डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन हाइब्रिड शल्य तकनीक की विकसित
डामा तकनीक चयनित रोगियों पर किया प्रयोग, मिली सफलता

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीकि का चयनित रोगियों पर प्रयोग करने में सफल साबित हुई। शनिवार को
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग ने, प्रो. सबारेत्नम मयिलवगनन के नेतृत्व में, डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन (डामा ) नामक एक अभिनव हाइब्रिड शल्य तकनीक विकसित की है।
यह तकनीक दोनों ओर (बाइलेटरल) मौजूद सौम्य (बेनिगन ) थायरॉयड नोड्यूल वाले चयनित रोगियों के उपचार में एक नई दिशा प्रस्तुत करती है। इसमें पारंपरिक एंडोक्राइन सर्जरी और इमेज-गाइडेड थर्मल एब्लेशन (माइक्रोवेव अबलेशन ) की विशेषताओं को एक साथ जोड़ा गया है।
परंपरागत रूप से दोनों ओर थायरॉयड नोड्यूल वाले रोगियों के लिए सर्जरी के दो प्रमुख विकल्प उपलब्ध रहे हैं। पहला, हेमिथायरॉयडेक्टॉमी, जिसमें थायरॉयड का केवल एक भाग हटाया जाता है।
जिससे शेष ग्रंथि कार्य करती रहती है, दूसरी ओर मौजूद नोड्यूल की नियमित निगरानी और भविष्य में उपचार की संभावना बनी रहती है। दूसरा विकल्प टोटल थायरॉयडेक्टॉमी है। जिसमें दोनों लोब हटाए जाते हैं। इससे रोग का निश्चित उपचार तो हो जाता है।
रोगी को जीवनभर थायरॉक्सिन हार्मोन लेना पड़ता है तथा हाइपोपैराथायरॉयडिज़्म और रिकरेंट लेरिंजियल नर्व (रिकरंट Laryngeal नर्व ) की चोट जैसी जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
इन्हीं सीमाओं को दूर करने के उद्देश्य से डामा तकनीक की परिकल्पना की गई। इस प्रक्रिया में प्रमुख या शल्य चिकित्सा की आवश्यकता वाले थायरॉयड लोब की हेमिथायरॉयडेक्टॉमी की जाती है।
जबकि दूसरी ओर स्थित सौम्य थायरॉयड नोड्यूल का ऑपरेशन के दौरान खुले शल्य क्षेत्र (ओपन सर्जिकल फील्ड ) से माइक्रोवेव एब्लेशन किया जाता है।
इस डायरेक्ट सर्जिकल एक्सेसल से अल्ट्रासाउंड की सहायता से माइक्रोवेव एंटीना को अत्यंत सटीक रूप से स्थापित किया जा सकता है। आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं की निरंतर निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
डामा का मुख्य उद्देश्य दोनों ओर के सौम्य थायरॉयड नोड्यूल का एक ही चरण (सिंगल स्टेज प्रोसीजर ) में प्रभावी उपचार करना है।
साथ ही कार्यशील थायरॉयड ऊतक को संरक्षित रखना और रोगी को जीवनभर हार्मोन प्रतिस्थापन (थाइरोक्सीन रिप्लेसमेंट थेरेपी ) की आवश्यकता से यथासंभव बचाना। सर्जरी और थर्मल एब्लेशन के इस संयोजन के माध्यम से डामा पारंपरिक थायरॉयडेक्टॉमी और केवल पर्क्यूटेनियस (त्वचा के माध्यम से) एब्लेशन तकनीकों के बीच की दूरी को कम करता है।
जानें डामा तकनीकी के लाभ..
