जटिल शल्य प्रक्रियाओं में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका अहम -प्रो एमएलबी भट्ट
कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में मना विश्व एनेस्थीसिया दिवस

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। विश्व एनेस्थीसिया दिवस मनाया गया। शनिवार को कल्याण सिंह अति विशिष्ट कैंसर संस्थान में “विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर एनेस्थीसियोलॉजी विभाग द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिसका उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा में एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका, रोगी सुरक्षा, शल्य चिकित्सा से पूर्व एवं पश्चात की देखभाल तथा सफल शल्य प्रक्रियाओं के संचालन में इसके योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रो एमएलबी भट्ट, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता एवं डॉ. अभिषेक कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
संस्थान के निदेशक प्रो एमएलबी भट्ट ने आधुनिक चिकित्सा पद्धति में एनेस्थीसिया की अपरिहार्य भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि शल्य चिकित्सा के दौरान रोगी की सुरक्षा सुनिश्चित करने, शरीर की महत्वपूर्ण क्रियाओं को स्थिर बनाए रखने, आपातकालीन परिस्थितियों का प्रबंधन करने तथा जटिल शल्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने ऑपरेशन थिएटर के सुचारु संचालन तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदान करने में एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के महत्वपूर्ण योगदान की भी सराहना की।
कार्यक्रम का आयोजन एनेस्थीसियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद आसिम रशीद के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. इंदुबाला मौर्य, डॉ. रुचि सक्सेना, डॉ. अर्चना, डॉ. ऋचा राय, डॉ. नम्रता एवं डॉ. शगुफ्ता मौजूद रही।
विभाग के सभी संकाय सदस्यों एवं आयोजन टीम के सामूहिक प्रयासों से कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक, रोचक एवं यादगार बनाया गया।
वहीं संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वरुण विजय, कार्यकारी कुलसचिव डॉ. आयुष लोहिया तथा डीन डॉ. प्रमोद गुप्ता शामिल रहे। साथ ही
कार्यक्रम के अंतर्गत पैरामेडिकल कर्मियों के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करना तथा हृदय गति रुकने जैसी जीवन-घातक स्थितियों से निपटने के लिए कर्मियों को तैयार करना था।
इस पहल के माध्यम से आपातकाल की समय पर पहचान, तत्काल प्राथमिक सहायता एवं शीघ्र पुनर्जीवन प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित किया गया। इसी क्रम में रंगोली प्रतियोगिता एवं ई-पोस्टर प्रस्तुति का भी आयोजन किया गया।
इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने, अकादमिक विचारों का आदान-प्रदान करने तथा एनेस्थीसिया के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिला।
इन प्रतियोगिताओं ने इस चिकित्सा विशेषज्ञता के वैज्ञानिक, शैक्षणिक एवं मानवीय पक्षों को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का समापन सकारात्मक वातावरण में हुआ। संस्थान द्वारा एनेस्थीसिया चिकित्सा पद्धति को और अधिक उन्नत बनाने, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी को सुदृढ़ करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा एवं उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।



