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रक्तदान करने में बढ़ चढ़ कर करें भागीदारी – मुकेश शर्मा 

विश्व रक्तदाता दिवस पर की लोगों से अपील 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। रक्तदान करने के लिए बढ़-चढ़ कर भागीदारी निभाए। रक्त एक ऐसी चीज है, जिसे किसी लैब में निर्मित नहीं किया जा सकता है।

जबकि रक्त की सबसे अधिक जरूरत आपात स्थितियों, शल्य क्रिया, कैंसर या गंभीर बीमारियों के मरीजों और प्रसव के दौरान पड़ती है। अस्पतालों के ब्लड बैंक की हरसम्भव कोशिश रहती है कि उनके यहाँ कभी कोई ऐसी स्थिति न आने पाए कि रक्त के अभाव में किसी के साँसों की डोर टूटने पाए।

इसके लिए वह समय-समय पर लोगों को नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करते रहते हैं और जगह-जगह शिविर आयोजित करते हैं। इन प्रयासों का सिर्फ और सिर्फ एक ही मूल मकसद होता है आपात स्थितियों में लोगों के प्राणों की रक्षा करना। शनिवार को

पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा ने कहा कि रक्तदान के प्रति समुदाय में जागरूकता की अलख जगाने और समय-समय पर रक्तदान के लिए नि:स्वार्थ भाव से आगे आने वाले रक्तदाताओं के प्रति शुक्रिया अदा करने के लिए ही हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है।

इस साल इस खास दिवस की थीम “मानवता की एक बूँद, रक्तदान करें-जीवन बचाएं” तय की गयी है। इस दिवस को नोबेल पुरस्कार विजेता कार्ल लैंडस्टीनर की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, उन्होंने ही रक्त समूहों की खोज की थी।

18 साल से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति जिसका वजन करीब 50 किलोग्राम है, वह स्क्रीनिंग के बाद रक्तदान कर सकता है। गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति या संक्रमित का रक्त ब्लड बैंक तक न पहुँचने पाए, इसके लिए जरूरी जांच-परख भी की जाती है। सर्दी, फ्लू, गले में खराश, बुखार,

पेट की खराबी या किसी अन्य संक्रमण की स्थिति में वैसे भी लोगों को रक्तदान से बचना चाहिए। दान किये गए रक्त की हर यूनिट को लाल रक्त कोशिकाओं, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स सहित कई वर्गों में विभाजित किया जा सकता है।

इस तरह एक व्यक्ति द्वारा दान किया गया रक्त कई लोगों के काम आ सकता है। शरीर में करीब पांच लीटर रक्त होता है। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति एक बार में करीब 450 मिली लीटर रक्तदान कर सकता है, जिसकी भरपाई शरीर 24 से 48 घंटे में खुद कर लेती है। एक बार रक्तदान कर देने वाला करीब आठ सप्ताह तक दोबारा रक्तदान नहीं कर सकता है।

रक्तदान को लेकर समुदाय में तरह-तरह की भ्रांतियां भी मौजूद हैं, जिस कारण से लोग रक्तदान को आगे आने से कतराते हैं। आज के दिन उन्हीं भ्रांतियों को जड़ से ख़त्म करने की जरूरत है।

लोगों में भ्रम है कि रक्तदान से कमजोरी आती है, जबकि ऐसा कतई नहीं है। कुछ लोग सोचते हैं कि एक बार उनके रक्तदान कर देने से क्या ही फर्क पड़ने वाला है, जबकि ब्लड की एक-एक बूँद बहुमूल्य है।

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