डामा तकनीक के संभावित लाभ।
दोनों ओर के सौम्य थायरॉयड नोड्यूल का एक ही ऑपरेशन में उपचार।
प्राकृतिक (एंडोजेनस) थायरॉयड कार्यक्षमता का संरक्षण।
भविष्य में कम्प्लीशन थायरॉयडेक्टॉमी की आवश्यकता में कमी।
दीर्घकालिक उपचार भार और स्वास्थ्य व्यय में कमी।
अंग-संरक्षण (ऑर्गन – प्रेजेंरविंग ) आधारित व्यक्तिगत (पर्सनालिज्ड ) उपचार।
अल्ट्रासाउंड-निर्देशित माइक्रोवेव एब्लेशन की सटीकता और ओपन एंडोक्राइन सर्जरी की सुरक्षा का प्रभावी समन्वय।
सामान्य पर्क्यूटेनियस माइक्रोवेव एब्लेशन की तुलना में डामा में शल्य क्रिया के दौरान थायरॉयड के शेष भाग तक प्रत्यक्ष पहुँच प्राप्त होती है।
इससे माइक्रोवेव प्रोब को अधिक सटीकता से स्थापित किया जा सकता है तथा आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं जैसे रिकरेंट लेरिंजियल नर्व, श्वासनली (Trachea), अन्ननली (Esophagus) और प्रमुख रक्त वाहिकाओं की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
यह हाइब्रिड तकनीक विशेष रूप से उन चयनित रोगियों के लिए उपयोगी हो सकती है। जिनमें थायरॉयड की सामान्य कार्यक्षमता को संरक्षित रखना महत्वपूर्ण हो। संस्थान में किए गए प्रारंभिक नैदानिक अनुभवों ने इस तकनीक की तकनीकी व्यवहार्यता (टेक्निकल फेसिबिलिटी ) को प्रदर्शित किया है।
रोगियों में सामान्य थायरॉयड कार्यक्षमता बनी रही, उपचारित विपरीत पक्ष के नोड्यूल के आकार में प्रारंभिक संतोषजनक कमी देखी गई तथा ऑपरेशन के बाद का स्वास्थ्य लाभ (पोस्टोपरेटिव रिकवरी )बिना किसी महत्वपूर्ण जटिलता के रहा।
यद्यपि इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता, टिकाऊ परिणाम तथा ऑन्कोलॉजिकल सुरक्षा की पुष्टि के लिए अधिक रोगियों पर और लंबे समय तक अध्ययन आवश्यक हैं। फिर भी प्रारंभिक परिणाम अत्यंत उत्साहजनक हैं।
डामा पूर्व में वर्णित न की गई (प्रीवियसली Undescribed ) हाइब्रिड शल्य तकनीक है। जिसमें एक ही ऑपरेशन के दौरान हेमिथायरॉयडेक्टॉमी तथा दूसरी ओर स्थित सौम्य थायरॉयड नोड्यूल का डायरेक्ट-एक्सेस इंट्राऑपरेटिव माइक्रोवेव एब्लेशन किया जाता है।
यह नवाचार आधुनिक एंडोक्राइन सर्जरी की उस अवधारणा को साकार करता है। जिसका उद्देश्य रोगी-केंद्रित, अंग-संरक्षण आधारित, न्यूनतम आक्रामक (मिनिमली इनवैसिव ) उपचार प्रदान करना है। जबकि शल्य चिकित्सा की सुरक्षा और प्रभावशीलता को भी बनाए रखा जाता है।
प्रो. सबारेत्नम मयिलवगनन संस्थान के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग की बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी ) टीम द्वारा विकसित डामा तकनीक भविष्य में दोनों ओर के बेनिगन थायरॉयड रोगों से ग्रस्त चयनित रोगियों के उपचार के लिए एक महत्वपूर्ण नया विकल्प सिद्ध हो सकता है।
एंडोक्राइन सर्जरी में शल्य चिकित्सा और इमेज-गाइडेड एब्लेटिव तकनीकों के समन्वित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
डामा तकनीक के विकास में योगदान देने वाली टीम में..
प्रमुख अन्वेषक एवं टीम लीडर प्रो. सबारेत्नम मयिलवगनन (प्रो सबारेतनम एम )
सहायक प्रोफेसर डॉ. रजनी के. साह (डॉ . रजनी के . साह ) डॉ. जगन्नाथ स्पंदना (डॉ . जगन्नाथ स्पंदना ) रेज़िडेंट डॉक्टर डॉ. नम्रता मस्कारा (डॉ . नम्रता मास्करा )
प्रारंभिक नैदानिक अनुभव अब तक 7 चयनित रोगियों में डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव अबलेशन (डामा ) तकनीक सफलतापूर्वक की जा चुकी है।
सभी 7 प्रक्रियाएँ तकनीकी एवं चिकित्सकीय रूप से सफल (100% सक्सेस ) रहीं। सभी रोगियों में ऑपरेशन के बाद का स्वास्थ्य लाभ संतोषजनक रहा तथा किसी भी प्रमुख जटिलता की सूचना नहीं मिली।
प्रारंभिक परिणाम इस नवीन हाइब्रिड तकनीक की सुरक्षा, व्यवहार्यता (फेसिबिलिटी ) और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।
दीर्घकालिक परिणामों के मूल्यांकन के लिए रोगियों का नियमित अनुवर्ती (फॉलो-अप ) जारी है।



