एफएसडीए ने पकड़ा लखनऊ से मध्य प्रदेश का नकली दवाओं नेटवर्क
यूपी एफएसडीए ने उज्जैन में नकली दवाओ के सिंडिकेट का किया भंडाफोड़

उज्जैन, मध्य प्रदेश। उत्तर प्रदेश। लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। यूपी एफएसडीए ने प्रदेश के बाहर भी नकली दवाओं के सिंडिकेट बड़ा भंडाफोड़ किया है।
नकली और अवैध दवाओं के कारोबार के खिलाफ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का अभियान अब प्रदेश की सीमाओं से बाहर सक्रिय सिंडिकेट तक पहुंच गया है।
वहीं लखनऊ में दर्ज नकली दवाओं के एक मामले की कड़ियां खंगालते हुए यूपी एफएसडीए और पुलिस की टीम मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंची। जहां स्थानीय औषधि प्रशासन, आयुष विभाग और पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में अंतर्राज्यीय नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया गया।
जांच में सामने आया कि आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण के लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवा LEVERA-500 का अवैध निर्माण किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच और पूछताछ में करीब 4.80 लाख टैबलेट यानी लगभग 32 हजार स्ट्रिप्स तैयार कर हरिद्वार भेजे जाने की बात भी सामने आई है।
लखनऊ की एफआईआर से खुले उज्जैन तार..
इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क की परतें लखनऊ के थाना अमीनाबाद में दर्ज एफआईआर की विवेचना के दौरान खुलीं। 12 अगस्त 2026 को नकली, काउंटरफीट दवाओं, अवैध डायवर्जन और कूटरचित बिलिंग के मामले में अंकुर अवस्थी, मनीष बाजपेयी,
गोविंद शुक्ला और सहारनपुर निवासी एजाज अहमद के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में मनीष बाजपेयी, गोविंद शुक्ला और एजाज अहमद को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एजाज अहमद से पूछताछ और उससे मिली कड़ियों के आधार पर जांच आगे बढ़ी तो नेटवर्क का सिरा मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ा मिला।
इसके बाद उत्तर प्रदेश के औषधि निरीक्षकों और पुलिस अधिकारियों की टीम ने उज्जैन पहुंचकर मध्य प्रदेश के स्थानीय औषधि एवं आयुष अधिकारियों के साथ संयुक्त कार्रवाई की।
आयुर्वेदिक लाइसेंस के सहारे निकला एलोपैथिक दवा का निर्माण..
संयुक्त टीम ने उज्जैन के ए-88, न्यू इंडस्ट्रियल एरिया, आगर रोड स्थित मेसर्स रुद्राया फार्मा पर छापा मारा। मौके पर फर्म संचालक प्रेम मलिक और उसका पुत्र राहुल मलिक उर्फ रितिक मौजूद मिले।
जांच में सामने आया कि फर्म के पास केवल आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण का लाइसेंस था। लेकिन इसकी आड़ में एलोपैथिक दवा LEVERA-500 का अवैध निर्माण किया जा रहा था।
पूछताछ में प्रेम मलिक ने बताया कि वह एजाज अहमद के साथ पिछले 8 से 10 वर्षों से जुड़ा था। एजाज के कहने पर LEVERA-500 में इस्तेमाल होने वाला एक्टिव इनग्रेडिएंट Levetiracetam IP मुंबई की फर्मों से मंगाया जाता था और उज्जैन स्थित फैक्ट्री में टैबलेट तैयार की जाती थीं।
4.80 लाख टैबलेट निकला हरिद्वार..
पूछताछ में यह भी सामने आया कि दवा तैयार करने के लिए प्रिंटेड पैकिंग मैटेरियल एजाज अहमद उपलब्ध कराता था। अब तक करीब 4,80,000 टैबलेट यानी लगभग 32,000 स्ट्रिप्स तैयार कर प्राइवेट बसों के जरिए एजाज अहमद को हरिद्वार भेजी जा चुकी थीं।
इसके बदले भुगतान नकद और ऑनलाइन माध्यम से किए जाने की बात सामने आई है। इससे जांच एजेंसियों को दवाओं के निर्माण से लेकर सप्लाई और भुगतान तक की चेन को जोड़ने में महत्वपूर्ण कड़ियां मिली हैं।
एफआईआर की भनक लगी तो सबूत मिटाने की कोशिश..
