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टीचर आने वाली पीढ़ियों के नज़रिए को बनाने में निभाते अहम भूमिका- डॉ जबीर अहमद 

फूलों के डिहाइड्रेशन” पर स्किल डेवलपमेंट और नेचर कंजर्वेशन प्रोग्राम 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अध्यापकों के लिए स्किल डेवलपमेंट और नेचर कंजर्वेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया।

बुधवार को एनबीआरआई द्वारा इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव प्रोग्राम (फेज-III) के तहत “क्राफ्ट बनाने और बोनसाई टेक्नीक के लिए फूलों का डिहाइड्रेशन” पर तीन दिन का स्किल डेवलपमेंट और नेचर कंजर्वेशन प्रोग्राम की शुरुआत की गयी।

इस प्रोग्राम में सिटी मोंटेसरी स्कूल की 21 ब्रांच के 26 टीचरों को एक साथ लाया गया है। जिसका मकसद उन्हें प्रैक्टिकल नॉलेज और स्पेशल स्किल देना है। जिसे वे बाद में अपने स्टूडेंट्स के साथ शेयर कर सकें।

जिसका उदेश्य युवा स्टूडेंट्स में पौधों, नेचर और एनवायरनमेंटल कंजर्वेशन के बारे में ज़्यादा अवेयरनेस और तारीफ़ को बढ़ावा देना है। वहीं संस्थान निदेशक डॉ जबीर अहमद ने

प्रोग्राम का उद्घाटन करते हुए कहा कि टीचर आने वाली पीढ़ियों के नज़रिए और वैल्यूज़ को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा पौधों, प्रकृति और सस्टेनेबल तरीकों से जुड़ी उनकी जानकारी और प्रैक्टिकल स्किल्स को मज़बूत करके, हम समाज पर बहुत बड़ा असर डाल सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यह ट्रेनिंग पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिकों को डेवलप करने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है, साथ ही स्किल-बेस्ड मौके भी मिलेंगे जो क्रिएटिविटी, आत्मनिर्भरता और भविष्य में रोज़ी-रोटी की संभावनाओं को बढ़ावा दे सकते हैं।

डॉ. अहमद ने आगे ज़ोर दिया कि CSIR-NBRI ने लगातार साइंटिफिक जानकारी और एक्सपर्टीज़ को समाज के लिए प्रैक्टिकल फ़ायदों में बदलने की दिशा में काम किया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोग्राम साइंस, समाज और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के बीच कनेक्शन को मज़बूत करने के लिए इंस्टीट्यूट के कमिटमेंट को दिखाते हैं।

साथ ही प्रवक्ता ने कहा कि यह प्रोग्राम संस्थान के स्किल डेवलपमेंट, कैपेसिटी बिल्डिंग और समाज तक पहुंच बनाने की लगातार कोशिशों के हिस्से के तौर पर ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है।

टीचर्स को नए, प्रकृति-आधारित सीखने के तरीकों से मज़बूत बनाकर, इंस्टीट्यूट का मकसद एक मल्टीप्लायर इफ़ेक्ट पैदा करना है। जिससे स्टूडेंट्स को पर्यावरण की ज़िम्मेदारी की एक मज़बूत भावना डेवलप करने की प्रेरणा मिले।

ट्रेनिंग के दौरान संस्थान के एक्सपर्ट पार्टिसिपेंट्स को डेकोरेटिव क्राफ्ट के लिए फूलों और पौधों के मटीरियल के डिहाइड्रेशन और प्रिज़र्वेशन के बारे में खास डेमोंस्ट्रेशन और हैंड्स-ऑन एक्सपोज़र देंगे।

सेशन में क्राफ्ट बनाने की टेक्नीक भी शामिल होंगी। जिससे टीचर्स को नेचुरल चीज़ों को वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स में बदलने में शामिल साइंटिफिक और क्रिएटिव प्रोसेस को समझने में मदद मिलेगी।

प्रोग्राम का एक खास हिस्सा बोनसाई की कला और साइंस पर फोकस करेगा। जिसमें पार्टिसिपेंट्स को बोनसाई पौधों के डेवलपमेंट, ट्रेनिंग और मेंटेनेंस से जुड़ी टेक्नीक से इंट्रोड्यूस कराया जाएगा।

पार्टिसिपेंट्स संस्थान के बॉटनिक गार्डन और दूसरी खास फैसिलिटीज़ भी जाएंगे, जहां वे इंस्टीट्यूट के प्लांट कलेक्शन, बॉटैनिकल रिसोर्स और साइंटिफिक एक्टिविटीज़ के बारे में जानेंगे।

इस एक्सपोज़र से पौधों की डाइवर्सिटी, कंज़र्वेशन और एनवायरनमेंटल और सोशल चैलेंजेस को सॉल्व करने में बॉटैनिकल रिसर्च की भूमिका के बारे में उनकी समझ और गहरी होने की उम्मीद है।

इस प्रोग्राम को एक अच्छे नागरिक पहल के तौर पर कॉन्सेप्ट किया गया है। जिसमें टीचर्स को नेचर कंज़र्वेशन और एनवायरनमेंटल अवेयरनेस का एम्बेसडर बनने के लिए एम्पावर करने पर खास फोकस किया गया है।

इन स्किल्स और एक्सपीरियंस को क्लासरूम में वापस ले जाकर, पार्टिसिपेटिंग टीचर्स स्कूल जाने वाले बच्चों में क्यूरियोसिटी, क्रिएटिविटी और एनवायरनमेंट के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना पैदा करने में मदद कर सकते हैं।

ट्रेनिंग में फ्लोरल क्राफ्ट, प्लांट-बेस्ड वैल्यू एडिशन और बोनसाई की खेती में स्किल-बेस्ड और एंटरप्रेन्योरियल मौकों की संभावना पर भी ज़ोर दिया गया है। इस तरह की जानकारी हॉर्टिकल्चर, हैंडीक्राफ्ट और नेचर-बेस्ड प्रोडक्ट्स में क्रिएटिव एंटरप्राइज और नौकरी के मौके खोल सकती है।

तीन दिन की ट्रेनिंग में हिस्सा लेने वालों को साइंटिफिक नॉलेज, प्रैक्टिकल स्किल और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग का मिक्स मिलेगा, जो CSIR-NBRI के समाज के विकास के लिए साइंस और इनोवेशन का फ़ायदा उठाने और प्रकृति से ज़्यादा करीब से जुड़ी पीढ़ी बनाने के विज़न को मज़बूत करेगा।

CMS ग्रुप की रिलेशनशिप मैनेजर, श्रद्धा तेली ने प्रोग्राम ऑर्गनाइज़ करने और टीचरों को सीखने का एक कीमती मौका देने के लिए संस्थान का शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने कैपेसिटी बिल्डिंग और स्किल डेवलपमेंट की दिशा में इंस्टीट्यूट की कोशिशों की तारीफ़ करते हुए कहा कि इससे मिला नॉलेज और प्रैक्टिकल एक्सपोज़र टीचरों को स्टूडेंट्स को क्रिएटिविटी, नेचर कंज़र्वेशन और सस्टेनेबल प्रैक्टिस के लिए इंस्पायर करने में मदद करेगा।

इस अवसर पर वैज्ञानिक-ई डॉ. मनीष भोयर, वैज्ञानिक-ई डॉ. केजे सिंह और डॉ. अतुल बत्रा सहित अन्य अधिकारी और वैज्ञानिक उपस्थित रहे ।

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