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सीएसआईआर के पास देश की विशाल बौद्धिक संपदा का भंडार – डॉ जबीर अहमद 

सीएसआईआर का मना 85वाँ स्थापना दिवस 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में सीएसआईआर की उपलब्धियों को बताया गया। बुधवार को राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में 85वाँ सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया।

यह समारोह वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की स्थापना की गौरवशाली यात्रा का स्मरण करने तथा अनुसंधान, नवाचार एवं राष्ट्र निर्माण में सीएसआईआर के वैज्ञानिक एवं तकनीकी समुदाय के योगदान को रेखांकित करने का अवसर रहा।

समारोह में डॉ. कणाद दास, निदेशक, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक, शोधार्थी, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारी तथा संस्थान परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। वहीं संस्थान

डॉ ज़बीर अहमद ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि तथा संस्थान के सभी सदस्यों का स्वागत किया।

उन्होंने सीएसआईआर स्थापना दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ करने में सीएसआईआर की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने बताया कि सीएसआईआर के अंतर्गत 37 संस्थान, 39 आउटरीच केंद्र, एक इनोवेशन कॉम्प्लेक्स तथा 5 इकाइयाँ कार्यरत हैं।

उन्होंने कहा कि सीएसआईआर के पास देश की विशाल बौद्धिक संपदा का भंडार है। जिसमें लगभग 3,200 सक्रिय पेटेंट तथा 900 से अधिक व्यावसायीकृत प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।

उन्होंने वनस्पति विज्ञान के मूलभूत अनुसंधान, पादप संरक्षण, मजबूत औद्योगिक जुड़ाव के साथ नवाचार तथा समाजोपयोगी विज्ञान-आधारित समाधानों के विकास में सीएसआईआर-एनबीआरआई के योगदान पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. शरद के. श्रीवास्तव, वैज्ञानिक ने कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया तथा मुख्य अतिथि का परिचय कराया।

समारोह को संबोधित करते हुए कणाद दास ने स्थापना दिवस के अवसर पर संपूर्ण सीएसआईआर परिवार को बधाई दी।

अपने संबोधन में उन्होंने कवकों की समृद्ध विविधता तथा उनके वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिक महत्व पर चर्चा की और सूक्ष्मजीवी एवं जैव विविधता के व्यापक अन्वेषण, दस्तावेजीकरण तथा अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अध्ययन पारिस्थितिक तंत्रों और जैव विविधता की बेहतर समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. दास ने संस्थान के वनस्पति उद्यान की विशेष सराहना की। उन्होंने पादप विविधता के संरक्षण, प्रदर्शन एवं जन-जागरूकता के क्षेत्र में वनस्पति उद्यान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने संस्थान के हर्बेरियम की भी सराहना करते हुए इसे प्रलेखित पादप नमूनों एवं वैज्ञानिक जानकारी का महत्वपूर्ण भंडार बताया।

उन्होंने संस्थान में प्रदर्शित वनस्पति संपदा, अनुसंधान गतिविधियों एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों की प्रदर्शनी की भी प्रशंसा की और कहा कि इस प्रकार के प्रदर्शन वैज्ञानिक अनुसंधान को विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा आम जनता से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य अतिथि ने चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बधाई दी तथा उनकी रचनात्मकता, उत्साह एवं सहभागिता की सराहना की।

उन्होंने वैज्ञानिक जागरूकता एवं जनसहभागिता को बढ़ावा देने के लिए संस्थान के प्रयासों की प्रशंसा की तथा संस्थान को जैव विविधता अनुसंधान, संरक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण एवं ज्ञान के प्रसार के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

संस्थान से पिछले वर्ष सेवानिवृत्त हुए नौ कर्मचारियों तथा 25 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले आठ कर्मचारियों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्हें उनके बहुमूल्य योगदान, प्रतिबद्धता एवं संस्थान के साथ दीर्घकालीन जुड़ाव के लिए सम्मानित किया गया।

स्थापना दिवस के अंतर्गत आयोजित चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी समारोह में सम्मानित किया गया। विजेताओं को उनकी रचनात्मकता, उत्साह एवं सक्रिय सहभागिता के लिए पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

समारोह के दौरान AcSIR के शोधार्थी दिलीप कुमार मौर्य एवं मोनालिसा को भी सम्मानित किया गया। उनकी कलाकृतियों का चयन 25 सितंबर को नई दिल्ली के NASC कॉम्प्लेक्स में आयोजित स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित प्रतिष्ठित ‘साइ-आर्ट प्रदर्शनी’ के लिए किया गया था।

दिलीप कुमार मौर्य की कलाकृति “नोबेल Laureate डॉ . जेनीफर Doudna: द फेस ऑफ़ Genome एडिटिंग ” तथा मोनालिसा की कलाकृति “एक्सप्रेशन ” का चयन राष्ट्रीय स्तर की इस प्रदर्शनी के लिए किया गया।

यह उपलब्धि संस्थान के लिए गौरव का विषय रही तथा इसने संस्थान के शोधार्थियों की रचनात्मक एवं कलात्मक प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया। यह उपलब्धि विज्ञान एवं कला के प्रेरक समन्वय को भी दर्शाती है।

मुख्य अतिथि ने संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से संवाद भी किया तथा वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में संस्थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधान एवं सीएसआईआर के व्यापक वैज्ञानिक उद्देश्यों में संस्थान के योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में डॉ एसवी सावंत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, निदेशक, अतिथियों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों तथा समारोह के आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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