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ज्ञान समाज को समर्पित होने पर ही होगा सार्थक -आनंदीबेन पटेल 

आरएमएल में दीक्षांत समारोह, मेधावी हुए सम्मानित 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के तृतीय दीक्षांत समारोह में मेधावियों को सम्मानित किया गया।

सोमवार को समारोह की शुरुआत मंचासीन अतिथियों का चंदन पौधे भेंट कर स्वागत के साथ किया गया। संस्थान के निदेशक प्रो सीएम सिंह द्वारा तृतीय दीक्षांत समारोह के शुभारम्भ की अनुमति का आग्रह किया।

जिसके पश्चात तृतीय दीक्षांत समारोह प्रारम्भ करने की औपचारिक घोषणा के साथ संस्थान के उपाध्यक्ष अमित कुमार घोष अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु कल्याण द्वारा स्वागत भाषण देते हुए सभी

छात्रों को बधाई दी और कहा कि चिकित्सा शिक्षा प्रगति की ओर अग्रसर है और छात्र समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। साथ ही

संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों से कहा कि आज आप सब यहाँ से आगे की दुनिया में कदम रख रहे हैं। अब आपके सामने सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि असली जीवन के वे चेहरे होंगे जहाँ उम्मीद भी है, चिंता भी है और भरोसा भी।

मैं आपसे यही चाहूँगा कि आप संस्थान की उस सोच को अपने साथ लेकर जाएँ। जिसमें मरीज केवल उपचार का विषय नहीं, बल्कि पूरी संवेदना का केंद्र होता है।

चिकित्सा की सबसे बड़ी सफलता किसी रिपोर्ट में नहीं, बल्कि किसी की राहत में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि आप जहाँ भी जाएँ, लोग आपको आपके ज्ञान से कम और आपके व्यवहार से ज्यादा याद रखें।

संस्थान की गिनाई उपलब्धियां..

👉 यह संस्थान 2006 में प्रारम्भ के साथ 2009 में ओपीडी सेवाओं का आरम्भ हुआ। 2018 में विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ और अब वर्तमान स्वरूप हमारे सामने है।

संस्थान में 200 एमबीबीएस, 40 बीएससी नर्सिंग, 107 एमडी/एमएस, 36 डीएम/एमसीएच, 6 एमएससी (न्यूक्लियर मेडिसिन), 04 डीएनबी, 02 एफएनबी तथा 76 पैरामेडिकल डिप्लोमा विद्यार्थियों एवं 35 पीएचडी शोधार्थियों को प्रतिवर्ष प्रवेश प्रदान किया जा रहा है।

आज संस्थान के 34 विभागों में शैक्षणिक पाठ्क्रम चल रहा है। वर्ष 2026-27 में संस्थान में एफएनबी एवं डीएनबी की कुल 07 सीटें बढ़ाने के लिए प्रस्ताव प्रेषित है।

👉 शोध एवं अनुसंधान..

वर्ष 2025-26 में संस्थान के संकाय सदस्यों द्वारा 148 अनुसंधान परियोजनाएँ प्रारम्भ की गईं, 20 क्लीनिकल ट्रायल शुरू किए गए। एमबीबीएस विद्यार्थियों द्वारा 8 शोध परियोजनाएँ, परास्नातक विद्यार्थियों द्वारा 90 थीसिस कार्य तथा संस्थान के नाम 3 पेटेंट दर्ज हुए हैं।

👉 यूनिसेफ के सहयोग से ‘‘उत्तर प्रदेश में लेड पॉइजनिंग का आंकलन परियोजना‘‘ संचालित की जा रही है। परियोजना के अगले चरण में इसका विस्तार प्रदेश के सभी जनपदों तक किया जाएगा।

नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति एवं अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से संस्थान द्वारा आरएमएलआईएमएस फाउंडेशन’ के रूप में अपने इन्क्यूबेशन सेल की स्थापना की गई है।

रोगी सेवा उपचार में..

पिछले एक वर्ष में संस्थान द्वारा 9 लाख से अधिक मरीजों को ओपीडी सेवाएँ प्रदान की गईं। 78 हजार से अधिक मरीजों को भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराया गया। 1.71 लाख से अधिक मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की गईं। इसी अवधि में 39 हजार से अधिक शल्य चिकित्साएँ सम्पन्न की गईं तथा लगभग 7 हजार सुरक्षित प्रसव कराए गए।

👉 संस्थान ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में एक अभिनव मानक स्थापित करते हुए ईको, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड सहित प्रमुख डायग्नोस्टिक जांचों को उसी दिन एवं बिना किसी प्रतीक्षा अवधि के उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की है।

जहाँ सामान्यतः सरकारी अस्पतालों में इन जांचों के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। वहीं यह व्यवस्था मरीजों को त्वरित रोग-निदान एवं शीघ्र उपचार सुनिश्चित करती है।

मरीज के बेड तक दवाइयों की उपलब्धता भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों को दवाइयाँ प्राप्त करने के लिए विभिन्न काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों और उपचार में होने वाले विलम्ब को समाप्त करने के उद्देश्य से संस्थान द्वारा बेडसाइड औषधि वितरण व्यवस्था लागू की गई है।

