प्रदेश में इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन गाइडेड सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन की पहली सर्जरी
जटिल चेहरे की चोटों एवं पोस्ट-ट्रॉमेटिक विकृतियों के लिए अत्याधुनिक पुनर्निर्माण उपचार के खुले द्वार

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। जटिल चेहरे की चोटों एवं पोस्ट-ट्रॉमेटिक विकृतियों वाले रोगियों के लिए अत्याधुनिक पुनर्निर्माण उपचार के द्वार खुल गए है।
उत्तर प्रदेश में क्रैनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के
ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग ने पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट (Patient-Specific Implant – PSI) तथा ओ-आर्म (O-arm) इमेजिंग तकनीक की सहायता से इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन गाइडेड सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन की राज्य की पहली सफल सर्जरी की है।
रोगी को पूर्व में हुए गंभीर चेहरे की चोट (फेशियल ट्रॉमा) के कारण ऑर्बिटल वॉल (नेत्रगुहा की हड्डी) की जटिल विकृति हो गई थी। जिसके परिणामस्वरूप उसे लगातार डिप्लोपिया (प्रत्येक आकृति का दो दिखाई देना), चेहरे की असमानता तथा कार्यात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
चेहरे की चोट के बाद होने वाली ऑर्बिटल विकृतियाँ क्रैनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी की सबसे जटिल स्थितियों में से एक मानी जाती हैं।
क्योंकि ऑर्बिट एक अत्यंत जटिल त्रि-आयामी संरचना है, जो नेत्र की स्थिति एवं उसकी सामान्य गति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुनर्निर्माण के दौरान थोड़ी-सी भी त्रुटि रोगी में स्थायी रूप से दोहरा दिखाई देना, नेत्र की असामान्य स्थिति, चेहरे की विकृति तथा दीर्घकालिक कार्यात्मक समस्याएँ उत्पन्न कर सकती है।
पुरानी चोट के बाद ऑर्बिटल विकृतियों का सेकेंडरी रिकंस्ट्रक्शन विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इस अवस्था में सामान्य शारीरिक संरचना बदल चुकी होती है।
जिससे ऊतकों में फाइब्रोसिस विकसित हो जाता है, फ्रैक्चर भर चुके होते हैं तथा सामान्य एनाटॉमिकल लैंडमार्क स्पष्ट नहीं रहते। ऐसे में ऑर्बिटल आयतन, आकार एवं चेहरे की समरूपता को पुनर्स्थापित करने के लिए अत्यंत सूक्ष्म योजना एवं उच्च स्तर की सर्जिकल सटीकता आवश्यक होती है।
इस जटिल सर्जरी में इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन तकनीक ने केंद्रीय भूमिका निभाई। इस तकनीक की सहायता से ऑपरेशन के दौरान रोगी की वास्तविक शारीरिक संरचना का प्री-ऑपरेटिव सी टी इमेजिंग से रियल-टाइम मिलान किया गया।
जिससे महत्वपूर्ण एनाटॉमिकल बिंदुओं की सटीक पहचान संभव हुई तथा पूर्व निर्धारित सर्जिकल योजना के अनुरूप पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट को अत्यधिक सटीकता के साथ स्थापित किया गया।
यह तकनीक विशेष रूप से उन परिस्थितियों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। जहाँ सामान्य एनाटॉमिकल लैंडमार्क विकृत या समाप्त हो चुके थे।
रोगी के लिए पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट का उपयोग किया गया। जिसे रोगी की त्रि-आयामी (3D) इमेजिंग के आधार पर विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया था। इससे प्रभावित ऑर्बिट की संरचना को उसकी प्राकृतिक शारीरिक बनावट के अनुरूप पुनर्स्थापित किया जा सका।
सर्जरी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशन पूर्ण होने से पूर्व ओ-आर्म इमेजिंग की गई। इससे ऑपरेशन थिएटर में ही इम्प्लांट की स्थिति एवं ऑर्बिटल रिकंस्ट्रक्शन का तत्काल मूल्यांकन संभव हुआ।
इस प्रक्रिया से सर्जरी की गुणवत्ता की वस्तुनिष्ठ पुष्टि हुई, इम्प्लांट की सटीक स्थिति सुनिश्चित हुई तथा भविष्य में किसी शेष विकृति अथवा पुनः सुधारात्मक सर्जरी की आवश्यकता की संभावना कम हो गई।
