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मोटे व्यक्तियों में स्लीप एपनिया होने की संभावना अधिक – प्रो सीएम सिंह 

स्लीप एपनिया के बढ़ते बोझ पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। स्लीप एपनिया बीमारी के बढ़ते ग्राफ को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की। शनिवार को

विश्व स्लीप डे पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग द्वारा “ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया एवं पॉलिसोमनोग्राफी” विषय पर एक सीएमई एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का आयोजन नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज यूपी चैप्टर, इंडियन चेस्ट सोसाइटी यूपी चैप्टर तथा स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड ब्रीदिंग डिसऑर्डर्स सोसाइटी के तत्वावधान में किया गया। वहीं

कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में किया गया। उन्होंने मोटापे और स्लीप एपनिया के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लगभग 70–80% मरीज मोटापे से ग्रस्त होते हैं और लगभग 90% मोटे व्यक्तियों में यह बीमारी हो सकती है।

जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मामलों का निदान नहीं हो पाता। उन्होंने इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम के आयोजन के लिए पल्मोनरी मेडिसिन विभाग को बधाई दी।

पद्मश्री प्रो. राजेन्द्र प्रसाद तथा प्रो. सूर्यकांत, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, KGMU, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत में स्लीप एपनिया की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में इस बीमारी की घटनाओं और प्रसार में काफी वृद्धि हुई है,बल्कि आम जनता में इसकी जानकारी अभी भी सीमित है।

वहीं प्रो. सूर्यकांत ने कहा कि जोर से खर्राटे आना, दिन में अत्यधिक नींद आना और नींद के दौरान सांस रुकना स्लीप एपनिया के महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हैं। समय पर पहचान और उपचार से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. अजय कुमार वर्मा, विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी मेडिसिन के स्वागत संबोधन एवं परिचयात्मक व्याख्यान से हुई। जिसमें उन्होंने बताया कि आज के समय में अच्छी नींद को हृदय स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।

डॉ. विभा गंगवार ने स्वास्थ्य के लिए नींद के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. अनिल कुमार सिंह (चंदन हॉस्पिटल) ने स्लीप एपनिया के सही निदान और स्लीप स्टडी रिपोर्ट को समझने और पढ़ने की विधि के बारे में बताया। डॉ. हेमंत कुमार ने इसके उपचार में PAP थेरेपी और दवाओं की भूमिका पर चर्चा की।

डॉ. आशीष झा (कार्डियोलॉजी विभाग ने स्लीप एपनिया के हृदय रोग और अन्य बीमारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाया। प्रो. सारिका गुप्ता (KGMU) ने कहा कि बच्चों में खर्राटों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनमें भी स्लीप एपनिया हो सकता है और समय पर निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. देवेंद्र चोपड़ा (प्रोस्थोडॉन्टिक्स, सरस्वती डेंटल कॉलेज) ने स्लीप एपनिया के उपचार में डेंटल उपकरणों तथा चयनित शल्य चिकित्सा की भूमिका पर चर्चा की।

कार्यक्रम में अन्य प्रमुख विशेषज्ञों में प्रो. केबी गुप्ता (पूर्व विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, PGI रोहतक), प्रो. वेद प्रकाश (विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन, KGMU), प्रो. श्वेता कंचन (हिंद इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज), डॉ. ज्योति बाजपेई (KGMU) तथा डॉ. विपुल प्रकाश (मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ) शामिल रहे।

कार्यक्रम का समापन आयोजन सचिव डॉ. हेमंत कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

कार्यशाला के हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र में डॉ. मृत्युंजय सिंह, डॉ. पुलकित गुप्ता और डॉ. सुलक्षणा गौतम के साथ डॉ. मोहम्मद आरिफ, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, डॉ. ऋचा त्यागी, डॉ. दीपक शर्मा और डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव (KGMU) ने प्रतिभागियों को पॉलिसोमनोग्राफी रिपोर्ट स्कोरिंग, स्लीप स्टडी की व्याख्या तथा स्लीप एपनिया के उपचार में PAP उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. सागर जैन, डॉ. अमन सक्सेना, डॉ. कमल वर्मा, डॉ. शाश्वत केसरवानी, डॉ. दिलीप और डॉ. सलभ सहित पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस कार्यशाला में व्यावहारिक प्रदर्शनों के माध्यम से चिकित्सकों को स्लीप से संबंधित श्वसन विकारों के बेहतर निदान और उपचार के लिए प्रशिक्षित किया गया।

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