डॉ मृदुल का ब्रिटिश थोरेसिक सोसाइटी ट्रैवल ग्रांट के लिए हुआ चयन
संस्थान कुलपति ने विभाग को दी बधाई

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। डॉ मृदुल त्रिपाठी का ब्रिटिश थोरेसिक सोसाइटी ट्रैवल ग्रांट के लिए चयन होने पर बधाइयो का सिलसिला शुरू हो गया। मंगलवार को
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के डॉ मृदुल त्रिपाठी (जूनियर रेज़िडेंट -तृतीय वर्ष) को ब्रिटिश थोरेसिक सोसाइटी ट्रैवल ग्रांट के लिए चयनित किया गया है।
यह सम्मान उन्हें 9वीं वार्षिक पैक्स 2026 अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में प्राप्त हुआ है। सांस के रोगों पर आधारित यह अंतराष्ट्रीय सम्मेलन हाल ही में नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ है।
जानें पैक्स श्वसन रोगों के क्षेत्र वार्षिक सम्मेलन के बारे में..
पैक्स श्वसन रोगों के क्षेत्र में देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक प्रतिष्ठित वार्षिक सम्मेलन है। इसमें पल्मोनरी मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, एलर्जी, अस्थमा, टीबी, स्लीप मेडिसिन और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी जैसे विषयों पर नवीनतम शोध, दिशा-निर्देश और तकनीकी प्रगति साझा की जाती है।
यह मंच युवा चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को अपने कार्य को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने और विशेषज्ञों से संवाद का अवसर प्रदान करता है। पैक्स 2026 में देश-विदेश से आये सैकड़ों शोध-पत्रों में से पाँच सर्वोच्च पुरस्कार अत्यंत प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं।
इनमें से सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार के रूप में ब्रिटिश थोरेसिक सोसाइटी (बीटीएस) ट्रैवल ग्रांट प्रदान किया जाता है। ट्रैवल ग्रांट एक वित्तीय सहायता है, जो शोधकर्ता या छात्र को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने और अपना शोध प्रस्तुत करने के लिए प्रदान की जाती है।
इसमें ब्रिटिश थोरेसिक सोसाइटी की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पंजीकरण, यात्रा तथा रहने आदि के लिए अनुदान पैक्स फाउंडेशन द्वारा डॉ मृदुल त्रिपाठी को प्रदान किया जायेगा। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नवम्बर 2027 में लंदन यूके में प्रस्तावित है।
डॉ मृदुल त्रिपाठी को यह उपलब्धि उनके शोध प्रस्तुतीकरण “हाइपरकैपनिक रेस्पिरेटरी फेलियर के साथ भर्ती मरीजों में नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन के फेल होने के लिए जिम्मेदार कारणों पर शोध” विषय पर उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदान की गई।
यह अध्ययन गंभीर सांस रोगियों के उपचार में नये दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है और गहन चिकित्सा के क्षेत्र में भविष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस उपलब्धि पर डॉ मृदुल त्रिपाठी ने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं है, बल्कि विभाग की सामूहिक मेहनत और टीमवर्क का प्रतीक है।
उन्होंने विभागाध्यक्ष प्रो सूर्यकान्त तथा विभाग के सभी चिकित्सा शिक्षको, सहकर्मी रेज़िडेंट्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का भी आभार व्यक्त किया। उनके सहयोग और समर्पण के बिना यह शोध संभव नहीं हो पाता।
इसी कान्फ्रेंस में विभाग के डॉ तुषार सरीन ने पैक्स 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आयोजित ’‘स्मार्टर माइंड्स कॉम्पटीशन’’ में ’’नॉर्थ जोन में प्रथम स्थान’’ प्राप्त कर रू 10,000 की पुरस्कार राशि हासिल की।
उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि ने सम्मेलन में उनकी प्रतिभा एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही, डॉ. तुषार सरीन ’’पोस्टर प्रेजेंटेशन’’ में भी विन्नर रहें।
उनके पोस्टर की गुणवत्ता एवं विषयवस्तु से प्रभावित होकर पैक्स 2026 के आयोजकों द्वारा उनके पोस्टर को ’’पैक्स जर्नल में प्रकाशित करने का अवसर’’ प्रदान किया गया है।
विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि यह उपलब्धि न केवल डॉ मृदुल त्रिपाठी एवं डॉ तुषार सरीन के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि संस्थान के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की शैक्षणिक उत्कृष्टता और रोगी देखभाल में निरंतर प्रगति का भी प्रतीक है।
वहीं संस्थान कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद ने भी डॉ मृदुल त्रिपाठी एवं डॉ तुषार सरीन और विभाग को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।
डॉ सूर्यकान्त ने यह भी बताया कि इससे पूर्व भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए ट्रैवल ग्रांट विभाग के अन्य प्रतिभाशाली युवा चिकित्सकों एवं शोधकर्ताओं जैसे ’’डॉ अंकित भाटिया,
डॉ आनंद कुमार मौर्य, डॉ रजनीकांत शुक्ला, डॉ अभिषेक दुबे तथा डॉ सीमा सिंह एवं पिछले वर्ष ही डा शुभम शुक्ला’’ को प्रदान की जा चुकी है। यह परंपरा विभाग की समृद्ध शैक्षणिक संस्कृति और निरंतर शोध उत्कृष्टता को दर्शाती है।
जहाँ से लगातार युवा चिकित्सक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। ज्ञात रहे कि पिछले 15 वर्षों से डा सूर्यकान्त विभागाध्यक्ष हैं और उनके नेतृत्व से विभाग को अंतराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
20 से ज्यादा जूनियर डॉक्टर्स चिकित्सा शिक्षक बने हैं तथा 10 से अधिक एमडी उत्तीर्ण छात्रों को डीएम पल्मोनरी मेडिसिन में प्रवेश मिला है।