यह उत्तर प्रदेश का पहला मामला है। जिसमें सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन के लिए इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन, ओ-आर्म इमेजिंग तथा पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट का सफलतापूर्वक संयुक्त उपयोग किया गया है।
यह उपलब्धि जटिल पोस्ट-ट्रॉमेटिक चेहरे की विकृतियों के उपचार में एक महत्वपूर्ण प्रगति है तथा राज्य में प्रिसीजन-गाइडेड क्रैनियो-मैक्सिलोफेशियल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी का नया मानक स्थापित किया है ।
अब चेहरे की गंभीर चोटों के बाद उत्पन्न विकृतियों, लगातार दोहरा दिखाई देने अथवा अन्य जटिलताओं से पीड़ित रोगी एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में उन्नत पुनर्निर्माण उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
ऑपरेटिंग सर्जन टीम में..
डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा, डॉ भरत शुक्ला,रेजिडेंट सर्जिकल टीम में डॉ. दीक्षा,डॉ शशांक, डॉ अभिजीत, डॉ अपूर्वा, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. रफ़त शमीम, डॉ. वंश, डॉ. निखिल,डॉ शारिया,नर्सिंग टीम में आइरीन, दीक्षा शामिल रही।
एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग को संस्थान निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन ने कहा यह ऐतिहासिक उपलब्धि संस्थान की नवाचार, सटीकता और उत्कृष्ट रोगी देखभाल के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह हमारी बहुविषयक विशेषज्ञ टीम की दक्षता तथा बेहतर चिकित्सीय परिणामों के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने की हमारी निरंतर प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।
प्रो धीमन ने कहा मैं इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए पूरी टीम को बधाई देता हूँ और भविष्य में भी स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए उन्हें अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। संस्थान की रोगी-हितार्थ, नवाचार आधारित तथा बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) चिकित्सा सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। संस्थान में
इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन, ओ-आर्म इमेजिंग एवं पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की उपलब्धता से अब उत्तर प्रदेश के रोगियों को जटिल चेहरे की चोटों एवं पोस्ट-ट्रॉमेटिक विकृतियों के लिए अत्याधुनिक पुनर्निर्माण उपचार अपने ही राज्य में प्राप्त हो सकेगा।
ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग, एपेक्स ट्रॉमा सेंटर इस उपलब्धि के लिए संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन तथा एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख प्रो. अरुण कुमार श्रीवास्तव के दूरदर्शी नेतृत्व,
सतत प्रोत्साहन एवं उन्नत ट्रॉमा सेवाओं तथा आधुनिक शल्य तकनीकों को संस्थान में स्थापित करने के लिए दिए गए निरंतर सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करता है।
इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन, पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट तथा ओ-आर्म इमेजिंग के समन्वित उपयोग से की गई यह सफल सर्जरी प्रिसीजन-गाइडेड क्रैनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सूक्ष्म प्री-ऑपरेटिव योजना, रियल-टाइम इंट्राऑपरेटिव मार्गदर्शन तथा अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीकों के संयोजन से अब जटिल पोस्ट-ट्रॉमेटिक चेहरे की विकृतियों वाले रोगियों में अधिक सटीक शारीरिक पुनर्निर्माण संभव होगा। जिससे कार्यात्मक एवं सौंदर्यात्मक दोनों प्रकार के परिणाम बेहतर प्राप्त किए जा सकेंगे।



