आयुर्वेद, यूनानी होम्योपैथिक तबादला पर डीजी आयुष ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
बिना डीजी आयुष की अनुमति से तीनों शाखाओं में करीब 780 कार्मिक हुए इधर से उधर

कनिष्ठ सहायक ने स्थानांतरण नीति को दिखाया ठेंगा
लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। प्रदेश की स्थानांतरण नीति में हुए धांधली के पन्ने खुलने लगे हैं।
आयुष विभाग की तीनों शाखाओं में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक विभाग में कार्मिकों की डीजी आयुष की अनुमति बगैर धड़ल्ले से तबादला कर दिया गया।
जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर तेज हो गयी है। जिसमें डीजी आयुष चैत्रा वी. ने मुख्य सचिव उप्र एसपी गोयल को पत्र लिखकर तीनो शाखाओं में समूह ख व ग 780 कार्मिकों की तबादला पर सवाल उठाते हुए तबादला रद्द करने की मांग की है।
जिसमें डीजी आयुष द्वारा जारी पत्र में आयुर्वेद निदेशक डॉक्टर नारायण दास ने समूह ख व ग के 400 तबादले कर दिए और होम्योपैथिक निदेशक डॉक्टर प्रमोद सिंह ने 130 कार्मिकों का तबादला कर दिया है। इसके अलावा यूनानी निदेशक प्रोफेसर जमाल अख्तर ने 50 से अधिक कार्मिकों के तबादले किये हैं।
जारी पत्र में डीजे आयुष ने कई सवाल उठाते हुए 15 मार्च 2024 का हवाला देते हुए मुख्य सचिव को तीनों शाखाओ के वित्त नियंत्रक होते हैं उनसे कोई विचार विमर्श नहीं किया गया। जिसमें डीजी आयुष से बिना अनुमति के ही तबादला कर दिया गया है।
वहीं सूत्रों की माने तो आयुष की तीनों शाखाओं जिन डॉक्टरों पर वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ी के आरोप लगे उन्हे तबादला नहीं किया गया। सूत्रों का कहना है कि यूनानी विभाग में पहले बड़ा खेल चल रहा है।
जिस पर गड़बड़ी के आरोप लगते हैं उन्हें बचा लिया जाता या यूँ कहें लेनदेन करके उन्हें कमाऊ वाली जगहों पर नियुक्ति दे दी जाती है।
यूनानी अस्पताल में कनिष्क सहायक ने स्थानांतरण नीति को दिखाया ठेंगा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते वर्ष स्थानांतरण नीति के तहत कनिष्ठ सहायक फैसल हमीद का 2025 में लखनऊ तकमिल उत्तीब यूनानी अस्पताल औरंगाबाद से प्रयागराज यूनानी मेडिकल ट्रांसफर किया गया।
जहाँ यह ट्रांसफर सिर्फ कागज पर हुआ जबकि दो महीने यह कनिष्ठ सहायक फैसल हमीद मेडिकल लगाकर लखनऊ सम्बद्ध करा लिया और यही ड्यूटी करता रहा।
इसके बाद सम्बंधित अधिकारियो द्वारा गुपचुप तरीके से यूनानी अस्पताल के लिए तबादला कर नियुक्ति दे गयी और उच्च अधिकारियो को भनक नहीं लगी है? जिसमें उच्च अधिकारियो की मिली भगत के चलते स्थानांतरण नीति को दरकिनार करके नियमों को अनदेखा कर दिया गया है।
सूत्रों का दावा है कि स्थानांतरण नीति उस पर लागू की जाती है जो वसूली से बाहर है । वैसे भी अब तो स्थानांतरण नीति की समय सीमा भी ख़त्म हो गयी है। इस विभाग में तीन वर्षो से अधिक समय से एक ही पद पर जमे हुए हैं अनेकों अधिकारी डॉक्टर कर्मचारी हैं उन्हें कोई भी इधर से उधर नहीं कर सका हैं।
ऐसे में क्या स्थानांतरण नीति वसूली का जरिया हो गया है या विभाग की कार्यशैली को सुधारने के लिए यह स्थानांतरण नीति व्यवस्था बनाई गई थी। ऐसे कई सवाल हैं जो लोगों में चर्चा का विषय है।



