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जीएसटी विभाग के साथ व्यापारियों का संवाद 

यहियागंज उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष ने कार्यक्रम की शुरुआत 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में जीएसटी विभाग अधिकारियो के साथ व्यापारियों का संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मंगलवार को जीएसटी विभाग द्वारा व्यापारी संवाद कार्यक्रम यहियागंज बाजार में किया गया । कार्यक्रम में जीएसटी विभाग की ओर से जीएसटी उपायुक्त खंड-4 राखी सिंह, राज्य कर अधिकारी खंड-4 संतोष कुमार एवं राज्य कर अधिकारी खंड-3 शची मिश्रा उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ यहियागंज उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र द्वारा जीएसटी अधिकारियों का स्वागत के साथ परिचय कराते हुए किया गया ।

संवाद कार्यक्रम के दौरान व्यापारियों ने जीएसटी से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को अधिकारियों के समक्ष रखा।

जीएसटी उपायुक्त राखी सिंह ने व्यापारियों के प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए जीएसटी व्यवस्था के लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को अत्यंत सरल बना दिया गया है। जिससे कोई भी व्यापारी घर बैठे ऑनलाइन पंजीकरण करा सकता है।

नोटिसों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में उपायुक्त महोदया ने बताया कि विभाग द्वारा पहले सेक्टर स्तर पर मामलों की स्क्रूटनी की जाती है। जिससे व्यापारी अनावश्यक नोटिस से बच सके।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यापारी एएसएमटी-10 नोटिस का समयबद्ध एवं संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत कर देता है तो मामला वहीं समाप्त कर दिया जाता है।

साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी व्यापारी को किसी प्रकार की समस्या होने पर वह सीधे उनके खंड कार्यालय में आकर संपर्क कर सकता है।

इस अवसर पर यहियागंज उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने व्यापारियों की ओर से कई महत्वपूर्ण सुझाव एवं आपत्तियां विभाग के समक्ष रखीं।

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा हाल ही में ई-वे बिल से संबंधित जो नए नियम लागू किए गए हैं, वे भविष्य में व्यापारियों के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ई-वे बिल की वैधता अवधि पहले से निर्धारित रहती है तथा अवधि समाप्त होने पर वह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।

ऐसे में ई-वे बिल को पुनः क्लोज करने की व्यवस्था व्यापारियों के लिए अनावश्यक जटिलता उत्पन्न करेगी और उन्हें अतिरिक्त अनुपालन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

श्री मिश्र ने ट्रांसपोर्ट भाड़े पर लागू रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के विषय में भी अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत क्रेता व्यापारी को स्वयं जीएसटी जमा करना पड़ता है।

यदि यह कर परिवहनकर्ता (ट्रांसपोर्टर) द्वारा जमा किया जाए और व्यापारी को उसकी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त हो जाए, तो दोहरी लेखा-प्रक्रिया एवं अनावश्यक अनुपालन से बचा जा सकता है। इससे व्यापारियों का समय एवं संसाधन दोनों की बचत होगी।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अमरनाथ मिश्र, प्रशांत गर्ग, नरेश कुमार, कुश मिश्र, दीपक अग्रवाल, विनय गुप्ता, संजीव जायसवाल, कृष्णकांत बाजपेयी, शिवम गुप्ता, सुधीर गुप्ता सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे।

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