लखनऊ में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद नेटवर्क से जुड़े साक्ष्य मिटाने की कोशिश भी सामने आई है। पूछताछ के मुताबिक प्रेम मलिक ने LEVERA-500 से संबंधित बची हुई निर्मित दवाओं के साथ प्रिंटेड पैकिंग मैटेरियल, चेंज पार्ट्स और डाई-पंच नष्ट कर दिए थे।
इतना ही नहीं, दवा की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली हाईटेक Alu-Alu पैकिंग मशीन को भी देवास स्थित एक ठिकाने पर छिपा दिया गया था। एफएसडीए और पुलिस अब उपलब्ध डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की शेष कड़ियों की जांच आगे बढ़ा रहे हैं।
फैक्ट्री की छत से मिलीं 5,250 संदिग्ध ग्लास वायल..
छापेमारी के दौरान फैक्ट्री परिसर की छत से बड़ी संख्या में बिना लेबल वाली संदिग्ध कांच की वायल भी बरामद हुईं। औषधि निरीक्षक ने 5,250 ग्लास वायल को फॉर्म-16 पर अंकित करते हुए सात कार्टन में सील किया।
आयुष अधिकारियों ने मौके से आठ आयुर्वेदिक दवाओं के नमूने लिए, जबकि औषधि निरीक्षक द्वारा संदिग्ध वायल के नमूने जांच एवं विश्लेषण के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
टीम ने संबंधित क्रय-विक्रय बिल, इनवॉइस, मोबाइल स्क्रीनशॉट और अन्य साक्ष्यों को भी सुरक्षित कर लिया है। फर्म संचालक प्रेम मलिक से वैधानिक अंडरटेकिंग ली गई है और उसे लखनऊ के अमीनाबाद थाने में दर्ज एफआईआर में नामजद करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिर्फ नकली दवा पकड़ना नहीं, पूरी सप्लाई चेन तोड़ने पर फोकस..
उज्जैन की इस कार्रवाई के माध्यम से यूपीएफएसडीए ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि उसकी जांच अब संदिग्ध दवा मिलने या किसी एक कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है।
विभाग का फोकस दवा के निर्माण स्थल, एक्टिव इनग्रेडिएंट की खरीद, पैकिंग मैटेरियल, परिवहन, भुगतान और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर है।
लखनऊ में दर्ज एक एफआईआर से शुरू हुई जांच में पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर दूसरे राज्य में निर्माण इकाई तक पहुंचना इसी रणनीति का हिस्सा है।
जांच में डिजिटल भुगतान, मोबाइल रिकॉर्ड, बिल-इनवॉइस और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को भी सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि नेटवर्क में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका सामने लाई जा सके।
प्रदेश की सीमा के बाहर भी नेटवर्क खंगालने में जुटा यूपी एफएसडीए..
उज्जैन में हुई कार्रवाई से विभाग ने यह संदेश भी दिया है कि नकली दवाओं की सप्लाई चेन उत्तर प्रदेश के बाहर से संचालित होने पर जांच राज्य की सीमा पर नहीं रुकेगी।
दूसरे राज्यों के औषधि प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय कर निर्माण और सप्लाई से जुड़े वास्तविक स्रोत तक पहुंचने की कार्रवाई की जाएगी।
यूपी एफएसडीए का फोकस नकली, संदिग्ध और अवैध दवाओं के मामलों में केवल तात्कालिक कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को तोड़ने पर है। विभाग इसी संवेदनशीलता के साथ मरीजों तक सुरक्षित और गुणवत्तापरक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रखेगा।
दवाओं की गुणवत्ता से समझौता नहीं..
एफएसडीए के अभियान का मूल आधार मरीज की सुरक्षा है। सामान्य उपभोक्ता किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह होने पर उसे न खरीदने या न खाने का फैसला कर सकता है।
लेकिन बीमारी से जूझ रहे मरीज के लिए चिकित्सक द्वारा दी गई दवा उपचार की आवश्यकता होती है। वह इस भरोसे के साथ दवा लेता है कि उसके हाथ में पहुंची टैबलेट, कैप्सूल या इंजेक्शन असली, सुरक्षित और निर्धारित गुणवत्ता का है।
यही कारण है कि नकली दवा का कारोबार सामान्य आर्थिक अपराध से कहीं अधिक गंभीर है। नकली या संदिग्ध दवा मरीज को अपेक्षित उपचार से वंचित कर सकती है और उसके स्वास्थ्य एवं जीवन को जोखिम में डाल सकती है।
इसलिए औषधि प्रवर्तन को यूपी एफएसडीए पब्लिक हेल्थ की सुरक्षा से जुड़ी अनिवार्य जिम्मेदारी के रूप में लेकर चल रहा है।



