष्य में नियुक्त होने वाले चिकित्सकों के लिए लेवल-1 से लेवल-2 में 4 (चार) वर्ष पर समयबद्ध पदोन्नति की व्यवस्था लागू की जाए।
विभागीय डिप्लोमा एवं एमडी /एमएस जैसी विशेषज्ञ डिग्री प्राप्त करने वाले अथवा पूर्व में धारित चिकित्सकों को प्रोत्साहन स्वरूप लेवल-4 पर मौलिक नियुक्ति होने तक तीन अतिरिक्त वेतनवृद्धियां प्रदान की जाएं।
संघ ने लेवल-1 के चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान करने की उठी मांग..
संघ ने लेवल-1 के चिकित्सकों को अविलंब एसएसीपी /एसीपी के माध्यम से वित्तीय उच्चीकरण का लाभ देने, एसीआर पोर्टल पर लंबित प्री-फिक्सिंग की समस्या का समाधान कर सभी चिकित्सकों को सेल्फ
ऍप्रैज़ल भरने का अवसर प्रदान करने, एसीआर ऑटो फॉरवर्ड व्यवस्था में अधिकतम अंक प्रदान करने तथा रिपोर्टिंग , रिव्युविंग एवं Accepting ऑफिसर्स की स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।
संघ ने यह भी आग्रह किया है कि शासनादेश के अनुरूप प्रत्येक वर्ष कम से कम दो बार नियमित डीपीसी एवं एसएसीपी आयोजित किए जाएं तथा पात्रता सूची जारी करते समय सभी पात्रता मानकों का स्पष्ट उल्लेख कर पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी बनाया जाए।
प्रैक्टिस निषेध भत्ता का रखा प्रस्ताव..
संघ ने प्रैक्टिस निषेध भत्ता (एनपीए) को वैकल्पिक बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा है। संघ ने कहा कि इससे सरकारी सेवा में कार्यरत योग्य एवं अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों के ज्ञान एवं अनुभव का लाभ व्यापक स्तर पर समाज को उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त संघ ने मांग की है कि किसी भी वरिष्ठ चिकित्सक को उनकी लिखित सहमति अथवा विधिसम्मत लिखित आदेश के बिना किसी कनिष्ठ चिकित्सक के अधीन कार्य करने के आदेश जारी न किए जाएं तथा प्रदेश में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप चिकित्सालयों में सुनिश्चित की जाए।
जिससे विशेषज्ञ सेवाओं का अधिकतम लाभ आमजन को प्राप्त हो।
संघ ने यह भी कहा है कि अधिवर्षता आयु 65 वर्ष किए जाने के कारण लेवल-4 के पदों पर उत्पन्न संतृप्तता से पदोन्नति की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो रही है। इसलिए लेवल-4 के पदों की संख्या बढ़ाकर चिकित्सकों की कैरियर प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया जाए।
संघ ने सुझाव देते हुए कहा कि चिकित्सकों को 62 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर समस्त सेवानिवृत्ति एवं पेंशन लाभ प्रदान कर दिए जाएं। इससे उनसे यह विकल्प लिया जाए कि वे आगे सेवा देना चाहते हैं अथवा नहीं।
जो चिकित्सक स्वेच्छा से सेवा जारी रखना चाहें, उन्हें उनकी इच्छानुसार जनपद में तैनाती दी जाए। जिससे अनुभवी चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ प्रदेश को निरंतर मिलता रहे।
इसके साथ ही सार्वजनिक अवकाशों के दिन दोपहर 12 बजे तक नियमित ओपीडी संचालन की व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी की गई है।
ताकि चिकित्सकों को विधिसम्मत अवकाश का लाभ मिल सके तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं आपातकालीन व्यवस्था के माध्यम से निर्बाध रूप से संचालित होती रहें। वहीं संघ ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार चिकित्सकों की इन न्यायोचित, व्यावहारिक एवं जनहितकारी मांगों पर संवेदनशीलतापूर्वक विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।
संघ का विश्वास है कि इन सुधारों से चिकित्सकों का मनोबल सुदृढ़ होगा, स्वास्थ्य प्रशासन अधिक प्रभावी बनेगा तथा उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊर्जा एवं मजबूती प्राप्त होगी।