उपचार प्रारम्भ होने में प्रक्रियात्मक विलम्ब को कम करने के लिए संस्थान द्वारा मिसलेनियस ड्रग्स की सुविधा प्रारम्भ की गई। जिससे भर्ती मरीज का इलाज तुरन्त शुरू किया जा सके।

👉 इमरजेंसी मरीजों के लिए त्वरित सहायता व्यवस्था

गंभीर अवस्था में एम्बुलेंस से आने वाले मरीजों के लिए संस्थान ने पोर्टर सिस्टम लागू किया है। प्रशिक्षित पोर्टर स्टाफ मरीजों को तत्काल रिसीव कर सीधे इमरजेंसी विभाग तक पहुँचाता है, जहाँ बिना किसी विलम्ब के उपचार प्रारम्भ कर दिया जाता है।

👉 सितम्बर 2025 से प्रारम्भ इस व्यवस्था के माध्यम से पिछले नौ महीनों में 22,377 मरीज लाभान्वित हुए हैं।

टेली-फॉलो-अप सेवाएँः एंडोक्राइन सर्जरी विभाग द्वारा दूरस्थ मरीजों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवा मई 2025 से प्रारम्भ इस सुविधा के माध्यम से 500 से अधिक एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराया गया है।

क्यूआर-कोड आधारित शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से अब तक 2,266 से अधिक शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा चुका है।

स्टेमी के अन्तर्गत प्रदेश के 10 जनपदों को गोद लिया गया है जिनमें करीब 24000 से ईसीजी परीक्षण किये गये हैं। इनमें से 744 गंभीर स्टेमी रोगियों की पहचान करके 483 मरीजों को समयबद्ध थ्रोम्बोलाइज किया गया है और 240 गंभीर मरीजों को संस्थान में भर्ती कर उन्नत चिकित्सा सेवा प्रदान की गई है।

👉 संस्थान द्वारा बच्चों गर्भवती महिलाओं तथा इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को रिप्लेसमेंट डोनर की अनिवार्यता के बिना ही खून और खून के घटकों की उपलब्धता उपलब्ध कराये जाते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य गम्भीर एवं जीवनरक्षक परिस्थितियों में उपचार में किसी भी प्रकार की देरी न होने देना है।

👉 अंग प्रत्यारोपण एवं रोबोटिक सर्जरी

संस्थान में ट्रांसप्लांट सेन्टर का निर्माण कार्य पूर्ण करा लिया गया है। जिसमें वर्तमान में 200 रीनल ट्रांसप्लांट किये जा चुके हैं। शीघ्र ही थैलेसीमिया से पीड़ित लगभग 250 बच्चों के लिए शीघ्र ही बोन मैरो ट्रांसप्लान्ट और लिवर ट्रांसप्लान्ट भी शुरू किया जायेगा।

विश्व के सबसे प्रतिष्ठित रोबोटिक सर्जरी सिस्टम के माध्यम से 350 से अधिक रोबोटिक सर्जरियाँ सफलतापूर्वक सम्पन्न की जा चुकी हैं।

कॉर्निया ट्रांसप्लांट प्रारम्भ करने के लिए आई बैंक की स्थापना की जा रही है तथा अगस्त 2026 से कॉर्निया प्रत्यारोपण प्रारम्भ किए जाने की योजना है।

न्यूरो साइंस एवं सुपर स्पेशियलिटी उपलब्धियाँ पहली बार पार्किंसन रोग के लिए डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।

न्यूरो साइंस सेंटर में लगभग 150 बेड उपलब्ध हैं तथा अब तक 8,700 मरीजों को भर्ती कर उपचार प्रदान किया गया है।

उत्तर प्रदेश का प्रथम गामा नाइफ सिस्टम शीघ्र प्रारम्भ किया जाएगा।

संस्थान में लैप्रोस्कोपिक तकनीक से आंत के कैंसर की जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक सम्पन्न की गई है। हास्पिटल मेन्टीनेन्स यूनिट- अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु एवं निर्बाध बनाए रखने के लिए हास्पिटल मेन्टीनेन्स यूनिट कार्यरत है।

व्हाट्सप ग्रुप पर जैसे ही कोई भी शिकायत हास्पिटल से आती है उसको सम्बन्धित व्यक्ति द्वारा तुरन्त अंटेन्ड करके उसका निराकरण किया जाता है।

👉 संस्थान के शहीद पथ परिसर में 1010 बेड के अत्याधुनिक अस्पताल को प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया है, जिसके निर्माण से संस्थान के सुपर स्पेशलियटी विभागों को विस्तार मिलेगा और नये विभाग भी शुरू किये जा सकेंगे।

100 बेड के क्रिटिकल केयर सेंटर परियोजना का कार्य प्रगति पर है।

888 बेड छात्रावास जिसमें गर्ल्स तथा ब्वायज के लिये अलग-अलग 444 बेडेड छात्रावास निर्माणाधीन हैं। संस्थान में पॉच तलों वाला अत्याधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है।

