दुर्गा देवी काठामो पूजा के उपलक्ष्य में सितार वादन
रामकृष्ण मठ ने कलाकारों को किया सम्मानित

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। दुर्गा देवी के काठामो पूजा के उपलक्ष्य में सितार वादन की प्रस्तुति दी गयी।
शनिवार को निराला नगर राम कृष्ण मठ स्थित ठाकुर जी की संध्या आरती के उपरान्त दुर्गा देवी के काठामो पूजा के उपलक्ष्य में भव्य सितार वादन कार्यक्रम का आयोजित किया गया।
वहीं कार्यक्रम की शुरुआत मठ अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा कलाकारों के परिचय एवं श्रद्धालुओं के स्वागत साथ किया।
इस अवसर पर कोलकाता के सुप्रसिद्ध सितार वादक पार्थ प्रतिम राय ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति दी और सुप्रसिद्ध तबला वादक पार्थ प्रतिम मुखर्जी ने तबले पर सुमधुर संगत की।
श्री राय ने राग रागेश्री की प्रस्तुति देते हुए आलाप, जोड़, झाला तथा दो बंदिशें प्रस्तुत कीं। पहली विलंबित गत पंडित निखिल बनर्जी द्वारा रचित थी तथा दूसरी द्रुत तीनताल में प्रस्तुत की गई। कलाकारों की साधनापूर्ण प्रस्तुति से सभागार में उपस्थित सभी श्रद्धालु एवं संगीतप्रेमी मंत्रमुग्ध हो गए। ज्ञात हो कि
पार्थ प्रतिम राय देश के प्रतिष्ठित सितार वादकों एवं संगीतकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने पंडित देवीप्रसाद चटर्जी से सितार की प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की तथा मैहर घराने के विख्यात आचार्यों स्वर्गीय पंडित निहारबिंदु चौधरी एवं संगीताचार्य अजय सिन्हा राय से संगीत की उच्च शिक्षा ग्रहण की।
इसके अतिरिक्त उन्होंने पंडित अनिल पालित, पंडित पार्थ चटर्जी, संगीताचार्य भूपतिनाथ मुखर्जी सहित अनेक प्रतिष्ठित संगीतज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त किया है।
वे एक सफल एकल कलाकार होने के साथ-साथ संगीतकार भी हैं तथा फ्यूजन संगीत के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनकी अनेक संगीत प्रस्तुतियाँ और एल्बम देश-विदेश में प्रकाशित एवं प्रसारित हो चुके हैं।
वे सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (सीसीआरटी), नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल सरकार, स्पिक मैके, पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (ईज़ेडसीसी), इंडियन परफॉर्मिंग राइट्स सोसाइटी (आईपीआरएस) तथा आकाशवाणी एवं दूरदर्शन* से भी संबद्ध हैं।
तबला वादक पार्थ प्रतिम मुखर्जी ने अपने बड़े भाई आशीष कुमार मुखर्जी, पंडित पवन वरदोलोई, खलीफा स्वर्गीय उस्ताद आफ़ाक हुसैन ख़ाँ साहब तथा उस्ताद इल्मास हुसैन ख़ाँ से तबला वादन की शिक्षा प्राप्त की।
उन्होंने भारत के प्रमुख संगीत समारोहों के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, फिलीपींस, सिंगापुर, मलेशिया एवं इंडोनेशिया सहित अनेक देशों में अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं।
उन्हें तालमणि सम्मान, अवध सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। वे दो वर्षों से अधिक समय तक भारतीय उच्चायोग, जकार्ता (इंडोनेशिया) में तबला शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा वर्तमान में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के कथक केंद्र में कार्यरत हैं।
कार्यक्रम के समापन पर स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने दोनों कलाकारों को अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न तथा मठ द्वारा प्रकाशित दीवार एवं टेबल कैलेंडर भेंट कर सम्मानित किया।



