एसजीपीजीआईएमएस में मना 38वां स्थापना दिवस
38वें स्थापना दिवस पर एलुमनाई मीट एवं पैराथायरॉयड सर्जरी मास्टरक्लास

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में एलुमनाई मीट के आयोजन में देश दुनिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल रहे। रविवार को
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान एसजीपीजीआईएमएस के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग द्वारा विभाग के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर एलुमनाई मीट एवं पैराथायरॉयड सर्जरी मास्टरक्लास का एक दिवसीय भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में देश-विदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए प्रख्यात विशेषज्ञों, वरिष्ठ चिकित्सकों, विभाग के पूर्व एवं वर्तमान संकाय सदस्यों, प्रतिष्ठित एलुमनाई तथा अतिथियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में इंडियन सोसाइटी ऑफ थायरॉयड सर्जन्स के अध्यक्ष डॉ. कौस्तुभ पटेल, डॉ. दीपक श्रीन, डॉ. सौरभ अरोड़ा, डॉ. पी. अरुण सहित देश-विदेश से आए अनेक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ एवं विभाग के प्रमुख एलुमनाई उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों की सहभागिता ने कार्यक्रम को उच्च स्तरीय शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन रहे। इस अवसर पर संस्थान के अनेक सेवानिवृत्त प्रोफेसरों एवं वरिष्ठ चिकित्सकों की उपस्थिति रही।
उनकी उपस्थिति ने विभाग की गौरवशाली यात्रा, परंपरा और विरासत को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण 38वें स्थापना दिवस का फाउंडेशन डे ओरेशन रहा। जिसमें देश के प्रख्यात एंडोक्राइनोलॉजिस्ट एवं पद्म भूषण डॉ. अमरीश मित्तल ने संबोधित किया।
उन्होंने अपने व्याख्यान में “हाइपरपैराथायरॉयडिज्म के लक्षणों एवं उपचार के चार दशकों का विकास” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने पिछले चार दशकों में हाइपरपैराथायरॉयडिज्म की क्लिनिकल अभिव्यक्तियों, रोग की पहचान, आधुनिक जांच तकनीकों तथा उपचार के क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों और प्रगति को रेखांकित किया।
उनका व्याख्यान चिकित्सकों, शिक्षकों एवं युवा सर्जनों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा।
पैराथायरॉयड सर्जरी मास्टरक्लास में पैराथायरॉयड रोगों के आधुनिक निदान एवं शल्य चिकित्सा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवा सर्जनों एवं चिकित्सकों को आधुनिक पैराथायरॉयड सर्जरी की तकनीकों, व्यावहारिक अनुभव तथा जटिल मामलों के प्रबंधन से परिचित कराना था।
एलुमनाई मीट कार्यक्रम का एक विशेष एवं भावनात्मक हिस्सा रहा। जिसमें विभाग के विभिन्न बैचों के पूर्व छात्रों ने भाग लेकर अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा किया तथा विभाग और संस्थान के साथ अपने जुड़ाव को पुनः अनुभव किया।
एलुमनाई ने देश-विदेश में अपने व्यावसायिक योगदान और उपलब्धियों को साझा करते हुए वर्तमान पीढ़ी के चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
इस अवसर पर विभाग के पूर्व एवं वर्तमान संकाय सदस्यों के योगदान को भी स्मरण किया गया तथा विभाग की 38 वर्षों की शैक्षणिक, शोध एवं उत्कृष्ट रोगी सेवा की यात्रा को गौरव के साथ याद किया गया।
एक दिवसीय इस आयोजन ने ज्ञान, अनुभव, परंपरा और नई पीढ़ी की ऊर्जा को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
कार्यक्रम ने न केवल पैराथायरॉयड एवं एंडोक्राइन सर्जरी के क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया, बल्कि संस्थान की गौरवशाली अकादमिक विरासत और उसके एलुमनाई के साथ मजबूत संबंधों को भी और सुदृढ़ किया।



