डॉक्टरों ने 35 वर्षीय अविवाहित युवती के पेट से निकाला विशाल अंडाशय ट्यूमर
चिकित्सकों ने गर्भाशय को सुरक्षित रख कर की जरुरी सर्जरी

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टरों ने 35 वर्षीय अविवाहित युवती के पेट से विशाल अंडाशय ट्यूमर निकालकर नई जिंदगी प्रदान की है। गुरुवार को
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के स्त्री रोग विशेषज्ञों ने 35 वर्षीय अविवाहित युवती की जटिल सर्जरी कर उसके बाएं अंडाशय से 28.7 × 20.4 × 15.8 सेमी आकार का विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। ट्यूमर के भीतर से लगभग 7.5 लीटर तरल पदार्थ भी निकाला गया।
मरीज को पिछले कई महीनों से पेट फूलने, पेट में भारीपन तथा सांस लेने में कठिनाई की शिकायत थी। जांच के दौरान पता चला कि उसके बाएं अंडाशय में लगभग 9 माह की गर्भावस्था के आकार के बराबर विशाल ट्यूमर विकसित हो गया था।
ट्यूमर इतना बड़ा हो चुका था कि वह मूत्राशय और आंतों पर दबाव डाल रहा था। जिसके कारण मरीज को चलने-फिरने और सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। इसके अलावा
सर्जरी के दौरान दाहिने अंडाशय में भी 6.5 × 3.8 × 6.5 सेमी आकार की एक सिस्ट पाई गई। चूंकि ऑपरेशन के दौरान फ्रोजन सेक्शन की सुविधा उपलब्ध थी। इसलिए ट्यूमर का नमूना तत्काल जांच के लिए भेजा गया।
फ्रोजन सेक्शन की रिपोर्ट में ट्यूमर को Benign पाया गया। इसके आधार पर चिकित्सकों ने दाहिने अंडाशय और गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए केवल आवश्यक सर्जरी की। इससे मरीज की भविष्य में प्रजनन क्षमता को संरक्षित रखने की संभावना बनी रही।
इस जटिल सर्जरी को स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न किया। सर्जिकल टीम में डॉ. निधि सिंह, डॉ. अंजू रानी, डॉ. मोनिका एवं डॉ. शिखा शामिल रहीं।
एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. निधि ने संभाली। पैथोलॉजी जांच में डॉ. ऋतु वर्मा एवं डॉ. राम नवल राव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नर्सिंग टीम में दिव्या, सोनाली, वंदना एवं बीरभान वर्मा शामिल रहे।
डॉ. निधि सिंह ने बताया कि अंडाशय के ट्यूमर कई बार शुरुआती अवस्था में स्पष्ट लक्षण नहीं देते और धीरे-धीरे काफी बड़े हो सकते हैं। इस मरीज में भी कई महीनों तक पेट फूलने और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण बने रहे। समय पर जांच न होने के कारण ट्यूमर काफी बड़ा हो गया और आसपास के अंगों पर दबाव डालने लगा।
उन्होंने कहा कि लगातार पेट फूलना, पेट में असामान्य भारीपन या बढ़ता हुआ पेट, जल्दी पेट भरना, पेशाब या मल त्याग में परेशानी तथा सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण है। संस्थान की टीम ने इस सफल सर्जरी को जटिल परिस्थितियों में मरीज की सुरक्षा के साथ-साथ उसकी भविष्य की प्रजनन क्षमता को ध्यान में रखते हुए uterus प्रेजर्वेशन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।



