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जन्मजात रूबेला सिंड्रोम की समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी- डॉ अंजू अग्रवाल 

जन्मजात रूबेला सिंड्रोम की निगरानी पर प्रशिक्षण 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। जन्मजात रूबेला सिंड्रोम की निगरानी के लिए नवजात शिशु स्क्रीनिंग प्रशिक्षण’ की शुरुआत की गयी।

मंगलवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के बाल रोग विभाग की ओर से जन्मजात रूबेला सिंड्रोम की निगरानी एवं नवजात शिशु स्क्रीनिंग पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया ।

जिसका विषय ‘भारत में जन्मजात रूबेला सिंड्रोम की निगरानी (कंजेनिटल रुबेला सिंड्रोम सर्विलांस इन इंडिया) क्रॉस परियोजना के अंतर्गत नवजात शिशु स्क्रीनिंग प्रशिक्षण’ है।

यह कार्यक्रम बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमिओलॉजी (एनआईई) द्वारा वित्तपोषित क्रॉस परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सहित देश के छह राज्यों में चंडीगढ़, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, असम और तमिलनाडु से आए 40 नर्सों एवं तकनीशियनों को रेड रिफ्लेक्स टेस्टिंग, ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पॉन्स ऑडियोमेट्री और पल्स ऑक्सीमेट्री स्क्रीनिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं

कार्यशाला का उद्घाटन केजीएमयू की प्रो-वाइस चांसलर डॉ. अंजू अग्रवाल और बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसएन सिंह द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

प्रो-वाइस चांसलर ने कहा “जन्मजात रूबेला सिंड्रोम की समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान रूबेला संक्रमण का असर गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य और विकास पर पड़ सकता है।

नवजात शिशुओं की समय पर स्क्रीनिंग और उचित जांच से इस सिंड्रोम की पहचान कर आवश्यक उपचार एवं देखभाल शुरू की जा सकती है।

इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही

बाल रोग विभागाध्यक्ष ने कहा “जन्मजात रूबेला सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों में सुनने, देखने और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

कई बार जन्म के समय इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग और नियमित फॉलोअप जरूरी है।

इस कार्यशाला के माध्यम से चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारी की पहचान, निगरानी और रिपोर्टिंग से जुड़ी जानकारी दी जा रही है, जिससे समय रहते बच्चों को उचित देखभाल मिल सके।

डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को जन्मजात रूबेला सिंड्रोम की शीघ्र पहचान, नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग, निगरानी और रिपोर्टिंग से जुड़ी तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी देना है।

इसके साथ ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संचालित क्रॉस परियोजना के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनआईई की विशेषज्ञ टीम के सदस्य डॉ. देविका, डॉ. सबरीनाथन और श्री मुहम्मद अंसारी के साथ ही संस्थान के नेत्र रोग विभाग से डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल तथा ईएनटी विभाग से डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।

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