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समिट बिल्डिंग में संचालित फर्जी अंतर्राष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ 

उत्तर प्रदेश पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी,119 गिरफ्तार

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में चर्चा में बनी रहने वाली समिट बिल्डिंग ने सबको चौका दिया है। फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने का खेल बड़े स्तर पर चल रहा था।

जिसका यूपी पुलिस भंडाफोड़ कर दिया है। जिसमें राजधानी की साइबर सेल और साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने सयुंक्त कार्रवाई करते हुए अन्तरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का कॉल सेंटर भंडाफोड़ करते हुए 119 लोगों को गिरफ्तार किया है ।

फर्जी कॉल सेंटर यह लोग तकनीकी संसाधनों एवं इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी कर रहे थे।

इनके पास से साइबर अपराध में प्रयुक्त 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन, इंटरनेट आधारित कॉलिंग सिस्टम, डिजिटल डाटा, फर्जी दस्तावेज एवं अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।

गुरुवार को

पुलिस आयुक्त आमरेंद्र कुमार सेंगर रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि साइबर क्राइम सेल व थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने बुधवार काे सयुंक्त कार्रवाई करते हुए विभूतिखण्ड

क्षेत्र स्थित समिट बिल्डिंग में संचालित एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि सोलारिस साल्यूशन के नाम का कॉल सेंटर कॉर्पोरेट संरचना की भांति संचालित किया जा रहा था।

जिसमें प्रत्येक कर्मचारी की अलग-अलग भूमिका निर्धारित थी। इसमें कई लड़कियां और लड़के थे, जो अच्छी इंग्लिश जानते थे। प्रारंभिक विवेचना एवं पूछताछ में यह तथ्य प्रकाश में आया कि यह गिरोह इंटरनेट

आधारित कॉलिंग सॉफ्टवेयर एवं अन्य आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क स्थापित करते थे। गिरोह के सदस्य स्वयं को अमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट, ऐपल, पेयपल,

नेटफिलक्स और फेसबुक जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों का अधिकृत प्रतिनिधि अथवा कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताकर पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनके बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट अथवा व्यक्तिगत पहचान से

संबंधित गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। जिसके कारण उनके विरुद्ध वित्तीय अथवा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जब पीड़ित भयभीत हो जाता था, तब कॉल को अगले स्तर पर स्थानांतरित कर स्वयं को फेडरल ट्रेड कमीशन

(एफटीसी), फेडरल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई), अन्य जांच एजेंसी व विभागों का अधिकारी बताकर उस पर कानूनी कार्यवाही एवं गिरफ्तारी का भय उत्पन्न किया जाता था। पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए अभियुक्तों कोर्ट

आर्डर, इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट अन्य प्रकार की फर्जी दस्तावेज दिखाते थे, जिनका स्वरूप वास्तविक सरकारी अभिलेखों जैसा तैयार किया जाता था। जिससे पीड़ित झांसे में आ जाते थे।

इसके बाद यह लोग उन्हें अपनी ठगी का शिकार बना लेते थे। गिरोह के लाेग पीड़ितों से प्राप्त धनराशि को सीधे बैंक खातों में प्राप्त न कर गिफ्ट कार्ड, डिजिटल बाउचर और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से प्राप्त करते थे।

ऐसा करने का उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत एवं अंतिम लाभार्थी को छिपाना तथा जांच एजेंसियों के लिए वित्तीय ट्रेल को जटिल बनाना था।

यह लोग विभिन्न राज्यों से ऐसे कर्मचारियों की भर्ती करता थे, जिन्हें बीपीओ और इंटरनेशल कॉलिंग का अच्छा अनुभव हो। कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था, अच्छी सैलरी फर्जी कंपनी सोलारिस साल्यूशन देती थी।

इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान कुल 119 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। सभी व्यक्तियों की भूमिका साइबर कॉल सेंटर के संचालन, विदेशी नागरिकों से संपर्क स्थापित करने, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग तथा साइबर धोखाधड़ी से संबंधित गतिविधियों में पाई गई।

गुजरात निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार इस फर्जी कंपनी में आपरेशन मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे। अब तक इन लाेगाें ने कराेड़ाें की ठगी कर ली है

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