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स्वस्थ मां ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला – डॉ एनबी सिंह 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित मातृत्व को किया पोषण वितरण

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी गर्भवती महिलाओं को पोषण बांटा गया। मंगलवार को

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के क्रियान्वयन के 10 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिल्वर जुबली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। साथ ही स्वास्थ्य केंद्र पर उपस्थित गर्भवती महिलाओं को फल, गुड़ एवं चना वितरित किया गया। वहीं

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। प्रदेश सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने बताया कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत की गई थी। इसके तहत गर्भावस्था की दूसरी एवं तीसरी तिमाही की महिलाओं की प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) की जाती है।

साथ ही उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) की समय रहते पहचान कर उनका समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है।

डॉ. सिंह ने बताया कि प्रारंभ में यह अभियान प्रत्येक माह की 9 तारीख को आयोजित किया जाता था। फिर भी गर्भवती महिलाओं को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अब 1, 9, 16 और 24 तारीख को भी विशेष जांच दिवस आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस वर्ष अभियान की थीम ‘पीएमएसएमए के 10 वर्ष सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माताएं एवं सशक्त भारत’ रखी गई है, जो इसके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

पिछले एक दशक में इस अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच, समय पर जोखिमों की पहचान तथा आवश्यक चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध कराया गया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में जनपद में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत लगभग

4.54 लाख गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) की गई। इस दौरान 78,149 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की पहचान कर उनका समयबद्ध एवं समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया गया।

इसी अवधि में 2.31 लाख गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच, 1.88 लाख की ब्लड ग्रुप जांच तथा 1.92 लाख की पेशाब की जांच की गई। इसके अलावा 1.23 लाख गर्भवतियों की जेस्टेशनल डायबिटीज की

जांच, लगभग 97 हजार की हेपेटाइटिस जांच तथा करीब 90 हजार महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कराया गया। इन जांचों के माध्यम से गर्भावस्था से जुड़ी संभावित जटिलताओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित किया गया।

डॉ. सिंह ने सभी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों से नियमित प्रसवपूर्व जांच कराने, चिकित्सकीय सलाह का पालन करने तथा संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने की अपील की, ताकि सुरक्षित मातृत्व के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद की सभी शहरी एवं ग्रामीण सीएचसी, पीएचसी, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर भी पीएमएसएमए दिवस आयोजित किया गया है।

इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमएच सिद्दीकी, उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत निर्वाण, चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. प्रियंका यादव, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी योगेश रघुवंशी, अस्पताल स्वास्थ्य कर्मी एवं लाभार्थी उपस्थित रहे।

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