अंगदान जीवन के पार जीने का वादा” शीर्षक पर आधारित समर्थन 2026 का आगाज
समर्थन -2026 में डॉ राजेश हर्षवर्धन हुए सम्मानित

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। अंगदान को बढ़ावा देने के लिए वर्कशॉप आयोजित की गयी।
रोट्टो (नॉर्थ), PGIMER, चंडीगढ़ में अस्पताल प्रशासन विभाग, PGIMER के सहयोग से “समर्थन 2026 अंगदान: जीवन के पार जीने का वादा” शीर्षक पर वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
जिसका उद्देश्य अंगदान, नीति‑निर्माण, जनजागरूकता तथा प्रत्यारोपण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाना था।
वहीं कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. विपिन कौशल, मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, PGIMER तथा नोडल ऑफिसर रोट्टो (नॉर्थ); डॉ. अमरजीत कौर, सीनियर रीजनल डायरेक्टर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, चंडीगढ़; डॉ. अनिल कुमार, डायरेक्टर, नोट्टो ; तथा डॉ. विवेक लाल, डायरेक्टर, PGIMER, चंडीगढ़ द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र में अंगदाताओं के परिजनों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। जिनके निस्वार्थ निर्णय ने अनेक रोगियों को नया जीवन प्रदान किया है।
समर्थन 2026 के दौरान यह रेखांकित किया गया कि राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति के बावजूद क्षेत्रों के बीच असमानताएँ, अवसंरचनात्मक चुनौतियाँ और जागरूकता की कमी अब भी मौजूद हैं।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम का लक्ष्य डिजिटल एडवोकेसी, जनविश्वास निर्माण, नीति‑समर्थन और संस्थागत सहयोग के माध्यम से मृतक अंगदान को गति देना और उसे टिकाऊ रूप से आगे बढ़ाना था। उत्तर भारत के विभिन्न सोट्टो जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा तथा जम्मू‑कश्मीर ने इस कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी दर्ज की।
सोट्टो उत्तर प्रदेश की ओर से संयुक्त निदेशक डॉ. राजेश हर्षवर्धन, डॉ. क्रिस अग्रवाल तथा श्री भोलेश्वर पाठक, MSSO कोऑर्डिनेटर ने समर्थन में सहभागिता की। डॉ. हर्षवर्धन ने इस अवसर पर दो महत्त्वपूर्ण व्याख्यान दिए।
अपने प्रथम व्याख्यान में उन्होंने बताया कि SGPGIMS, लखनऊ में लगभग 20 वर्ष बाद फरवरी 2026 में पहला सफल कैडेवरिक अंगदान संभव हो सका, जो वर्ष 2020 में सोट्टो उत्तर प्रदेश की स्थापना के बाद से किए जा रहे निरंतर प्रयासों, अनिवार्य ब्रेन‑स्टेम‑डेथ घोषणा तथा लगभग 38 ऐसे मामलों की काउंसलिंग के परिणामस्वरूप संभव हुआ।
अपने दूसरे व्याख्यान में डॉ. हर्षवर्धन ने नीति की अवधारणा पर विस्तार से जानकारी साझा करते हुए कहा कि किसी भी नीति की यात्रा प्रायः एक छोटे से अभियान से शुरू होती है, जो आगे चलकर व्यक्तियों और स्वयंसेवी संगठनों की सतत एडवोकेसी के माध्यम से मजबूत होकर औपचारिक नीति के रूप में आकार लेती है।
उन्होंने उदाहरण दिया कि भारत ने कैसे HIV/AIDS के खिलाफ लड़ाई, पल्स पोलियो अभियान तथा कोविड‑19 से जंग में जन‑एडवोकेसी और प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेपों के जरिए उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।
इसी क्रम में उन्होंने यह संदेश दिया कि अंगदान जन जागरूकता अभियान को भी इसी स्तर की राष्ट्रीय मुहिम के रूप में आगे बढ़ाना होगा, ताकि ज़रूरतमंद मरीजों को समय पर अंग उपलब्ध हो सकें और अधिक से अधिक जीवन बचाए जा सकें।
सोट्टो उत्तर प्रदेश की टीम ने राज्य में अंगदान एवं प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए किए गए नवाचारों और पहलों की विस्तृत जानकारी भी प्रस्थापित की। इन प्रयासों और उपलब्धियों की सराहना करते हुए समर्थन के दौरान डॉ. राजेश हर्षवर्धन को सम्मानित किया गया।



