भिखारी ठाकुर की मशहूर रचना “बिदेसिया” का भावपूर्ण मंचन
5 कलाकारों ने चामुंडा थेय्यम की दी प्रस्तुति

सोनचिरैया के देशज की दूसरी शाम में मंचित बिदेसिया में दिखी प्रवास और विरह की वेदना
लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। कलाकारों की प्रस्तुति ने सबको अपनी ओर आकर्षित किया।
रविवार को “सोनचिरैया” संस्था के 15वें साल में आयोजित 5वें “देशज” के दूसरे दिन गोमतीनगर के लोहिया पार्क में लोक रंगों के साथ भिखारी ठाकुर की मशहूर रचना “बिदेसिया” का भावपूर्ण मंचन भी देखने को मिला।
दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन “स्वयं सेवक संघ” के प्रांत प्रचारक कौशल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने किया। इस दौरान स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक कौशल ने कहा कि लोक कलाओं के संवर्धन के लिए लोकप्रिय गायिका मालिनी अवस्थी के जो प्रयास हैं उन्ही का प्रतिफल “पद्मश्री” हैं।
उन्होंने कहा कि मालिनी अवस्थी भारत ही नहीं पूरे विश्व में लोक संस्कृति का प्रसार कर रही हैं। उनके द्वारा किया हर प्रयास चाहे वो लेखन हो या देशज सराहनीय है।
कार्यक्रमों का आगाज छेबिल दास विष्णु गौली के नेतृत्व में महाराष्ट्र के सांगी मुखौटा नृत्य से हुआ। जिसमें कलाकारों ने यह दिखाया कि कैसे पशु, लोक जीवन में हमारा हिस्सा बन जाते हैं। इसमें मुखौटो के जरिये स्वांग को दिखाया गया कि पशु भी इंसान से अलग नहीं है। इसमें मुखौटों के जरिये देवी, भैरव और सिंह का स्वरुप दिखाया गया।
इसके बाद थेय्यम में मोहिनीअटटम की प्रसिद्ध कलाकार जयाप्रभा मेनन के नेतृत्व में 5 कलाकारों ने चामुंडा थेय्यम की प्रस्तुति दी। इस थेय्यम के माध्यम से कलाकारों ने मां चामुंडा की आराधना को नृत्य के जरिये दिखाया।
नृत्य में भव्य श्रंगार, विशाल मुकुट, तांबे और पीतल के आभूषण और चेहरे पर पारंपरिक रंगों से सुसज्जित होकर देवी के उग्र रूप को दिखाया गया। इसके अलावा पुट्टम थेय्यम भी प्रस्तुत किया गया।
थेय्यम के बाद मिजोरम से ज़ोसंगलउरा ज़ोते के नेतृत्व में 16 सदस्यों ने चेराओं नृत्य की प्रस्तुति दी। इस नृत्य में खेती के लिए पहाड़ों पर प्रवास के दौरान फसल की रक्षा के लिए किये जाने वाले आनंद नृत्य को दर्शाया गया।
इसके बाद दूसरे दिन की पहली ख़ास प्रस्तुति भातखंडे के बच्चों ने कजरी गायन के रूप में दी। इस प्रस्तुति को विद्यार्थियों ने पद्मश्री मालिनी अवस्थी के द्वारा चंदौली में हुई कार्यशाला में तैयार किया था।
प्रस्तुति की शुरुआत विंध्यवासिनी देवी को नमन करते हुए गीत ‘माई विंध्याचल के महिमा अपार बा ऊंचा दरबार बा’ से हुई। इसके बाद ‘रुनझुन खोल ना केवड़िया, हम बिदेसवा जइबो ना’ गीत की प्रस्तुति से श्रोता झूम उठे।
देशज उत्सव में भातखंडे संस्कृति विश्वविदयालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह भी उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने विश्वविद्याल के विद्यार्थियों को प्रस्तुति के बाद मंच पर पहुंच कर आशीर्वाद दिया। प्रस्तुति में स्वतंत्र, हर्षित, अनूप, आदित्य, दीपक, अंशिका, अलका, एकता, आकाश, सिमरन, दिव्यांशी और नेहा सहित 25 विद्यार्थियों ने प्रस्तुति दी।
