भारतीय अंगदान दिवस के उपलक्ष्य वॉकाथॉन
अंगदान बढ़ावा देने के लिए किया जागरूक

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया।
रविवार को राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोट्टो ) ने संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में प्रो. आर. हर्षवर्धन, संयुक्त निदेशक, सोट्टो , उप्र एवं विभागाध्यक्ष, के मार्गदर्शन में एक वॉकाथॉन किया गया । यह आयोजन “भारतीय अंगदान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम के तहत किया।
उत्तर प्रदेश के लिए सोट्टो की स्थापना राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में मानव अंगों एवं ऊतकों को निकालने, सुरक्षित रखने तथा प्रत्यारोपित करने की प्रणाली को औपचारिक रूप देने के लिए की गई थी।
जिसका उद्देश्य प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों और उपलब्ध अंगों के बीच के अंतर को पाटना है।
प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला भारतीय अंगदान दिवस अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने, भ्रांतियों एवं गलतफहमियों को दूर करने तथा नागरिकों को मृत्यु के पश्चात अंग एवं ऊतक दान करने के लिए प्रेरित करने के लिए किया गया ।
कल अंगदान जीवन संजीवनी अभियान” का आयोजन..
चिकित्सा विज्ञान का मानना है कि एक व्यक्ति द्वारा किया गया अंगदान आठ लोगों की जान बचा सकता है। जबकि ऊतक दान 75 लोगों के जीवन में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है।
इन प्रगतियों के बावजूद, प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों की संख्या और उपलब्ध अंगों के बीच एक बड़ा अंतर बना हुआ है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 2,00,000 मरीज लिवर फेलियर या लिवर कैंसर से मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
जिनमें से 10-15% को समय पर लिवर प्रत्यारोपण से बचाया जा सकता है। हालांकि, प्रतिवर्ष केवल लगभग 1,500 लिवर प्रत्यारोपण किए जाते हैं, जबकि अनुमानित आवश्यकता
25,000 से 30,000 की है। इसी प्रकार, प्रतिवर्ष लगभग 5,00,000 लोग हृदय विफलता से पीड़ित होते हैं। फिर भी प्रतिवर्ष केवल 10-15 हृदय प्रत्यारोपण ही किए जाते हैं।
SOTTO-UP: की उल्लेखनीय प्रगति..
उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण कार्यक्रम (National Organ Transplant Programme – NOTP) के अंतर्गत स्थापित स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO-U.P.) के माध्यम से अंगदान कार्यक्रम को सुदृढ़ बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।
राज्य में अंग प्रत्यारोपण एवं अंग प्राप्ति (रिट्रीवल) केन्द्रों के नेटवर्क का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। साथ ही जन-जागरूकता अभियान, स्वास्थ्यकर्मियों का क्षमता संवर्धन (प्रशिक्षण) तथा अंगदान संकल्प (प्लेज) अभियानों को भी व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके बावजूद, मृतक अंगदान की संख्या अभी भी वास्तविक आवश्यकता की तुलना में काफी कम है। यह स्थिति ब्रेन स्टेम मृत्यु की समयबद्ध पहचान, परिजनों की प्रभावी काउंसलिंग तथा समाज की सक्रिय सहभागिता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भारत ने वर्ष 2024 में 18,911 अंग प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक सम्पन्न किए। जिनमें से 3,403 प्रत्यारोपण मृतक अंगदाताओं से प्राप्त अंगों द्वारा किए गए।
इसके साथ ही भारत कुल अंग प्रत्यारोपण की संख्या के आधार पर विश्व में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। इसके अतिरिक्त, नोट्टो पोर्टल के माध्यम से 4.5 लाख से अधिक नागरिकों ने अंगदान का संकल्प लिया है, जो देश में अंगदान के प्रति बढ़ती जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं जीवन बचाने के संकल्प का प्रतीक है।
कार्यक्रम में इस बात पर भी बल दिया गया कि अंगदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि करुणा, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है।