जिसमें पांच तलों पर अत्याधुनिक स्विमिंग पूल, जिमनेजियम, योग लैब, टेबल टेनिस, वालीबॉल, बास्केटबाल, लॉन टेनिस तथा विभिन्न इन्डोर गेम्स की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

यह परिसर विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य, खेल प्रतिभा और समग्र व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करेगा।

बीते माह 24 फरवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उप मुख्यमंत्री एवं राज्यमंत्री द्वारा संस्थान के राम प्रकाश गुप्ता मातृ एवं शिशु रेफरल हॉस्पिटल, अमर शहीद पथ कैम्पस में 500 बेड क्षमता वाले पीआरए भवन के निर्माण कार्य के लिए भूमि पूजन तथा रेडियोलॉजी विभाग के नवनिर्मित डायग्नोस्टिक ब्लॉक का लोकार्पण किया गया है।

जिससे वहां भी मरीजों को रैन बसेरा और डायग्नोस्टिक सर्विसेज वहीं पर प्राप्त हो सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार संस्थान को शहीद पथ वाले कैम्पस के समीप ही लगभग 16 हजार वर्गमीटर भूमि उपलब्ध कराई गई है, जहां 350 बेड क्षमता वाले लेवल-1 ट्रामा सेंटर की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है।

तत्पश्चात दीक्षोत्सव पर आधारित दो मिनट की लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। समारोह के दौरान संस्थान के निदेशक एवं संकायाध्यक्ष द्वारा उपाधि प्राप्तकर्ताओं को दीक्षा उपदेश एवं शपथ ग्रहण कराया गया।

तत्पश्चात डिजिटल माध्यम से उपाधियों (डिग्री एवं मार्कशीट) का वर्चुअल अपलोड किया गया। वहीं

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाध्यक्षा आनंदीबेन पटेल द्वारा छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से सम्बोधित किया गया। उन्होंने सभी डिग्रीधारको को बधाई दी कहां कि करोडों लोगो की स्वास्थ्य की आशा आप छात्र हैं।

आप की जिम्मेदारियां सेवा समर्पण से निर्धारित है। ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज को समर्पित है। यह दीक्षांत समारोह शैक्षणिक उत्कृष्टता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सांस्कृतिक मूल्यों के समन्वय का प्रतीक है, उन्होंने विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान करते हुए उन्हें समाज एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया ।

राज्य मंत्री, संसदीय कार्य, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण मयंकेश्वर शरण सिंह समारोह को संबोधित करते हुये छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा छात्रों को स्वस्थ एवं मस्त रहना चाहिए।

समाज से प्राप्त करने के पश्चात् उसे वापस समाज को शिखर तक पहुचाने में सहयोग देना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री एवं कैबिनेट मंत्री, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण ब्रजेश पाठक ने अपने विचार व्यक्त करते हुये सभी को बधाई दी और इस बात का आश्वासन दिया कि सरकार सदैव आपके साथ हैं। इसी क्रम में

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.वेदप्रकाश मिश्रा द्वारा दीक्षांत समारोह का उद्बोधन दिया गया। उन्होंने कहा मैं भाषण नहीं सम्भाषण कर रहा हूं। नियति ने आपको जिम्मेदारी सौंपी है जिसे आपको ईमानदारी से पूर्ण करना होगा।

दीक्षांत समारोह के दौरान डीएम, एमसीएच, एमडी, एमएस, एमबीबीएस, बीएससी नर्सिंग तथा एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन के विद्यार्थियों को शैक्षणिक पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गये।

इस अवसर पर चांसलर्स मेडल, डायरेक्टर्स मेडल सहित अन्य 24 पदकों का वितरण किया गया। कुल 26 पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गये।

इसके अतिरिक्त प्रो राजन भटनागर, विभागाध्यक्षा, एनाटमी विभाग को उत्कृष्ट अध्यापक के सम्मान से सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत संस्थान के एमबीबीएस विद्यार्थियों द्वारा समूह में अभिनय सहित देशभक्ति गीत की प्रस्तुति गयी। समारोह में गोद लिए गए गांवों के छह स्कूली बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण विषय पर नाट्य प्रस्तुति दी गयी, जो उपस्थित जनसमूह को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयी बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया। स्किट प्रतियोगिता में विजेता छह, चित्रकला प्रतियोगिता में विजेता दो तथा भाषण प्रतियोगिता में विजेता एक छात्र सहित कुल नौ स्कूली बच्चों को पुरस्कार प्रदान किया गया।

समारोह के दौरान महिला एवं बाल विकास से संबंधित विशेष पहल के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सम्मानित करते हुए उन्हें किट वितरित की । इसके अतिरिक्त सामाजिक संस्था ‘जनमंच’ की ओर से पुस्तक भेंट कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।

विद्यालयी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 100 पुस्तकों का वितरण भी किया गया। जिससे बच्चों में अध्ययन की रुचि एवं पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।

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