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सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती – मुक्तिनाथानन्द 

रामकृष्ण वचनामृत में श्री कृष्ण लीलाओ का वर्णन 

 

 लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। रामकृष्ण वचनामृत में श्री कृष्ण लीलाओ का वर्णन किया गया। रविवार को साप्ताहिक प्रवचन में रामकृष्ण मठ लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्म कथा अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक है।

उनका जन्म मथुरा में कंस के कारागार में हुआ था। कंस, जो देवकी का भाई था, एक आकाशवाणी से यह सुनकर भयभीत हो गया था कि उसकी मृत्यु देवकी के आठवें पुत्र के हाथों होगी।

इस डर से उसने देवकी और उनके पति वसुदेव को कैद कर लिया और उनके छह पुत्रों की हत्या कर दी। जब आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब अद्भुत चमत्कार हुआ।

कारागार के द्वार स्वयं खुल गए, पहरेदार सो गए और वसुदेव जी नवजात कृष्ण को लेकर यमुना नदी पार कर गोकुल पहुँचे।

वहाँ उन्होंने कृष्ण को नंद बाबा और यशोदा के घर छोड़ दिया और उनकी नवजात कन्या को लेकर वापस कारागार लौट आए।

स्वामी ने बताया कि कृष्ण का पालन-पोषण गोकुल में हुआ, जहाँ उन्होंने अनेक लीलाएँ कीं और बाल्यकाल से ही अपनी दिव्यता का परिचय दिया। आगे चलकर उन्होंने कंस का वध कर धर्म की स्थापना की।

उनकी जन्म कथा यह सिखाती है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है।  स्वामी मुक्तिनाथानंद ने आगे बताया कि वृन्दावन में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएँ अत्यंत अद्भुत, मधुर और भक्तों के हृदय को आनंदित करने वाली हैं।

वृन्दावन वह पवित्र भूमि है जहाँ कृष्ण ने अपने बाल्यकाल और किशोरावस्था में अनेक दिव्य लीलाएँ कीं। यहाँ उन्होंने गोप-गोपियों के साथ खेलते हुए माखन चुराया, बांसुरी की मधुर ध्वनि से सबको मोहित किया और यमुना तट पर रमणीय क्रीड़ाएँ कीं। कृष्ण की सबसे प्रसिद्ध लीलाओं में कालिय नाग का दमन, पूतना वध और गोवर्धन पर्वत को उठाना शामिल है।

इन लीलाओं के माध्यम से उन्होंने यह दिखाया कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर संकट का सामना करते हैं। रासलीला में कृष्ण ने गोपियों के साथ प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जो आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।

वृन्दावन की हर गली, कुंज और घाट आज भी कृष्ण की लीलाओं की याद दिलाते हैं। उनकी ये लीलाएँ हमें प्रेम, भक्ति, निस्वार्थता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण की शिक्षाएँ मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कृष्ण अर्जुन को कर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्ग बताते हैं।

वे कहते हैं कि मनुष्य को अपने कर्तव्य (कर्म) को बिना फल की चिंता किए करना चाहिए। इसे निष्काम कर्म कहा जाता है, जिससे मन शुद्ध और शांत रहता है। कृष्ण यह भी सिखाते हैं कि आत्मा अमर है, न वह जन्म लेती है और न ही मरती है।

इसलिए मृत्यु का भय व्यर्थ है। वे मनुष्य को अपने धर्म का पालन करने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। भक्ति योग के माध्यम से कृष्ण बताते हैं कि ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा और समर्पण से मनुष्य जीवन के दुखों से मुक्त हो सकता है। साथ ही, वे मन को नियंत्रित रखने, क्रोध और मोह से दूर रहने की सीख देते हैं।

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