डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुँचाना प्रभावी माध्यम
अंतर्राष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता दिवस पर स्वास्थ्य जानकारी

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। डिज़िटल प्लेटफार्म के माध्यम से किशोरियों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाना प्रभावी माध्यम बताया गया। बुधवार को
माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर किशोरियों में मासिक धर्म स्वास्थ्य, डिजिटल जागरूकता एवं एचपीवी वैक्सीनेशन को लेकर महत्वपूर्ण अध्ययन रिपोर्ट पेश की गयी ।
क्वीन मेरी अस्पताल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस फॉर एडोलिसेंट हेल्थ एंड डेवलपमेंट द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह तथ्य सामने आये है। डिजिटल मीडिया किशोरियों के बीच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का प्रमुख माध्यम बन चुका है।
हालांकि एचपीवी वैक्सीनेशन एवं मासिक धर्म स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के क्षेत्र में अभी भी व्यापक कार्य किए जाने की आवश्यकता है। वहीं
यह अध्ययन प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल के संरक्षण में तथा वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. सुजाता देव एवं काउंसलर सौम्या सिंह द्वारा किया गया।
“किशोरियों में डिजिटल मीडिया के उपयोग एवं एचपीवी वैक्सीनेशन जागरूकता अध्ययन रिपोर्ट..
जिसमें डिजिटल मीडिया की बढ़ती पहुँच
में 98.69% प्रतिभागियों के पास स्मार्टफोन उपलब्ध था।
👉 97.38% प्रतिभागी नियमित रूप से इंटरनेट का उपयोग कर रही थीं।
माहवारी शुरू होने की आयु
👉 47.71 % किशोरियों में 12-13 साल की आयु में माहवारी शुरू हुई।
👉 47.05% की 14-15 साल की आयु में माहवारी शुरू हुई।
👉 5.22% की 16-18 साल की आयु में माहवारी शुरू हुई।
मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता
👉 58.82% प्रतिभागियों को पहली माहवारी से पहले जानकारी थी।
👉 41.17% किशोरियों को माहवारी से पूर्व जानकारी नहीं थी।
स्वास्थ्य जानकारी के डिजिटल स्रोत
👉 60.13% प्रतिभागियों ने यूट्यूब का उपयोग किया।
👉 30.06% प्रतिभागियों ने Google का उपयोग किया।
👉 66.66% प्रतिभागी ऑनलाइन स्वास्थ्य सामग्री पर विश्वास करती हैं।
ऑनलाइन सबसे अधिक खोजे जाने वाले विषय
👉 मासिक धर्म — 26.79%
👉 STI एवं स्वच्छता — 21.33%
👉 पीरियड दर्द — 17.64%
डिजिटल मीडिया का स्वास्थ्य जागरूकता पर प्रभाव
👉 78.43% प्रतिभागियों ने माना कि डिजिटल मीडिया से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी में सुधार हुआ।
मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन
👉 53.59% प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से मासिक धर्म उत्पाद खरीदे।
👉 मेंस्ट्रुअल पैड सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला उत्पाद रहा।
👉 37.25% प्रतिभागियों ने पीरियड ट्रैकिंग एप्लिकेशन का उपयोग किया।
👉 52.28% प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य शिक्षा हेतु वेबसाइट एवं मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया।
एचपीवी वैक्सीनेशन जागरूकता
👉 50.32% प्रतिभागियों को HPV वैक्सीन के बारे में जानकारी थी।
👉 केवल 12.41% प्रतिभागियों ने HPV वैक्सीन लगवाई थी।
👉 1.30% प्रतिभागियों को दोनों डोज़ पूरी होने की जानकारी थी।
👉 11.11% प्रतिभागियों को डोज़ की संख्या की जानकारी नहीं थी।
डॉक्टर परामर्श की विश्वसनीयता
👉 73.20% प्रतिभागियों ने डायरेक्ट डॉक्टर कंसल्टेशन को सबसे प्रभावी उपाय माना।
डॉ. अंजू अग्रवाल के अनुसार “डिजिटल प्लेटफॉर्म किशोरियों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। लेकिन मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं HPV वैक्सीनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ाने की अभी भी आवश्यकता है।
प्रो. सुजाता देव के अनुसार “यदि किशोरियों को वैज्ञानिक, प्रमाणित एवं सरल भाषा में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए, तो मासिक धर्म स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य एवं HPV वैक्सीनेशन संबंधी जागरूकता को प्रभावी रूप से बढ़ाया जा सकता है।
अध्ययन दल के सुझाव
अध्ययन दल ने सुझाव दिया कि विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सामुदायिक स्तर पर किशोर स्वास्थ्य, मासिक धर्म स्वच्छता एवं HPV वैक्सीनेशन संबंधी नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। साथ ही डिजिटल हेल्थ एजुकेशन एवं विशेषज्ञ परामर्श को बढ़ावा देकर किशोरियों तक सही एवं वैज्ञानिक स्वास्थ्य जानकारी पहुँचाना आवश्यक है।
अध्ययन की रूपरेखा एवं प्रतिभागियों का विवरण
सौम्या ने बताया कि अध्ययन में 10 से 25 वर्ष की आयु वर्ग की 153 किशोरियों एवं स्नातक स्तर की छात्राओं को शामिल किया गया। इनमें 56.20 प्रतिशत प्रतिभागी ग्रामीण क्षेत्रों से तथा 43.79 प्रतिशत प्रतिभागी शहरी क्षेत्रों से थीं ।



