परिवहन निगम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगी लैस
बसों के रखरखाव, सर्विसिंग, मरम्मत तथा चालकों-परिचालकों की ड्यूटी का होगा डिजिटल प्रबंधन

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम एआई तकनिकि से लैस होगी। बुधवार को
उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को नई तकनीक से जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिपो प्रबंधन एवं बस संचालन नियोजन प्रणाली लागू करने की महत्वपूर्ण पहल की गई है।
लगभग ₹30 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के लिए निविदा आमंत्रित की गई है। यह परियोजना भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम योजना के अंतर्गत प्रस्तावित है।
परिवहन मंत्री ने बताया कि इससे पूरे प्रदेश की बस सेवाओं का एकीकृत एवं वैज्ञानिक नियोजन होगा। उन्होंने बताया कि परिवहन निगम वर्तमान में अपने 120 डिपो के माध्यम से लगभग 14,300 बसों का संचालन करता है। जिनसे प्रतिदिन 17 लाख से अधिक यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
इस नई प्रणाली के माध्यम से सभी डिपो की समय-सारिणियों को एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समन्वित किया जाएगा। एआई तकनीक यात्रियों की मांग, मार्गों की उपयोगिता, यात्रा के समय एवं उपलब्ध बसों का विश्लेषण कर प्रत्येक मार्ग पर बसों की उचित संख्या एवं आदर्श फ्रीक्वेंसी निर्धारित करने में सहायता करेगी।
उदाहरण के लिए, किसी मार्ग पर यात्रियों की मांग के अनुसार हर 15 मिनट पर बस की आवश्यकता होने पर अलग-अलग डिपो की बसों का समय इस प्रकार समन्वित किया जा सकेगा कि यात्रियों को नियमित अंतराल पर सेवाएं उपलब्ध हों।
परिवहन मंत्री ने बताया कि इससे विभिन्न डिपो की बसों का आपसी समन्वय बढ़ेगा तथा पूरे प्रदेश में उपलब्ध बसों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा।
एआई से प्रमुख लाभ..
परिवहन मंत्री ने बताया कि इस परियोजना से अधिक नियमित बस सेवाएं,यात्रियों की मांग के अनुसार उचित अंतराल पर बसों का संचालन, जिससे प्रतीक्षा समय कम करने में सहायता मिलेगी।
यात्री संख्या में वृद्धि होगी और बेहतर फ्रीक्वेंसी एवं विश्वसनीय सेवाओं से अधिक यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की ओर आकर्षित किया जा सकेगा। यात्रियों की आवश्यकता एवं यात्रा के रुझानों के आधार पर बसों की संख्या, मार्ग एवं समय-सारिणी का वैज्ञानिक निर्धारण होगा।
बसों की यात्री क्षमता के बेहतर उपयोग एवं यात्री संख्या में वृद्धि से निगम की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी। बसों, ईंधन एवं मानव संसाधन का अधिकतम उपयोग कर संचालन लागत को अनुकूलित किया जा सकेगा। बसों के रखरखाव, सर्विसिंग, मरम्मत तथा चालकों-परिचालकों की ड्यूटी का डिजिटल प्रबंधन होगा।
मुख्यालय एवं क्षेत्रीय स्तर से बसों के संचालन एवं डिपो के प्रदर्शन की केंद्रीकृत निगरानी की जा सकेगी।
परिवहन मंत्री ने बताया कि यह परियोजना परिवहन निगम की डिजिटल परिवर्तन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। प्रदेश के सभी डिपो की बस सेवाओं का एकीकृत नियोजन, बेहतर फ्रीक्वेंसी और मांग आधारित संचालन निगम की कार्यक्षमता को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
इससे एक ओर यात्रियों को अधिक सुविधाजनक एवं विश्वसनीय सेवाएं मिलेंगी, वहीं दूसरी ओर बसों के बेहतर उपयोग, यात्री संख्या में वृद्धि तथा परिचालन दक्षता से निगम का राजस्व बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
परिवहन निगम की बढ़ी हुई आय एवं परिचालन बचत का उपयोग यात्रियों को और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में किया जा सकेगा। इस प्रकार यह पहल बेहतर यात्री सुविधाओं, अधिक यात्री संख्या और बढ़ते राजस्व का एक सकारात्मक चक्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।