इसके बाद राजस्थान के रंग दिखे जिसमें कलाकारों ने अंजना कुमावत के नेतृत्व में राजस्थानी नृत्यों के सिरमौर, घूमर की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति की शुरुआत “लूमा झूमा सा लडली” से हुई। इसमें तालाब से पानी भरने जाने वाली महिलाओं का श्रंगार दिखाया गया। इसके बाद चरी नृत्य हुआ। इसमें सर पर चरी रखकर उसमें आग जलाकर महिलाओं ने रोमांचक नृत्य कर प्रशंसा हासिल की।
राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने गंगा सोड़ी के नेतृत्व में गोंड मरिये नृत्य किया। इसमें 20 कलाकारों ने प्रस्तुति दी। तिरडूड वाद्य पर सींगनुमा सेहरा पहन कर कलाकारों ने विवाह उत्सव का उल्लास पेश किया।
इसके बाद रवि कुनर के नेतृत्व में 15 सदस्यों ने गिद्धा का जोशीला नृत्य किया। इस प्रस्तुति में सावन के महीने में तीयां के त्योहारों में लगने वाले मेले का प्रसंग पेश किया गया। इसमें शादीशुदा लड़कियों के मिलने और उसके बाद खुशी प्रकट की गई।
अंत में गुजरात का लोकरंग देखते ही बना। इसमें सुरेश पवार के नेतृत्व में 15 कलाकारों ने डांगी नृत्य किया। नृत्य में नई फसल के आने का उल्लास और विवाह समारोह की उमंग नृत्य के माध्यम से पेश की गई। इसमें पिरामिड प्रदर्शन भी देखने को मिला। इस दौरान क्षेत्रीय ललित कला अकादमी के सचिव देवेंद्र त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश लोक कला एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी समेत कई संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
बिदेसिया में दिखी प्रवासी प्रियतम की विरह वेदना..
शाम की ख़ास प्रस्तुति संजय उपाध्याय के निर्देशन में म्यूजिकल ड्रामा बिदेसिया की रही। यह प्रस्तुति भिखारी ठाकुर की प्रसिद्ध कहानी बिदेसिया पर आधारित थी। इसमें रोजगार के लिए गांव छोड़ शहर जाने वाले युवक की पत्नी की विरह वेदना को दिखाया गया। नाटक में “बिदेसिया” अपनी पत्नी से विवाह के बाद उसे छोड़कर कोलकाता रोजगार के लिए चला जाता है।
कोलकाता में उसे एक अन्य स्त्री मिल जाती है। वह स्त्री उससे प्रेम करने लगती है और बिदेसिया भी वहीं बस जाता है। उधर गांव में पहली पत्नी दिन-रात अपने पति की राह देखती रहती है।
उसकी व्यथा, अकेलापन और समाज की बातें उसे भीतर-ही-भीतर तोड़ती हैं। एक दिन शहर जा रहे बटोही के जरिये वो बिदेसिया को सन्देश भेजती है जिसे पढ़कर बिदेसिया भाव-विभोर हो जाता है और लौटने का प्रयास करता है पर उसे दूसरी पत्नी रोकती है पर वो वापस गांव लौट आता है। अंत में उसकी दूसरी पत्नी भी गांव आ जाती है।
बिदेसिया के समझाने पर दोनों साथ में खुशी-खुशी रहने लगती हैं। नाटक में कुमार स्पर्श ने बिदेशिया का मुख्य किरदार निभाया। इसके आलावा अपराजिता मिश्रा, उर्मिला, जफर अकबर, राहुल रंजन, कृष्णा कुमार, रूपाली सिन्हा, सहित कई कलाकारों ने प्रतिभाग किया।
बिदेशिया प्रस्तुति में हारमोनियम पर रोहित चंद्रा, ढोलक और तबले पर राजेश रंजन, सारंगी पर अनीश मिश्रा, क्लारनेट पर मोहम्मद नूर और साइड इफ़ेक्ट पर अभिषेक राज ने संगत दी।



