कर्मचारी परिषद ने कुलपति को लिखा पत्र, उठाई मांग
22 से कर्मचारी परिषद ने आंदोलन करने की बनाई रणनीति

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। कर्मचारियों की मांगो को लागू कराने के लिए कुलपति को पत्र जारी किया गया।
मंगलवार को केजीएमयू कर्मचारी परिषद अध्यक्ष विकास सिंह एवं महामंत्री अनिल कुमार द्वारा संयुक्त रूप से कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद को पत्र जारी करते हुए कर्मचारियों की लंबित मागो को लागू कराने के लिए गुहार लगाई है।
कर्मचारी परिषद द्वारा जारी पत्र में कहा कि कुलसचिव के द्वारा तानाशाहीपूर्ण रवैया से कर्मचारियों की समस्याओं एवं शासनादेशों के प्रति उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है।
प्रशासन का यह रवैया कर्मचारियों के संवैधानिक एवं सेवा संबंधी अधिकारों का हनन कर रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कार्य परिषद् द्वारा लिए गए निर्णयों की भी खुली अवहेलना बताया ।
परिषद का कहना है कि कार्य परिषद् की बैठक बीते वर्ष 20 नवंबर में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के अनुसार जिन संवर्गों पदों को एसजीपीजीआई के आधार पर शासनादेश 2016 में 23 अगस्त से वित्तीय लाभ प्राप्त नहीं हुआ है जबकि उक्त तिथि से लाभ प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया था।
इसके अनुपालन में कार्यालय आदेश 28 फरवरी 2026 को निर्गत किया गया। फिर भी आज तक संबंधित कर्मचारियों का वेतन निर्धारण नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों में आर्थिक नुकसान के साथ रोष व्याप्त हो रहा है।
कर्मचारी परिषद ने कार्य परिषद पर आरोप लगाते हुए कहा कि विभिन्न 05 कैडरों से संबंधित प्रस्ताव शासन को प्रेषित किए गए थे। शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए कि इन प्रकरणों को कार्य परिषद के समक्ष प्रस्तुत कर अनुमोदन प्राप्त किया जाए।
फिर भी महत्वपूर्ण विषयों को लगातार कार्य परिषद् की बैठकों के एजेंडा से बाहर रखा जा रहा है। इसके अलावा परिषद ने जारी पत्र में कहा कि ओटी असिस्टेंट के पदों पर पदोन्नति के लिए 6 अक्टूबर 2025 को विज्ञापन प्रकाशित किया गया था।
कई माह बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए लिपिक संवर्ग में पदोन्नति का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद लगभग 12 वर्षों से कोई पदोन्नति नहीं की गई है। जबकि संबंधित पद खाली पड़े हुए हैं।
कर्मचारियों की पदोन्नति संबंधी फाइलें लंबे समय से लंबित..
जिसमें फिजियोथैरेपिस्ट संवर्ग के समस्त कर्मचारियों की पदोन्नति संबंधी फाइलें लंबे समय से लंबित हैं। प्रशासन द्वारा इस विषय में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है।
वहीं प्रदेश सरकार द्वारा रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होकर परिणाम घोषित हुए लगभग 6 से 7 माह व्यतीत हो चुके हैं।
जिसमें चयनित अभ्यर्थियों को आज तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते तैनाती कर्मचारियों को अधिक कार्य करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की लंबित मांगो की वज़ह से विश्वविद्यालय के कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है।
वहीं कर्मचारी परिषद द्वारा विश्वविद्यालय के विभिन्न संगठनों एवं कर्मचारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 22 मई से आंदोलन करने की रणनीति तय कर दी है।
कर्मचारी परिषद के आंदोलन की रुपरेखा..
👉 प्रथम दिवस प्रशासनिक भवन का घेराव एवं प्रदर्शन।
👉 द्वितीय दिवस-ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार।
👉 तृतीय दिवस इमरजेंसी सेवाओं सहित समस्त कार्यों का बहिष्कार।
साथ ही कर्मचारी परिषद स्पष्ट करते हुए कहा कि मांगे लागू न होने के चलते कर्मचारियों को आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।
साथ ही कर्मचारी परिषद ने कहा कि आंदोलन कर्मचारियों के हित के लिए किया जा रहा है। इसकी समस्त जिम्मेदारी संस्थान प्रशासन की होगी।



