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16 को जीवन के अंतिम चरण की देखभाल’ पर होगी पर कार्यशाला

 सीसीएम विभाग की कार्यशाला में सभी चिकित्सा संस्थानों के सदस्य होंगे शामिल

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। जीवन के अंतिम चरण की देखभाल पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

एसजीपीजीआईएमएस के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा 16 जनवरी को हरगोबिंद खुराना सभागार में हाइब्रिड मोड में ‘जीवन के अंतिम चरण की देखभाल’ पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन होगा।

‘आईसीयू में जीवन के अंतिम चरण की देखभाल’ गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार है। चिकित्सा विज्ञान हमें बताता है कि हमारे द्वारा उपचार ले रहे कुछ मरीज असाध्य रोग से ग्रसित हैं और चिकित्सक होने के नाते अक्सर हमें एक कठिन नैतिक मुद्दे का सामना करना पड़ता है।

ऐसे समय में कुछ प्रश्न डॉक्टरों को परेशान करते हैं,जैसे, “क्या हम मरीज की पीड़ा को बढ़ा रहे हैं और उसे शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण मृत्यु से वंचित कर रहे हैं, क्या हमें पीछे हटकर केवल सांत्वना प्रदान करने पर विचार करना चाहिए। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या हमें कानूनी रूप से जीवन रक्षक चिकित्सा को बंद करने या रोकने की अनुमति है।

2011 में, सर्वोच्च न्यायालय ने भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को वैध ठहराने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए। हालांकि, गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने वाला ऐतिहासिक फैसला 2018 में पारित हुआ।

उस समय न्यायालय द्वारा जीवन रक्षक उपचार बंद करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया में न्यायिक स्वीकृति आवश्यक थी, जो जटिल और समय लेने वाली थी। इसलिए यह रोगी की आईसीयू में भर्ती के दौरान संभव नहीं था।

नई दिल्ली के डॉ. आरके मणि के नेतृत्व में एक ‘टीम’ के अथक प्रयासों के फलस्वरूप, जनवरी 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने ‘अग्रिम चिकित्सा निर्देश’ और ‘जीवन रक्षक उपचार बंद करने’ को कानूनी मान्यता देते हुए एक फैसला सुनाया। जिससे प्रक्रिया सरल हो गई और न्यायिक अनुमोदन की आवश्यकता नहीं रही।

इसके बाद, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने फैसले पर विस्तृत चर्चा करने और इसे लागू करने का मार्ग खोजने के लिए एक तकनीकी संसाधन समूह का गठन किया। इसके परिणामस्वरूप, दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार किया गया। जिसे वर्ष 2024 के मध्य में ‘जीवन रक्षक उपचार बंद करने पर दिशानिर्देश’ के रूप में अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया।

ताकि इस महत्वपूर्ण विषय पर जनता की राय मांगी जा सके। अब संभावना है कि इसे अंतिम रूप देकर देश के लिए एक ‘दिशानिर्देश’ के रूप में वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को देश के सभी चिकित्सा संस्थानों में इस नीति को लागू करने का निर्देश दिया है।

अब यह प्रक्रिया काफी सरल हो गई है। प्राथमिक स्तर पर डॉक्टरों के एक बोर्ड जिसमें इलाज करने वाला चिकित्सक भी शामिल होता है और उस विशेष मामले में चिकित्सा उपचार की निरर्थकता प्रमाणित करनी होती है। इस पर परिवार के सदस्यों से चर्चा की जाएगी और उनकी सहमति प्राप्त की जाएगी।

इसके बाद, द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से एक मनोनीत सदस्य शामिल होगा। उस रोगी में चिकित्सा उपचार की निरर्थकता को प्रमाणित करेगा। उचित दस्तावेज़ीकरण और जानकारी न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजे जाने के बाद, जीवन रक्षक उपचार बंद किया जा सकता है।

संस्थान में ‘जीवन के अंतिम चरण की देखभाल’ के कार्यान्वयन के लिए क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए एक मानक संचालन प्रक्रिया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार की गयी है।

यह एसओपी उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अमित घोष के समक्ष प्रस्तुत की गई थी और उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि इस जानकारी को उत्तर प्रदेश राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के सभी सदस्यों के साथ साझा किया जाए। उनके निर्देशानुसार संस्थान के सीसीएम विभाग द्वारा इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

इसमें उत्तर प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों के वरिष्ठ सदस्य भाग लेंगे। हम आशान्वित हैं कि उत्तर प्रदेश राज्य के लिए ‘जीवन के अंतिम चरण की देखभाल’ नीति बहुत शीघ्र ही हमारे समक्ष होगी।

संस्थान में मकर संक्रांति पर ओपीडी में नहीं बनेंगे नये पर्चे..

संस्थान में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मकर संक्रांति के अवसर पर 15 जनवरी (गुरुवार) को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में 15 जनवरी को ओपीडी में नये पंजीकरण नहीं होंगे। इसमें पुराने रोगियों को ओपीडी परामर्श के लिये पहले से ही तारीख दी गयी है, उन्हे ओपीडी में देखा जायेगा

और जिन रोगियों की विभिन्न विभागों में जाँचो की तारीख है,उनकी जांचे भी होंगी। पूर्व निर्धारित ऑपरेशन भी यथावत होगे।

24 घंटे लैब क्रियाशील रहेगी। आकस्मिक सेवाएं यथावत चलेगी।

ओपीडी का सैम्पल कलेक्शन बंद रहने के साथ प्रशासनिक भवन व शैक्षणिक ब्लाक बंद रहेगा।

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