नेत्रदान के लिए 4-6 घंटे से अधिक का समय नहीं होना चाहिए – डॉ राकेश कुमार
नेत्रदान करने को चला जागरूकता अभियान

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। नेत्रदान करने के लिए जागरूकता अभियान के साथ जानकारी साझा की गयी।
सोमवार को गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के नेत्र विभाग में मरीजों और आमजन मानस को नेत्रदान करने के लिए जागरूक किया गया।
जिसमें डॉ कृष्णा कुलदीप गुप्ता विभागाध्यक्ष ,डॉ नंदिता चतुर्वेदी , और कॉर्निया यूनिट की इंचार्ज डॉ शैली राज ने मरीजों और अन्य लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 5 सितम्बर तक अखिल भारतीय स्तर पर मनाया जा रहा है। वहीं डॉ नंदिता ने बताया की कॉर्निया प्रत्यारोपण को कभी-कभी नेत्र प्रत्यारोपण के रूप में भी जाना जाता है, एक ऐसी सर्जरी होती है।
जिसमें एक दाता से एक स्वस्थ कॉर्निया का उपयोग क्षतिग्रस्त या संक्रमित कॉर्निया को बदलने के लिए किया जाता है।
इस प्रक्रिया का चिकित्सा नाम केर्टोप्लास्टी है। उन्होंने बताया इस प्रक्रिया के दौरान रोगग्रस्त या क्षतिग्रस्त कॉर्निया को बदलने के लिए दाता कॉर्निया का उपयोग किया जाता है, और फिर इसे कॉर्निया प्राप्तकर्ता की आँखों पर सिल दिया जाता है।
डॉ शैली राज ने बताया की नेत्रदान या कार्निया दान करने की प्रक्रिया सरल है। कॉर्निया डोनर आमतौर पर मरने के बाद आंखें दान करने का संकल्प लेता है।
यह एक दाता कार्ड भरकर, एक नेत्र बैंक की वेबसाइट पर ऑनलाइन साइन अप करके, एक गैर-लाभकारी संगठन के माध्यम से किया जा सकता है, जो एक नेत्र बैंक चलाता है, या केवल परिवार के सदस्यों को बताता है कि वे क्या पसंद करते हैं।
नेत्रदाता के इरादे को पूरा करने के लिए, दाता के परिवार के साथ इस विकल्प पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है।
दाता के गुजर जाने के छह घंटे के भीतर, ऊतक दान हो जाना चाहिए और फिर कॉर्निया को निकाला जाता है और एक नेत्र बैंक में ले जाया जाता है। जिसे प्रत्यारोपण में इस्तेमाल करने से पहले संसाधित किया जाएगा। साथ ही
डॉ कृष्णा कुलदीप गुप्ता विभागाध्यक्ष नेत्र विभाग ने बतया की यदि आपके परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है और उनकी आँखों का दान करना चाहते हैं, इन निर्देशों का पालन करना होगा।
👉 मृत्यु के बाद आँखों को सूखने से बचाने के लिए पंखा/एयर कंडीशनर बंद कर दें।
👉 डोनर की पलकें बंद रखें और आंखों पर टॉवल रखें।
👉 जितनी जल्दी हो सके, निकटतम नेत्र बैंक को कॉल करें।
👉 मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र संभाल कर रखें।
वहीं जिंम्स के निदेशक डॉ ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने बताया की नेत्रदान एक ऐसा नेक कार्य है जो नेत्रहीनों की दृष्टि वापस पाने में मदद कर सकता है। दुर्भाग्य से, कॉर्निया की भारी कमी है और आपूर्ति और मांग के बीच भारी असंतुलन है। ऐसे में नेत्रदान के प्रति जागरूकता पैदा करना जरूरी हो जाता है।
नेत्र विभाग के फैकल्टी चिकित्सको के द्वारा नेत्रदान के बारे में तथ्यों को लोंगो को बता कर जागरूक किया गया एवं उनके द्वारा पूछे गए प्रश्नो का उत्तर दिया गया। नेत्रदान में केवल कॉर्निया का दान और प्रत्यारोपण करना शामिल है, न कि पूरी आंख का।
मृत्यु के बाद नेत्रदान – यदि कोई व्यक्ति जीवित रहते हुए नेत्रदान करना चाहता है तो नेत्रदान संभव नहीं है। मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए 4-6 घंटे से अधिक का समय नहीं होना चाहिए। कॉर्निया डोनर को आई बैंक तक ले जाने की जरूरत नहीं है। निकटतम नेत्र बैंक के प्रतिनिधि दाता के आवास पर आएंगे।
डॉ कृष्णा कुलदीप गुप्ता विभागाध्यक्ष नेत्र विभाग ने बतया की नेत्रदान के बारे में प्रचलित मिथकों में से एक यह है कि यह अंतिम संस्कार की योजनाओं को प्रभावित करता है और दाता के चेहरे को विकृत कर देता है।
यह हर तरह से असत्य है। आँख दान करने के सरल कार्य का दाता की उपस्थिति या अंतिम संस्कार की योजनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। क्योंकि आँख निकालने में 15-20 मिनट लगते हैं।
दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की पहचान गुप्त रखी जाती है। प्रत्येक व्यक्ति से दो व्यक्ति दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं।
डॉ शैली राज ने बताया यदि रोगी में निम्न स्थितियां पाई जाती हैं तो कॉर्निया दान नहीं किया जा सकता है।
जिसमें एचआईवी या एड्स, सक्रिय वायरल हेपेटाइटिस, सेप्टिसीमिया (रक्तप्रवाह में संक्रमण), सक्रिय रक्त कैंसर या रक्त कैंसर का चिकित्सा इतिहास, कोई अन्य सक्रिय संचारी रोग या संक्रामक रोग, मौत का कारण अज्ञात है।



