उस दिन हेलमेट न पहना होता तो दो मिलियन में मैं भी शामिल होता- प्रो आर के धीमन
विश्व मस्तिष्क चोट जागरूकता दिवस वॉकथॉन

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। विश्व मस्तिष्क चोट जागरूकता दिवस पर वॉकथॉन किया गया।
शुक्रवार को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के न्यूरोसर्जरी विभाग ने विश्व मस्तिष्क चोट जागरूकता दिवस के अवसर पर सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और सिर की चोटों की रोकथाम के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए वॉकाथॉन आयोजित किया गया।
वहीं संस्थान निदेशक पद्मश्री डॉ. राधा कृष्ण धीमन द्वारा कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। प्रोफेसर धीमान ने संबोधित करते हुए कहा कि उस दिन हेलमेट ना पहना होता तो दो मिलियन में मैं भी शामिल होता। उसमें 50 -50 प्रतिशत हमारे भी चांसेस होते और आपके सामने खड़ा होकर बात नहीं कर रहा होता। जब भी हम हेड इंजरी अवेयरनेस की बात करते हैं, इन डायरेक्टली ट्रैफिक रूल्स की बात करते हैं।
ट्रैफिक रूल में सबसे पहली चीज होती है जो वॉक कर रहा है यानी पैदल चल रहा है तथा दैट इज द मोस्ट प्रियारिटीज होती है। इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. सौमेन कंजीलाल (आयोजन सचिव) एवं डॉ. श्रेयश राय (सह-आयोजन सचिव) द्वारा, डॉ. वेद प्रकाश मौर्य एवं डॉ. पवन कुमार वर्मा के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में किया गया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, लखनऊ के प्रमुख प्रोफ़ेसर अरुण कुमार श्रीवास्तव का सम्बोधित करते हुए यातायात नियमों के पालन के महत्व पर बल देते हुए सिर की चोटों के व्यापक सामाजिक प्रभावों को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख लोग गंभीर सिर की चोटों का शिकार होते हैं, जिनमें से लगभग 50 फीसदी को दीर्घकालिक या स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ता है। यह तथ्य निवारक उपायों और जिम्मेदार सड़क व्यवहार की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है।
इसी क्रम में संस्थान निदेशक डॉ. राधा कृष्ण धीमान ने दोपहिया वाहन चालको को गुलाब का फूल व हेलमेट पहनाकर सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने हेलमेट के नियमित उपयोग को दृढ़ता से प्रोत्साहित किया और इसे जीवन रक्षक उपाय के रूप में बताया, जो सिर की चोटों की गंभीरता को काफी हद तक कम कर सकता है। साथ ही
न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष, प्रोफ़ेसर अवधेश कुमार जायसवाल ने भी सड़क सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रतिभागियों और आम जनता से वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग से बचने का आग्रह किया, चाहे वह हैंड्स-फ्री डिवाइस ही क्यों न हो।
उन्होंने कहा कि ध्यान भटकना और एकाग्रता में कमी दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी बढ़ा देती है, जिससे ऐसी आदतें अत्यंत खतरनाक साबित होती हैं। यह
वॉकाथॉन वृंदावन गेट तक निकाली गयी । इस दौरान प्रतिभागियों ने सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नारे लगाए। गंतव्य स्थल पर यातायात पुलिस के सहयोग से एक संयुक्त पहल की गई, जिसमें बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चला रहे लोगों को जोखिमों के प्रति जागरूक किया गया तथा उन्हें सुरक्षित व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए नए हेलमेट वितरित किए गए।
सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, यातायात नियमों का पालन करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान लगभग 200 प्रतिभागियों में फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।