जागरूकता वॉक, जन अभियानों और संकल्प अभियानों जैसी पहलों के माध्यम से, सोट्टो उत्तर प्रदेश एवं इसके सहयोगी संस्थान अंगदान से जुड़ी सूचित चर्चाओं को बढ़ावा देने तथा लोगों को अपने परिवारजनों के साथ
अपनी इच्छा साझा करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास करते हैं। आयोजकों ने नागरिकों से पुनः अपील की कि वे अंगदान के
बारे में जानें, भ्रांतियों को दूर करें, अपने परिवार के साथ अपने निर्णय पर चर्चा करें और अपने अंगों का संकल्प लेने के लिए आगे आएं। अधिक जागरूकता और पारिवारिक सहयोग यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे अधिक से अधिक मरीजों को जीवनरक्षक अंग प्राप्त हो सकें।
वॉकाथॉन प्रातः 06 बजे हजरतगंज चौराहे से प्रारंभ होकर एलन सॉली स्टोर तक गई और फिर वापस हजरतगंज चौराहे पर संपन्न हुई। जिसमें कुल 1.6 किलोमीटर की दूरी तय की गई।
कार्यक्रम को प्रो. शालीन कुमार, कार्यवाहक निदेशक, SGPGIMS, धीरेंद्र सिंह सचान, आईएएस, विशिष्ट सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश सरकार (विशिष्ट अतिथि), नीलम, आईएएस, अपर निदेशक, चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार (अतिथि)
तथा प्रो. आर. हर्षवर्धन, संयुक्त निदेशक, SOTTO-U.P. एवं प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, अस्पताल प्रशासन विभाग द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा पेशेवरों, छात्रों तथा आम जनता सहित प्रतिभागियों का पंजीकरण किया गया।
जिन्होंने वॉकाथॉन में भाग लिया। अंगदान एवं प्रत्यारोपण के मान्यता प्राप्त प्रतीक हरे रिबन को मानव श्रृंखला बनाकर कार्यक्रम के दौरान प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
वॉकाथॉन में विभिन्न सामाजिक एवं गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अंगदान के इस पुनीत अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विशेष रूप से, आलम्बन ट्रस्ट एसोसिएट्स, स्पर्श, स्पष्ट सोच फाउंडेशन, लायंस क्लब तथा इनर व्हील के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अंगदान के प्रति जन-जागरूकता फैलाने, समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने तथा अधिक से अधिक नागरिकों को मरणोपरांत अंग एवं ऊतक दान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
संस्थान के तत्वावधान में नवस्थापित स्टेट हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर (SHSRC) के अधिकारियों ने भी वॉकाथॉन में उपस्थित रहे । इस अवसर पर SHSRC के अधिकारियों ने भी अंगदान के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने तथा समाज में इस जीवनदायी अभियान को और अधिक व्यापक बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस कार्यक्रम ने अंगदान के महत्व को समझने वाले एक अधिक सूचित एवं संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में एक आंदोलन को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिन्हें अंगदान से जुड़े प्रभावशाली नारों से सुसज्जित टी-शर्ट और कैप प्रदान की गईं, जैसे “आप किसी के जीवन की खोई हुई कड़ी बन सकते हैं – अंगदाता के रूप में जीवन बचाएं” तथा “अंगदान -जीवनदान, जीवनदान महादान”, साथ ही जलपान की व्यवस्था भी की गई।
उपस्थित लोगों के लिए कार्यक्रम की यादें संजोने के लिए एक सेल्फी बूथ भी उपलब्ध कराया गया था। इस अवसर की शोभा प्रो. ज्ञान चंद, कार्यवाहक विभागाध्यक्ष, अस्पताल प्रशासन मौजूद रहे।
इस वॉकाथॉन का सुव्यवस्थित आयोजन संस्थान के अस्पताल प्रशासन विभाग की डॉ. क्रिस अग्रवाल, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. अक्षिता बंसल, डॉ. दीक्षा दुबे, डॉ. एकता यादव, डॉ. अर्पिता तिवारी, नीलिमा दीक्षित एवं भोलेश्वर पाठक के प्रयासों से,
प्रो. आरके धीमन, निदेशक, SGPGIMS एवं प्रो. आर. हर्षवर्धन, संयुक्त निदेशक, सोट्टो , उ.प्र. एवं अस्पताल प्रशासन विभागाध्यक्ष के मार्गदर्शन में किया गया।



